बादली। कृषि कानूनों के विरोध में ढांसा बॉर्डर पर किसानों का धरना जारी है। अब धरनास्थल पर मौसम के अनुसार खाद्य पदार्थों में बदलाव किया जाने लगा है। सर्दी में शुरू हुई जलेबी अभी भी बनाई जा रही है। जबकि पूड़ी की जगह रोटी ने ले ली है। रोटी बनाने की इच्छा किसानों ने जताई है। गर्मी से बचने के लिए फूंस व बांस की झोपड़ी बनाई गई है और उनमें तिरपाल की जगह जाली लगाई गई है। टेंट के ऊपर काला तिरपाल डाला गया है ताकि धूप से बचा जा सके। इस तरह से पूरी व्यवस्था मौसम बदलने के बाद शुरू हो गई है।
किसान सतपाल शर्मा, विकास गुलिया, वीरेंद्र डागर, शमशेर सिंह, जयप्रकाश ने कहा कि धरनास्थल पर मौसम के अनुसार संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार उनकी मांगों को नहीं मान रही है वे भी पीछे हटने वाले नहीं है। चाहे इसके लिए उन्हें अपना बलिदान ही क्यों न देना पड़े। उन्होंने कहा कि ढांसा बॉर्डर धरनास्थल पर व्यवस्थाएं भी मौसम के अनुसार हो रही हैं। पहले जहां सर्दी के मौसम में कंबल व गद्दे किसानों को दिए गए थे। वहीं बारिश के बचाव के लिए वाटरप्रूफ टेंट व तिरपाल लगवाया गया है। अब जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है तो धूप से बचने के लिए झोपड़ी बननी शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि बॉर्डर पर फिलहाल किसानों ने एक झोपड़ी बनाई है ताकि धूप होने पर गर्मी न लगे। झोपड़ी में मनोरंजन और अपडेट रहने के लिए टेलीविजन भी लगाया गया है। इसके साथ ही किसानों ने गर्मी में ठंडे पानी के लिए फ्रिज व गर्मी से बचने के लिए कूलर लगाने शुरू कर दिए हैं। अभी तक 12 बड़े कूलर आंदोलन स्थल पर आए हैं। किसान नेताओं का कहना है कि यदि आंदोलन लंबा चलेगा, तो वे गर्मी से बचने के लिए हर संसाधन को जुटाएंगे।