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किसान नेता बोले - खेती से नहीं फैलता प्रदूषण
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सोमवार को टीकरी बार्डर सभा में मौजूद किसान।
- फोटो : Bahadurgarh
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तीन नए केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत किसानों की टीकरी बार्डर पर सभा हुई। इस मौके पर कई वक्ताओं ने राजधानी दिल्ली में प्रदूषण के लिए करोड़ों की भीड़, वाहनों व फैक्ट्रियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि प्रदूषण फैलाने के लिए किसान जिम्मेदार नहीं है।
भारतीय किसान यूनियन पंजाब के काका सिंह ने कहा कि सेंट्रल गवर्नमेंट प्रदूषण का कारण किसानों द्वारा पराली जलाने को बता रही है जबकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि किसानों की पराली जलने का प्रदूषण 5 प्रतिशत है बाकी 95 प्रतिशत प्रदूषण दिल्ली का खुद का प्रदूषण है। काका सिंह ने कहा कि बीजेपी की सरकार किसानों को बदनाम करना चाहती है जबकि अब किसान प्रणाली बिल्कुल नहीं जलाते। किसानों का आंदोलन शांतिपूर्वक चल रहा है और चलता रहेगा हमने मोदी सरकार को यह दिखाना है कि पूरे देश के किसान एक हैं हम जीत कर ही जाएंगे।
मानसा की किसान नेता जसबीर कौर नट ने कहा कि पहले तो सरकार पराली के प्रदूषण के बहाने करती थी अब तक किसान पराली भी नहीं जलाते। इसके बावजूद स्कूल क्यों बंद कर गिए गए हैं। उन्होंने कहा कि हम कंपनी राज को नहीं चलने देंगे और न ही यह चलने वाला है।
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बीकेयू हरियाणा के जियालाल (जींद) ने कहा कि हमारे आंदोलन में किसानों की संख्या काफी कम हो चुकी है अब बार्डर पर ज्यादा से ज्यादा संख्या बढ़ाने की जरूरत है। कैथल के रमेश ढुल ने किसानों से आंदोलन के एक साल पूरा होने पर 26 नवंबर को अधिक से अधिक संख्या में टीकरी बार्डर पहुंचने का आह्वान किया। लखबीर सिंह ने कहा कि 29 नवंबर से आंदोलन को हमने इतना तेज करना है कि सरकार को मजबूर होकर तीनों कानून रद्द करने पड़ें और हम जीत कर अपने गांव जाएं। बंत सिंह मोर कलां ने कहा कि पूंजीवाद को खत्म करना जरूरी है तभी शोषण से छुटकारा मिलेगा। बलदेव सिंह व साधुराम फाजिल्का ने भी विचार रखे।
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भारतीय किसान यूनियन पंजाब के काका सिंह ने कहा कि सेंट्रल गवर्नमेंट प्रदूषण का कारण किसानों द्वारा पराली जलाने को बता रही है जबकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि किसानों की पराली जलने का प्रदूषण 5 प्रतिशत है बाकी 95 प्रतिशत प्रदूषण दिल्ली का खुद का प्रदूषण है। काका सिंह ने कहा कि बीजेपी की सरकार किसानों को बदनाम करना चाहती है जबकि अब किसान प्रणाली बिल्कुल नहीं जलाते। किसानों का आंदोलन शांतिपूर्वक चल रहा है और चलता रहेगा हमने मोदी सरकार को यह दिखाना है कि पूरे देश के किसान एक हैं हम जीत कर ही जाएंगे।
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मानसा की किसान नेता जसबीर कौर नट ने कहा कि पहले तो सरकार पराली के प्रदूषण के बहाने करती थी अब तक किसान पराली भी नहीं जलाते। इसके बावजूद स्कूल क्यों बंद कर गिए गए हैं। उन्होंने कहा कि हम कंपनी राज को नहीं चलने देंगे और न ही यह चलने वाला है।
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बीकेयू हरियाणा के जियालाल (जींद) ने कहा कि हमारे आंदोलन में किसानों की संख्या काफी कम हो चुकी है अब बार्डर पर ज्यादा से ज्यादा संख्या बढ़ाने की जरूरत है। कैथल के रमेश ढुल ने किसानों से आंदोलन के एक साल पूरा होने पर 26 नवंबर को अधिक से अधिक संख्या में टीकरी बार्डर पहुंचने का आह्वान किया। लखबीर सिंह ने कहा कि 29 नवंबर से आंदोलन को हमने इतना तेज करना है कि सरकार को मजबूर होकर तीनों कानून रद्द करने पड़ें और हम जीत कर अपने गांव जाएं। बंत सिंह मोर कलां ने कहा कि पूंजीवाद को खत्म करना जरूरी है तभी शोषण से छुटकारा मिलेगा। बलदेव सिंह व साधुराम फाजिल्का ने भी विचार रखे।