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यूरिया खाद के लिए मारामारी, गाड़ी से ही उतार ले रहे किसान
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यूरिया खाद को लेकर मारामारी चल रही है। बारिश होने के बाद यूरिया खाद की मांग बढ़ गई है। सुबह ही किसान अपने वाहन लेकर शहर में खाद लेने के लिए आने लगते हैं और दिनभर यह सिलसिला चलता रहता है। जबकि किसानों को खाद की अधिक मात्रा में आवश्यकता जनवरी तक ही होती है। मंगलवार को शहर की अनाज मंडी में स्थित खाद बिक्री केंद्र पर किसानों की काफी भीड़ देखी गई। यहां पर दो ट्रक खाद लेकर आए थे। इनमें 975 बैग यूरिया था। जिसको किसानों ने गाड़ियों के अंदर से ही उठा लिया। करीब 100 किसानों को ये बैग उपलब्ध कराए गए। किसानों का कहना है कि फसल में खाद नहीं डाली तो पैदावार आधी रह जाएगी। इसलिए फसल में खाद डालना आवश्यक है।
किसानों की प्रतिक्रिया
मैं यूरिया लेने के लिए अलसुबह ही पहुंच गया था। विभाग की दुकान पर पहुंचा तो पता चला कि वहां पर आज खाद आएगी। खाद लेने के लिए दोपहर तक इंतजार करना पड़ा है। अगर खाद नहीं डाली तो फसल की पैदावार आधी रह जाएगी।
धमेंद्र।
खाद डाले बिना गेहूं की फसल में फुटाव नहीं होता। ऐसे में मुझे समय पर खाद मिल नहीं रही है। मुझे खाद लेने के लिए काफी परेशान होना पड़ रहा है।
रामनिवास।
खाद की ज्यादा दिक्कत तो दिसंबर और जनवरी में ही होती है। इसके बाद तो खाद की आवश्यकता नहीं रहेगी। अब खाद के लिए चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
संजय।
विभाग को समझ नहीं आ रहा कि किसानों को यूरिया की जरूरत दिसंबर और जनवरी में होती है। विभाग को इन दो महीनों के लिए पहले ही स्टॉक रखना चाहिए था।
दीपक।
हर रोज यूरिया की भिवानी से गाड़ियां आ रही हैं। मंगलवार को दो गाड़ियां आई थीं। खाद साथ-साथ बिक जाती है। अब बुधवार को खाद आने की उम्मीद है।
विकास, इफ्को ब्रिकी केंद्र, अनाज मंडी, झज्जर।
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किसानों की प्रतिक्रिया
मैं यूरिया लेने के लिए अलसुबह ही पहुंच गया था। विभाग की दुकान पर पहुंचा तो पता चला कि वहां पर आज खाद आएगी। खाद लेने के लिए दोपहर तक इंतजार करना पड़ा है। अगर खाद नहीं डाली तो फसल की पैदावार आधी रह जाएगी।
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धमेंद्र।
खाद डाले बिना गेहूं की फसल में फुटाव नहीं होता। ऐसे में मुझे समय पर खाद मिल नहीं रही है। मुझे खाद लेने के लिए काफी परेशान होना पड़ रहा है।
रामनिवास।
खाद की ज्यादा दिक्कत तो दिसंबर और जनवरी में ही होती है। इसके बाद तो खाद की आवश्यकता नहीं रहेगी। अब खाद के लिए चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
संजय।
विभाग को समझ नहीं आ रहा कि किसानों को यूरिया की जरूरत दिसंबर और जनवरी में होती है। विभाग को इन दो महीनों के लिए पहले ही स्टॉक रखना चाहिए था।
दीपक।
हर रोज यूरिया की भिवानी से गाड़ियां आ रही हैं। मंगलवार को दो गाड़ियां आई थीं। खाद साथ-साथ बिक जाती है। अब बुधवार को खाद आने की उम्मीद है।
विकास, इफ्को ब्रिकी केंद्र, अनाज मंडी, झज्जर।