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Jhajjar-Bahadurgarh News: 16 को अमृत सिद्धि रवि योग में मनाया जाएगा गंगा दशहरा

Mon, 03 Jun 2024 04:37 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Mon, 03 Jun 2024 04:37 AM IST
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Ganga Dussehra will be celebrated on 16th in Amrit Siddhi Ravi Yoga.
बहादुरगढ़। इस बार ज्येष्ठ माह में गंगा दशहरा 16 जून को है। गंगा दशहरा अमृत सिद्धि, रवि योग जैसे शुभ योग में मनाया जाएगा। इस दिन स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त बेहद शुभ होता है।
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अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिदिध् ियोग 16 जून को सुबह 5 बजकर 45 मिनट से शुरू होगा और 11 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही रवि योग शाम 6 बजकर 14 मिनट से 17 जून को सुबह 5 बजकर 26 मिनट तक है। इसके साथ ही वरीयान योग 15 जून को रात 8 बजकर 10 मिनट से 16 जून को रात 9 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। 15 जून की सुबह 8 बजकर 10 मिनट से 16 जून की सुबह 11 बजकर 12 मिनट तक है। इसके बाद चित्रा नक्षत्र आरंभ हो जाएगा।
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पंडित प्रवीण शास्त्री ने बताया कि धार्मिक मान्यता है कि ज्येष्ठ माह में गंगा दशहरा के दिन गंगा में डुबकी लगाने से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं और यही नहीं उसे सुख-समृद्धि का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। ऐसे में इस बार गंगा दशहरा अमृत सिद्धि, रवि योग जैसे शुभ योगों में 16 जून को मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गंगा दशहरा पर्व देशभ में धूमधाम से मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन गंगा दशहरा मनाया जाता है। हिंदू धर्म में गंगा दशहरे का विशेष महत्व है, क्योंकि इस दिन मां गंगा धरती पर अवतरित हुई थीं। इस दिन मोक्षदायिनी गंगा की विधि-विधान से पूजा अर्चना भी की जाती है। साथ ही दान जैसे पुण्य कार्य करते हुए गंगा में स्नान करने से विशेष लाभ की प्राप्ति भी होती है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में गंगा माता को मोक्षदायिनी भी कहा गया है। ये भी मान्यता है कि गंगा शिवजी की जटाओं से निकलती है इसलिए इस दिन शिवजी की पूजा भी पूरे विधान के साथ करनी चाहिए। इससे विशेष लाभ की प्राप्ति भी होती है। इसी कारण इस दिन गंगा स्नान करने के साथ पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है और हर तरह के पापों से मुक्ति भी मिलती है। गंगा स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देने के साथ प्रणाम करें और फिर साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद मां गंगा की पूजा करें। उन्हें सिंदूर, फूल, अक्षत, मिठाई आदि का भोग लगाने के साथ आटे या मिट्टी से बना घी का दीपक अर्पित करें। किसी भी भूल के लिए क्षमा याचना करें। इसके बाद मां गंगा मंत्र, गंगा स्तुति करें।
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