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किसान नेता बोले - आंदोलन में सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की भरपाई के कानून को नहीं मानेंगे हम

Sun, 04 Apr 2021 01:43 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 04 Apr 2021 01:43 AM IST
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farmers agitation
बहादुरगढ़। तीन कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए चल रहा किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। टीकरी बॉर्डर पर किसानों का धरना शनिवार को भी जारी रहा। राजस्थान के अलवर में भाकियू हमले के विरोध में केंद्र और राजस्थान सरकार का पुतला फूंका गया। इस दौरान आयोजित सभा में किसान नेताओं ने कहा कि आंदोलनों में सरकारी संपत्ति के नुकसान की भरपाई आंदोलनकारियों से करने संबंधी हरियाणा सरकार के नए कानून को नहीं मानेंगे। इसके खिलाफ 8 अप्रैल को डीसी कार्यालयों पर प्रदर्शन किए जाएंगे।
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इस दौरान पंजाब के मानसा से आए भारतीय किसान यूनियन के प्रधान रलदू सिंह ने राजस्थान के अलवर में भाकियू नेता राकेश टिकैत पर हुए हमला करने की निंदा की। इस हमले के लिए उन्होंने भाजपा व आरएसएस को जिम्मेदार ठहराया।
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उन्होंने कहा कि आंदोलनों में सरकारी और निजी संपत्ति के नुकसान की भरपाई आंदोलकारियों से करने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा बनाए गए कानून को बिल्कुल नहीं माना जाएगा। जब हम तीन कृषि कानूनों को मानने के लिए तैयार नहीं हैं तो अब हरियाणा सरकार के इस कानून को भी क्यों मानेंगे।
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रलदू सिंह ने कहा कि आरएसएस से हमला कराने वाली सरकार को यह भी समझ लेना चाहिए कि किसान भी कम नहीं हैं। जींद जिले के खटकड़ टोल से साइकिल द्वारा टीकरी बॉर्डर पहुंचे दरिया वाला के जयप्रकाश चहल, बीबीपुर के पाला राम और गोहाना के सूरज बल्हारा ने भी टीकरी बॉर्डर पर किसानों की सभा में विचार व्यक्त किए।
पांच अप्रैल को एफसीआई के गोदामों का करेंगे घेराव
भाकियू (घासीराम) के प्रधान जोगिंदर नैन ने किसानों से संयुक्त किसान मोर्चा की योजना के मुताबिक आंदोलन के हर कार्यक्रम में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पांच अप्रैल को एफसीआई के गोदामों का 11 बजे से 6 बजे तक घेराव करेंगे। उन्होंने कहा कि 10 अप्रैल को 24 घंटे के लिए केएमपी जाम किया जाएगा और केएमपी पर ही स्टेज चलाया जाएगा।
13 अप्रैल को वैशाखी के दिन जलियांवाला बाग शहीदी दिवस मनाया जाएगा, 14 अप्रैल को भीमराव आंबेडकर जयंती मनाई जाएगी और संविधान बचाओ देश बचाओ दिवस मनाएंगे। 20 अप्रैल को धन्नामल जन्मदिवस मनाया जाएगा और एक मई को मजदूर दिवस मनाया जाएगा। सभी किसानों का मई के पहले या दूसरे सप्ताह में पैदल दिल्ली कूच का कार्यक्रम है। हमारी लगभग आधी फसल की कटाई हो चुकी है।

अब काम निपटते ही फिर से आंदोलन में सक्रिय होना है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने आंदोलनकारियों की संपत्ति कुर्क करने का जो कानून बनाया है, इसके विरोध में 8 मई को डीसी कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही ज्ञापन देने और 20 या 22 मई को चंडीगढ़ में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
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