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किसान नेता बोले- जब तक कानून वापस नहीं होंगे, नहीं जाएंगे घर वापस

Tue, 09 Feb 2021 01:49 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 09 Feb 2021 01:49 AM IST
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Farmer leader said - Till the law is not returned, will not go back home
बहादुरगढ़। किसान दो महीने से अधिक समय से तीन कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। टीकरी बॉर्डर पर समर्थन देने के लिए सोमवार को हरियाणा और पंजाब के कई स्थानों से किसान नेता पहुंचे। किसान नेताओं ने मंच से एक सुर में कहा कि किसानों की यह लड़ाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि जब तक कानून वापस नहीं होते, तब तक किसान भी घर वापसी नहीं करेंगे। चाहे इसके लिए उन्हें कितना ही समय क्यों न लग जाए। इस दौरान युवा किसानों ने मांगों को लेकर अर्धनग्न होकर टीकरी बॉर्डर पर प्रदर्शन भी किया। उन्होंने कृषि कानूनोें को वापस लेने की मांग को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
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टीकरी बॉर्डर पर हरियाणा के किसान नेता सुदेश कोयत हिसार, सुशीला बहु अकबरपुर रोहतक, बलवंत सिंह बोहर रोहतक, बाबा गुरबचन सिंह रतिया, न्यूनतम मूल्य संघर्ष समिति हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप धनखड़, भारतीय किसान संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष विकास सीसर व पंजाब के किसान नेता परगट सिंह ने कहा कि कोई हिंसा न करे। यह आंदोलन 28 जनवरी के बाद दोबारा शुरू हुआ है। उन्हें अब आने वाले दिनों में कोई नई रणनीति बनानी है। वे पिछले दो माह से अधिक समय से शांतिपूर्वक आंदोलन चला रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी एक बात भी मानने को राजी नहीं हो रही है। न्यूनतम मूल्य संघर्ष समिति हरियाणा अध्यक्ष प्रदीप धनखड़ ने टीकरी बॉर्डर पर किसानों को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि किसानों ने 1906 में एक पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन किया था। आज भी किसानों ने उसी तरह का एक किसान आंदोलन किया हुआ है।
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भारतीय किसान यूनियन के नेता विकास सीसर ने कहा कि जो किसान संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर 6 फरवरी का चक्का जाम पूरी तरह सफल रहा। उन्होंने किसानों से आह्वान किया है कि इस आंदोलन में उन्हें पूरी तरह शांति बनाए रखनी है। किसान महिलाएं सुबह 4 बजे उठती हैं 11 बजे तक अपना काम समाप्त कर लेती हैं। सरकार कह रही है कि किसान 147 दिन काम करता है, जो सरासर गलत है। किसान तो रोजाना 18 घंटे काम करता है। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि आंदोलन को चलाए रखना है। राजनीति पार्टी सफेद कपड़ों वाले नेताओं के बहकावे में न आएं, उनको कोई सम्मान नहीं देना है अगर सम्मान देना है तो इन किसानों को ही सम्मान दें।
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