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Hindi News ›   Haryana ›   Jhajjar/Bahadurgarh News ›   Five thousand rupees and charts model comes as Thrmakol

पांच हजार रुपये में बनकर आए थर्माकोल और चार्ट के मॉडल

Wed, 06 Aug 2014 12:47 AM IST
jhjhar
jhjhar Updated Wed, 06 Aug 2014 12:47 AM IST
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 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, झज्जर में चल रही इंस्पायर अवार्ड्स एक्जीविशन मंगलवार को खूब चर्चा में रही। प्रदर्शनी के दूसरे दिन भाग लेने वालों की संख्या कल के तुलना में दुगनी हो गई। दूसरे दिन प्रदर्शनी में भाग लेने वाले स्कूलों की संख्या 40 से बढ़कर 80 हो गई।

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प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए 199 स्कूलों के विद्यार्थियों के पास रुपये पांच हजार की राशि पहुंची थी। आज जो स्कूल भागीदारी करने के लिए पहुंचे उनमें से भी ज्यादातर ने थर्मोकोल की शीट पर अथवा चार्ट पर मॉडल बना थे। जबकि  नियमों में इन चीजों का प्रयोग नहीं किया जाना था।
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 हालांकि कुछ अच्छे मॉडल भी आए। जिनमें आग लगने पर सायरन बजने का मॉडल काफी पसंद किया गया। इसके अलावा अनाज सुखाने का तरीका, बांध से बिजली उत्पादन, शुद्ध पर्यावरण सिटी जैसे मॉडल काफी पसंद किए गए।
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 प्रदर्शनी का अवलोकन एससीईआरटी के प्रतिनिधि और इस योजना के कोआर्डिनेटर डॉ मधु वशिष्ठ ने इस प्रदर्शनी का अवलोकन किया। बाद में उन्होंने कहा कि योजना का मुख्य उद्देश्य विज्ञान को बढ़ावा देना है। प्रदर्शनी में आने वाले कुछ बच्चों के साथ शिक्षकों के बजाय उनके अभिभावक आए हुए थे। जबकि कई शिक्षकों में इस बात की चर्चा रही कि उन्हें स्कूल से यहां तक आने का किराया तक भी नहीं दिया जा रहा।

पिछले साल भूल गया था विभाग
 इस राशि से विज्ञान प्रदर्शनी पिछले साल ही लगाई जानी थी, मगर विभाग यह प्रदर्शनी लगाना भूल गया । हरियाणा का झज्जर एक मात्र ऐसा जिला था कि जिसमें इस योजना के तहत प्रदर्शनी लग नहीं पाई। अब भारत सरक ार ने इस भूल को सुधारने का अवसर दिया है ।

 जिसके तहत जहां भी यह प्रदर्शनी नहीं लग पाई थी वहां इसे लगाया जाए। इसके अलावा जहां प्रदर्शनी लगी थी मगर वहां कुछ स्कूल भाग नहीं ले पाए, जबकि उनको राशि आई थी, उन्हें भी इस अवसर का लाभ उठाने का मौका दिया गया । इसी योजना के तहत झज्जर में सोमवार को आरंभ हुई तीन दिवसीय प्रदर्शनी में यह बात सामने आई कि योजना के तहत प्रत्येक विद्यार्थी को पांच हजार रुपये भेजे गए थे।

 जिससे बच्चे कुछ क्रिएटिव करते हुए नवाचार के तहत नया करके दिखाएं। मगर यहां कुल 40 स्कूलों के प्रतिभागियों ने हिस्सेदारी की। साथ ही जो मॉडल प्रस्तुत किए वे न तो स्तरीय थे और न ही उनकी ज्यादा लागत थी। जिला शिक्षा अधिकारी एसआर रोहिला ने भी इस बात पर सवाल उठाए थे।

प्रतिनिधि ने किया दौरा : एससीईआरटी गुडगांव की ओर इस योजना के संयोजक डॉ. मधुप वशिष्ठ ने इस प्रदर्शनी का आज अवलोकन किया। जिला विज्ञान विशेषज्ञ सम्मत सिंह, प्राध्यापक  गुलशन राय सहित अन्य शिक्षकों के साथ उन्होंने सभी मॉडल देखे।

उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि प्रदर्शनी में ज्यादातर मॉडल थर्मोकोल या चार्ट पर बनाए गए हैं। पांच हजार की राशि के बारे में उन्होंने कहा कि इस राशि में आधी राशि मॉडल बनाने पर खर्च की जानी थी जबकि शेष राशि में विद्यार्थी और शिक्षक के आने-जाने के खर्च के लिए थी।

शिक्षकों के बजाय पहुंचे अभिभावक : कुछ विद्यार्थी ऐसे भी थे जिनके साथ स्कूलों के शिक्षकों के बजाय उन्हें अभिभावक लेकर आए । नियमानुसार विद्यार्थी के साथ शिक्षकों का आना चाहिए था। डॉ. मधुप ने माना कि शिक्षकों को विद्यार्थी के साथ आना चाहिए था। लेकिन जो शिक्षक नहीं आए उनका क्या होगा इसका कोई जवाब नहीं दिया।
 
भाग नहीं लेने वालों का क्या होगा : इस योजना के तहत झज्जर के 199 विद्यार्थियों को राशि दी गई थी । प्रदर्शनी में दूसरे दिन 80 मॉडल प्रस्तुत किए गए। शेष बचे करीब 120 विद्यालयों के भाग नहीं लेने पर उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी, यह किसी को पता नहीं।  हालांकि आज प्रदर्शनी में इस बात की खास चर्चा रही।

आज होगा निर्णय :
प्रतियोगिता में कौन प्रथम रहा और कौन दूसरे स्थान पर इस का निर्णय आज किया जाएगा । चार अगस्त से आरंभ हुई प्रदर्शनी का समापन 6 अगस्त को होना है। तीसरे दिन प्रदर्शनी में कितने स्कूलों के विद्यार्थी भाग लेते हैं, यह भी देखने वाली बात होगी ।

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