फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jhajjar/Bahadurgarh News ›   Four ancestors of freedom fighter Badri Prasad Kala had sacrificed their lives at the post bungalow in Meham.

Jhajjar-Bahadurgarh News: महम के डाक बंगले में सेनानी बदरी प्रसाद काला के चार पूर्वजों ने दी थी कुर्बानी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 23 Sep 2025 12:50 AM IST
विज्ञापन
Four ancestors of freedom fighter Badri Prasad Kala had sacrificed their lives at the post bungalow in Meham.
अंग्रेजों के कार्यालय पर लगा था यह पत्थर
अजमेर गोयत
विज्ञापन

महम (रोहतक)। कस्बे का डाक बंगला शहादत की कहानी बयां कर रहा है। अंग्रेजों की यातनाएं सहकर स्वतंत्रता सेनानियों ने इसे शहीद स्मारक का दर्जा दिया है। यही नही, स्वतंत्रता सेनानी बदरी प्रसाद काला के चार पूर्वजों ने 1857 से 1947 तक इसी स्मारक से अंग्रेजों के विरुद्ध आजादी की लड़ाई लड़ी व कुर्बानियां दीं।
स्वतंत्रता सेनानी बद्री प्रसाद काला के पूर्वज कूड़ा राम, भिखारी राम, मेहर व भानी राम ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपनी कुर्बानी दी थी। वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने पर भिखारी राम को 22 क्रांतिकारियों के साथ महम के आजाद चौक पर फांसी दे दी गई थी।
विज्ञापन

1857 में ही भिखारी राम के भाई कूड़ा राम, मेहर व भानी राम को क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में काले पानी अंडमान निकोबार की सजा दी गई थी। यहां 13 साल बाद कूड़ा राम की मौत हो गई थी। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

काला के नाम पर बनाया सामुदायिक केंद्र
अंग्रेजों ने जिस पुलिस थाना महम में बद्री प्रसाद काला को बंद कर भयंकर यातनाएं दीं, उसे तोड़कर वर्तमान में उनके नाम पर सामुदायिक केंद्र बनाया गया है। अंग्रेजों के समय इसका नाम डाक बंगला था। इससे पहले यह किले के नाम से जाना जाता था। डाक बंगला लिखा पत्थर अब भी मौजूद है। यहां से ही अंग्रेजों का शासन चलता था। आजादी के बाद भी वर्षों तक शासन इसी भवन से चला।
--------
बद्री प्रसाद काला को विरासत में मिली थी देशभक्ति
महम के स्वतंत्रता सेनानी बद्री प्रसाद काला को देशभक्ति विरासत में मिली थी। बद्री प्रसाद काला का जन्म 15 सितंबर 1916 को महम के जांगड़ा परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम श्रीराम, माता का नाम पातो देवी था। इन्हें 10 सितंबर 1930 को अनाज मंडी में बाल भारती सभा के प्रदर्शन के दौरान पहली बार गिरफ्तार किया गया था।
बद्री प्रसाद काला के शरीर पर यातनाओं के निशान अंत तक मौजूद रहे। उन्हें लाहौर, मुल्तान, अंबाला, रोहतक व हिसार जेलों में घोर यातनाएं दी गईं।
मुल्तान जेल में सहीं यातनाएं
काला को सजा के लिए उन दिनों की खतरनाक मुल्तान जेल में रखा गया। जेल में उन्हें यातनाएं दी जातीं। जेलों में उनके सहयोगियों में मुख्य रूप से ज्ञानी जैल सिंह, पंडित श्रीराम शर्मा, रणवीर सिंह हुड्डा, प्रताप सिंह कैरो, भगवत दयाल शर्मा, गोपीचंद भार्गव, मूलचंद जैन व देवीलाल सरीखे स्वतंत्रता सेनानी शामिल रहे।


आजादी के बाद काला को सम्मान मिला। पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरो ने गोहाना तहसील का ऑनरेरी सब रजिस्ट्रार नियुक्त किया था। उन्हें ग्रेट स्पीकर ऑफ पंजाब की उपाधि से सम्मानित किया गया। काला बंटवारे से आहत थे। विस्थापितों को बसाने में उन्होंने अहम योगदान दिया।
फोटो 1 स्वतंत्रता सेनानी बद्री प्रसाद काला का फाइल फोटो।
2 वह पत्थर जिस पर अंग्रेजों के शासन के समय लिखा डाक बंगला।

अंग्रेजों के कार्यालय पर लगा था यह पत्थर

अंग्रेजों के कार्यालय पर लगा था यह पत्थर

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed