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मधुमक्खी पालन से किसान हो सकते हैं संपन्न : डीसी
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झज्जर। पारंपरिक खेती के साथ ही बदलते परिवेश में किसान अब मधुमक्खी पालन को भी बढ़ावा देते हुए आर्थिक रूप से साधन संपन्न हो सकते हैं। यह बात डीसी श्याम लाल पूनिया ने कही। डीसी ने मधुमक्खी पालन व्यवसाय के बारे में किसानों को जागरूक करते हुए विभागीय योजना का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने मधुमक्खी पालकों व शहद के व्यवसाय के उत्थान के लिए प्रदेश में नया मिशन लागू किया है, जिसका नागरिक ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाएं। सरकार की ओर से राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन व हनी मिशन (एनबीएचएम) के अंतर्गत मधुमक्खी पालन, संवर्धन प्रोजेक्ट्स पर अनुदान राशि उपलब्ध करवाई जा रही है।
अनुदान राशि देकर किया जा रहा है प्रोत्साहित
डीसी ने बताया कि मधुमक्खी पालन उपकरणों की निर्माण इकाई मद में 20 लाख रुपये के प्रोजेक्ट पर अधिकतम 8 लाख रुपये प्रति परियोजना की अनुदान राशि उपलब्ध करवाई जा रही है। इसी प्रकार से प्रति परियोजना पर पालकों को पंजीकरण एवं बीमा की सुविधा दी गई है। उन्होंने बताया कि कस्टम हायरिंग केंद्र मद में 75 लाख रुपये के प्रोजेक्ट पर अधिकतम 25 लाख रुपये प्रति परियोजना, प्रशिक्षण 200 घंटे के लिए (25 प्रतिभागी प्रति बैच) मद में कौशल विकास के मापदंडों के अनुसार 800 रुपये प्रतिदिन, प्रतिभागी, शहद और उत्पादों का संग्रह, व्यापार, ब्रांडिंग, विपणन आदि केंद्र मद में 30 लाख रुपये के प्रोजेक्ट पर अधिकतम 30 लाख रुपये प्रति परियोजना, शहद और अन्य प्रसंस्करण इकाइयां, प्लांट मद में 500 लाख रुपये के प्रोजेक्ट पर अधिकतम 300 लाख रुपये प्रति परियोजना, शहद और अन्य मधुमक्खी, शीत भंडारण आदि मद में 80 लाख रुपये के प्रोजेक्ट पर अधिकतम 40 लाख रुपये प्रति परियोजना व टेस्टिंग लैब मद में 100 लाख रुपये के प्रोजेक्ट पर अधिकतम 50 लाख रुपये प्रति परियोजना की अनुदान राशि उपलब्ध करवाई जा रही है।
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उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने मधुमक्खी पालकों व शहद के व्यवसाय के उत्थान के लिए प्रदेश में नया मिशन लागू किया है, जिसका नागरिक ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाएं। सरकार की ओर से राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन व हनी मिशन (एनबीएचएम) के अंतर्गत मधुमक्खी पालन, संवर्धन प्रोजेक्ट्स पर अनुदान राशि उपलब्ध करवाई जा रही है।
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अनुदान राशि देकर किया जा रहा है प्रोत्साहित
डीसी ने बताया कि मधुमक्खी पालन उपकरणों की निर्माण इकाई मद में 20 लाख रुपये के प्रोजेक्ट पर अधिकतम 8 लाख रुपये प्रति परियोजना की अनुदान राशि उपलब्ध करवाई जा रही है। इसी प्रकार से प्रति परियोजना पर पालकों को पंजीकरण एवं बीमा की सुविधा दी गई है। उन्होंने बताया कि कस्टम हायरिंग केंद्र मद में 75 लाख रुपये के प्रोजेक्ट पर अधिकतम 25 लाख रुपये प्रति परियोजना, प्रशिक्षण 200 घंटे के लिए (25 प्रतिभागी प्रति बैच) मद में कौशल विकास के मापदंडों के अनुसार 800 रुपये प्रतिदिन, प्रतिभागी, शहद और उत्पादों का संग्रह, व्यापार, ब्रांडिंग, विपणन आदि केंद्र मद में 30 लाख रुपये के प्रोजेक्ट पर अधिकतम 30 लाख रुपये प्रति परियोजना, शहद और अन्य प्रसंस्करण इकाइयां, प्लांट मद में 500 लाख रुपये के प्रोजेक्ट पर अधिकतम 300 लाख रुपये प्रति परियोजना, शहद और अन्य मधुमक्खी, शीत भंडारण आदि मद में 80 लाख रुपये के प्रोजेक्ट पर अधिकतम 40 लाख रुपये प्रति परियोजना व टेस्टिंग लैब मद में 100 लाख रुपये के प्रोजेक्ट पर अधिकतम 50 लाख रुपये प्रति परियोजना की अनुदान राशि उपलब्ध करवाई जा रही है।
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