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Jhajjar-Bahadurgarh News: छात्राओं को आयरन व कैल्शियम युक्त भोजन करने की दी सलाह
Tue, 18 Nov 2025 02:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Tue, 18 Nov 2025 02:02 AM IST
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-फोटो 58 : शिविर में पहुंंचे अतिथियों को दिए गए पौधे। स्रोत कॉलेज
बहादुरगढ़। वैश्य आर्य शिक्षण महिला महाविद्यालय में प्राकृतिक चिकित्सा दिवस के उपलक्ष्य में नैचुरोपैथी एवं योग कैंप के दौरान निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। जिसका थीम नेचर क्योर टू क्योर नेचर रहा। आयोजन नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ नेचुरोपैथी, आयुष मंत्रालय व भारत सरकार के सहयोग से हुआ।
नैचुरोपैथी डॉ. अजीत आनंद ने बताया कि प्रकृति के पांच तत्व जल, अग्नि, वायु, आकाश व पृथ्वी के संतुलन से अनेक रोगों की रोकथाम संभव है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनीता ने बताया कि छात्राओं को आयरन, कैल्शियम व प्रोटीन युक्त आहार लेने, फास्ट फूड से दूरी बनाने व नियमित स्वास्थ्य जांच करवाने की सलाह दी।
डॉ. बीके लवकेश ने बताया कि आयुर्वेद शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का विज्ञान है। योग सत्र में डॉ. अंजू ने छात्राओं को कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, ध्यान तकनीक व सूर्य नमस्कार का अभ्यास करवाया। डॉ. गुरमीत ने प्रतिभागियों को योग के सरल आसन, प्राणायाम व ध्यान तकनीकों का अभ्यास करवाकर स्वास्थ्य लाभों से अवगत कराया।
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महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. आशा शर्मा ने कहा कि आज की जीवनशैली में नैचुरोपैथी और योग की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। कार्यक्रम में स्वयंसेविकाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।
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नैचुरोपैथी डॉ. अजीत आनंद ने बताया कि प्रकृति के पांच तत्व जल, अग्नि, वायु, आकाश व पृथ्वी के संतुलन से अनेक रोगों की रोकथाम संभव है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनीता ने बताया कि छात्राओं को आयरन, कैल्शियम व प्रोटीन युक्त आहार लेने, फास्ट फूड से दूरी बनाने व नियमित स्वास्थ्य जांच करवाने की सलाह दी।
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डॉ. बीके लवकेश ने बताया कि आयुर्वेद शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का विज्ञान है। योग सत्र में डॉ. अंजू ने छात्राओं को कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, ध्यान तकनीक व सूर्य नमस्कार का अभ्यास करवाया। डॉ. गुरमीत ने प्रतिभागियों को योग के सरल आसन, प्राणायाम व ध्यान तकनीकों का अभ्यास करवाकर स्वास्थ्य लाभों से अवगत कराया।
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महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. आशा शर्मा ने कहा कि आज की जीवनशैली में नैचुरोपैथी और योग की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। कार्यक्रम में स्वयंसेविकाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।