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केएमपी पर किसानों ने लगाया जाम, सरकार के खिलाफ की नारेबाजी

Sat, 10 Apr 2021 11:49 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 10 Apr 2021 11:49 PM IST
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Farmers blocked the KMP, sloganeering against the government
बहादुरगढ में मांडोठी टोल के नजदीक किसानों द्वारा किया गया जाम। - फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। नए कृषि कानूनों को लेकर चार महीने से अधिक समय से आंदोलन कर रहे किसानों ने 10 अप्रैल शनिवार को केएमपी जाम किया गया और दिनभर यहां जनसभा चलती रही। किसानों का यह जाम रविवार 8 बजे तक रहेगा। हालांकि किसानों के साथ-साथ हरियाणा के ग्रामीण इलाकों से भी काफी संख्या में महिलाएं केएमपी पर पहुंची। उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जाम के दौरान प्रशासन की ओर से व्यवस्थाएं बनाने के लिए 7 स्थानों पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए हैं। वहीं पुलिस वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी पूरी निगरानी रख रहे हैं। बहादुरगढ़ में मांडोठी गांव के नजदीक केएमपी पर किसानों ने जनसभा की।
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पिछले लंबे समय से नए कृषि कानूनों को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए अब 24 घंटे के लिए केएमपी पर उतरकर जाम लगा दिया। किसान यहां पर धरना देकर बैठ गए। किसानों द्वारा 11 अप्रैल की सुबह 8 बजे तक केएमपी को जाम किया जाएगा। इस दौरान किसान रात को भी एक्सप्रेस-वे पर ही सोएंगे। शनिवार की सुबह करीब 8 बजे बहादुरगढ़ में मांडोठी टोल प्लाजा के पास आंदोलनकारियों ने केएमपी पर जाम लगा दिया। भारतीय किसान यूनियन एकता (उग्राहां) के सदस्य एक्सप्रेस-वे पर बैठे रहे। जाम के दौरान केवल उन्हीं वाहनों को ही किसानों ने निकलने दिया जो किसानों के प्रस्तावित जाम से पहले केएमपी पर चढ़ गए। मगर कॉमर्शियल वाहनों को रोका गया। आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखने के लिए किसान नेता लगातार सभाएं कर किसानों से पूरी तरह से धैर्य बनाकर रखने की अपील भी करते रहे। आंदोलनकारियों की ओर से सभाओं का दौर जारी रहा। सड़क पर दरी बिछाकर व स्टेज लगाकर धरना व संबोधन भी चलता रहा। एक तरफ भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां की स्टेज चलती रही तो दूसरी जगह 11 जत्थेबंदियों की स्टेज पर किसान बैठे रहे।
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किसान नेता बलबीर सिंह, दीदार सिंह और जोगेंद्र सिंह ने कहा कि हमें किसी भी हाल में ये बिल नहीं चाहिए। इन कृषि बिलों को बनाने से पहले सरकार को किसानों से राय लेनी चाहिए थी। जब हम किसान ही इस बिल का विरोध कर रहे हैं तो इस बिल का क्या फायदा। सरकार को तत्काल प्रभाव से इन बिलों को वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार इन बिलों को वापस लेने के लिए तैयार नहीं है, जिसको लेकर किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। शनिवार 10 अप्रैल को केएमपी जाम किया गया है। यदि फिर भी सरकार नहीं चेतती है तो हम दिल्ली पैदल कूच करने को लेकर आगे की रणनीति बनाएंगे। दिल्ली में हम संसद भवन का घेराव करेंगे। केएमपी जाम के दौरान हरियाणा के ग्रामीण इलाकों से भी काफी संख्या में महिलाएं पहुंची।
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13 अप्रैल को बैसाखी का पर्व दिल्ली के बॉर्डरों पर मनाया जाएगा
13 अप्रैल को बैसाखी का पर्व दिल्ली के सभी बॉर्डरों पर मनाया जाएगा। 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर संविधान बचाओ दिवस मनाया जाएगा। 1 मई को दिल्ली बॉर्डरों पर मजदूर दिवस मनाया जाएगा। किसानों का कहना है कि इस दिन सभी कार्यक्रम मजदूर, किसान एकता को समर्पित होंगे। मई के पहले हफ्ते में संसद कूच किया जाएगा। किसानों का दावा है कि इस पैदल मार्च में महिलाएं बढ़-चढ़कर भाग लेंगी और यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से होगा। अपने गांव व शहरों से किसान दिल्ली बॉर्डर तक अपने वाहनों से आएंगे। इसके बाद दिल्ली बॉर्डर से संसद तक पैदल मार्च किया जाएगा।
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