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आज केएमपी को जाम करेंगे किसान
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बहादुरगढ़। चार माह से अधिक समय से तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलनरत किसान 10 अप्रैल को कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे को जाम करेंगे। किसान सुबह 8 बजे ही केएमपी की तरफ रवाना हो जाएंगे और 11 बजे से पूर्ण रूप से केएमपी को बंद कर देंगे। जाम 11 अप्रैल 11 बजे तक चलेगा। इसके बाद किसान दिल्ली कू च करने की आगामी रणनीति तैयार करेंगे।
हरियाणा संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष विकास सीसर और किसान नेता जोगेंद्र नैन ने कहा कि हमें किसी भी हाल में कृषि कानून स्वीकार्य नहीं हैं। इन कानूनों को बनाने से पहले सरकार ने किसानों से किसी भी तरह की कोई राय नहीं ली। जब किसान ही इन कानूनों को नहंीं मानते तो इसका क्या फायदा। सरकार को तत्काल प्रभाव से इनको वापस लेने की जरूरत है।
जाम के बाद दिल्ली कूच की रणनीति बनाएंगे
भारतीय किसान यूनियन (लोखवाल) के ब्लाक प्रधान हरप्रीत सिंह ने बताया कि सरकार कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए तैयार नहीं है। इसको लेकर किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। 10 अप्रैल शनिवार को हम केएमपी जाम कर रहे हैं। जिसके बाद हम दिल्ली पैदल कूच करने केा लेकर आगे की रणनीति बनाएंगे। दिल्ली में हम संसद भवन का घेराव करेंगे। कृति किसान यूनियन के युवा नेता जसप्रीत झवेलवाली ने बताया कि अब टीकरी बॉर्डर पर किसानों को तरह-तरह से परेशान किया जा रहा है। कभी बिजली का तार हटा दिया जाता है तो कभी पानी का टैंकर हम तक नहीं पहुंचने दिया जाता है। 10 अप्रैल को केएमपी जाम के कॉल के बाद महिलाएं भी टीकरी बॉर्डर पर पहुंची हैं।
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किसान 13 को दिल्ली के बॉर्डर पर मनाएंगे बैसाखी
13 अप्र्रैल को बैसाखी का पर्व दिल्ली के सभी बॉर्डर पर मनाया जाएगा। 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती पर संविधान बचाओ दिवस मनाया जाएगा। एक मई को दिल्ली के बॉर्डर पर मजदूर दिवस मनाया जाएगा। किसानों का कहना है कि इस दिन सभी कार्यक्रम मजदूर और किसान एकता को समर्पित होंगे। मई के पहले हफ्ते में संसद कूच किया जाएगा। किसानों का दावा है कि इस पैदल मार्च में महिलाएं बढ़-चढ़कर भाग लेंगी और यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से होगा। अपने गांव व शहरों से किसान दिल्ली बॉर्डर तक अपने वाहनों से आएंगे। इसके बाद दिल्ली बॉर्डर से संसद तक पैदल मार्च किया जाएगा।
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हरियाणा संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष विकास सीसर और किसान नेता जोगेंद्र नैन ने कहा कि हमें किसी भी हाल में कृषि कानून स्वीकार्य नहीं हैं। इन कानूनों को बनाने से पहले सरकार ने किसानों से किसी भी तरह की कोई राय नहीं ली। जब किसान ही इन कानूनों को नहंीं मानते तो इसका क्या फायदा। सरकार को तत्काल प्रभाव से इनको वापस लेने की जरूरत है।
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जाम के बाद दिल्ली कूच की रणनीति बनाएंगे
भारतीय किसान यूनियन (लोखवाल) के ब्लाक प्रधान हरप्रीत सिंह ने बताया कि सरकार कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए तैयार नहीं है। इसको लेकर किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। 10 अप्रैल शनिवार को हम केएमपी जाम कर रहे हैं। जिसके बाद हम दिल्ली पैदल कूच करने केा लेकर आगे की रणनीति बनाएंगे। दिल्ली में हम संसद भवन का घेराव करेंगे। कृति किसान यूनियन के युवा नेता जसप्रीत झवेलवाली ने बताया कि अब टीकरी बॉर्डर पर किसानों को तरह-तरह से परेशान किया जा रहा है। कभी बिजली का तार हटा दिया जाता है तो कभी पानी का टैंकर हम तक नहीं पहुंचने दिया जाता है। 10 अप्रैल को केएमपी जाम के कॉल के बाद महिलाएं भी टीकरी बॉर्डर पर पहुंची हैं।
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किसान 13 को दिल्ली के बॉर्डर पर मनाएंगे बैसाखी
13 अप्र्रैल को बैसाखी का पर्व दिल्ली के सभी बॉर्डर पर मनाया जाएगा। 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती पर संविधान बचाओ दिवस मनाया जाएगा। एक मई को दिल्ली के बॉर्डर पर मजदूर दिवस मनाया जाएगा। किसानों का कहना है कि इस दिन सभी कार्यक्रम मजदूर और किसान एकता को समर्पित होंगे। मई के पहले हफ्ते में संसद कूच किया जाएगा। किसानों का दावा है कि इस पैदल मार्च में महिलाएं बढ़-चढ़कर भाग लेंगी और यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से होगा। अपने गांव व शहरों से किसान दिल्ली बॉर्डर तक अपने वाहनों से आएंगे। इसके बाद दिल्ली बॉर्डर से संसद तक पैदल मार्च किया जाएगा।