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डिप्टी सीएम दुष्यंत के विरोध के लिए सड़क पर डटे रहे किसान
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उप मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाने के लिए आए किसानों व पुलिस की बीच होती धक्कामुक्की।
- फोटो : Jhjhar
तीनों कृषि कानूनों को रद्द करवाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों ने झज्जर पहुंचे उप मुख्यमंत्री का विरोध किया। पुलिस व किसान करीब साढ़े पांच घंटे तक आमने-सामने रहे। किसानों पर पुलिस की तरफ सेेे पानी की बौछारें की गई लेकिन किसान बैरिकेड हटाकर आगे बढ़ गए।
राजकीय नेहरू महाविद्यालय से पहले छोटे बाईपास, नेशनल हाईवे के पुल के पास बैरिकेड लगा रास्ते को पूरी तरह से सील किया गया था। दमकल केंद्र की गाड़ियां, वज्र वाहन, सीआरपीएफ, आरएफ और बड़ी संख्या में पुलिस कर्मी तैनात किए गए थे। जिले के सभी डीएसपी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, सभी पुलिस थाना प्रभारी, स्वयं एसपी राजेश दुग्गल, डीसी श्याम लाल पूनिया यहां पर डटे रहे। जब उपमुख्यमंत्री का आगमन होना था उससे कुछ देर पहले एसपी व डीसी किसानों के बीच पहुंचे और 15 किसानों को गेट के पास बुलाया गया। उपमुख्यमंत्री का काफिला कॉलेज पहुंचा तो इन किसानों ने उन्हें काले झंडे दिखा नारेबाजी की।
इसी बीच करीब दस मिनट बाद कॉलेज से एक गाड़ियों का काफिला निकाला गया ताकि किसान सोचे की उपमुख्यमंत्री चले गए हैं। किसानों ने इस काफिले को भी काले झंडे दिखाए लेकिन उसके बाद भी वे वहां से नहीं गए। उपमुख्यमंत्री का कार्यक्रम संपन्न होने के बाद ही किसान वापस लौटे।
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किसानों पर गदें पानी की बौछारें डालकर सरकार व प्रशासन किसानों के इरादों को हिला नहीं सकते। जब तक तीनों कृषि कानून सरकार की ओर से खत्म नहीं कर दिए जाते तब तक बीजेपी-जेजेपी के नेताओं का विरोध जारी रहेगा।
-विरेंद्र डागर, अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन, दिल्ली प्रदेश।
किसानों पर की गई बर्बरता सरकार को आने वाले समय में बहुत महंगी पड़ेगी। किसान शांतिपूर्वक डिप्टी सीएम का विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और पुलिस प्रशासन की ओर से किसानों को मारा गया है जोकि गलत है।
- दलजीत सिंह, किसान नेता।
किसानों पर वाटर कैनन व बल का प्रयोग सरकार व प्रशासन चाहे कितना भी कर ले लेकिन किसान उस समय तक विरोध करते रहेंगे जब तक तीनों कृषि कानूनों को केंद्र सरकार रद्द नहीं कर देती।
- ममता कादयान, भारतीय किसान यूनियन, जिला अध्यक्ष, झज्जर।
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राजकीय नेहरू महाविद्यालय से पहले छोटे बाईपास, नेशनल हाईवे के पुल के पास बैरिकेड लगा रास्ते को पूरी तरह से सील किया गया था। दमकल केंद्र की गाड़ियां, वज्र वाहन, सीआरपीएफ, आरएफ और बड़ी संख्या में पुलिस कर्मी तैनात किए गए थे। जिले के सभी डीएसपी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, सभी पुलिस थाना प्रभारी, स्वयं एसपी राजेश दुग्गल, डीसी श्याम लाल पूनिया यहां पर डटे रहे। जब उपमुख्यमंत्री का आगमन होना था उससे कुछ देर पहले एसपी व डीसी किसानों के बीच पहुंचे और 15 किसानों को गेट के पास बुलाया गया। उपमुख्यमंत्री का काफिला कॉलेज पहुंचा तो इन किसानों ने उन्हें काले झंडे दिखा नारेबाजी की।
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इसी बीच करीब दस मिनट बाद कॉलेज से एक गाड़ियों का काफिला निकाला गया ताकि किसान सोचे की उपमुख्यमंत्री चले गए हैं। किसानों ने इस काफिले को भी काले झंडे दिखाए लेकिन उसके बाद भी वे वहां से नहीं गए। उपमुख्यमंत्री का कार्यक्रम संपन्न होने के बाद ही किसान वापस लौटे।
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किसानों पर गदें पानी की बौछारें डालकर सरकार व प्रशासन किसानों के इरादों को हिला नहीं सकते। जब तक तीनों कृषि कानून सरकार की ओर से खत्म नहीं कर दिए जाते तब तक बीजेपी-जेजेपी के नेताओं का विरोध जारी रहेगा।
-विरेंद्र डागर, अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन, दिल्ली प्रदेश।
किसानों पर की गई बर्बरता सरकार को आने वाले समय में बहुत महंगी पड़ेगी। किसान शांतिपूर्वक डिप्टी सीएम का विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और पुलिस प्रशासन की ओर से किसानों को मारा गया है जोकि गलत है।
- दलजीत सिंह, किसान नेता।
किसानों पर वाटर कैनन व बल का प्रयोग सरकार व प्रशासन चाहे कितना भी कर ले लेकिन किसान उस समय तक विरोध करते रहेंगे जब तक तीनों कृषि कानूनों को केंद्र सरकार रद्द नहीं कर देती।
- ममता कादयान, भारतीय किसान यूनियन, जिला अध्यक्ष, झज्जर।

किसानों पर की जा रही वाटर कैनन से पानी की बौछार। संवाद- फोटो : Jhjhar