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Jhajjar-Bahadurgarh News: आज बाबा प्रसाद गिरि मंदिर में चढ़ाए जाएंगे पंखे, सुबह 5 बजे से खुलेंगे दर्शन
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03jjrp16- बाबा प्रसाद गिरि मंदिर में तैयारियां करते श्रद्धालु। स्रोत-मंदिर समिति
झज्जर। बाबा प्रसाद गिरि मंदिर में दुल्हेंडी पर्व पर बुधवार सुबह 5 बजे से ही दर्शन शुरू हो जाएंगे। मन्नत पूरी होने पर दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पंखें चढ़ाने आते हैं। पिछले 300 साल से बाबा प्रसाद गिरि की जीवित समाधि पर पंखें चढ़ाने की परंपरा जारी है।
दुल्हेंडी पर पंखें चढ़ाने से कार्यक्रम शुरू होगा। इसके बाद सात मार्च तक संत सम्मेलन चलेगा। संत सम्मेलन के लिए दूसरे राज्यों से संत भी आए हुए हैं। अंतिम दिन भंडारे का आयोजन किया जाता है। पहले यहां हाथ से हवा करने वाले पंखें चढ़ाए जाते थे।
समय बदलने के साथ ही इलेक्ट्रिक पंखों के अलावा कूलर, एसी तक चढ़ाए जाने लगे हैं। बताया जाता है कि करीब 300 वर्ष पहले सोमवार के दिन दुल्हेंडी पर बाबा प्रसाद गिरि महाराज ने यहां पर जीवित समाधि ली थी। वहीं इसके बाद सोमवार के दिन यहां पर श्रद्धालु अपनी मनोकामना मांगने के लिए आते हैं।
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श्री श्री 1008 सिद्ध बाबा प्रसाद गिरि मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। करीब 350 वर्ष पहले यहां के मंदिर के महंत बाबा प्रसाद गिरि महाराज के नाम पर इस मंदिर का नाम रखा गया है।
दान किया जाता है सामान
मृत्यृंजय गिरि महाराज ने बताया कि मंदिर में दुल्हेंड़ी के दिन काफी समय में पंखें व अन्य सामान श्रद्धालु चढ़ाने आते हैं। कार्यक्रम के समापन के बाद इन पंखों व अन्य सामान को जरूरत अनुसार सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं के अलावा स्कूल या किसी जरूरतमंद कन्याओं की शादी में दान कर दिया जाता है।
53 वर्षों से हो रहा संत सम्मेलन
इस दौरान संत सम्मेलन व भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। पिछले 53 वर्षों से यहां पर संत सम्मेलन व भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। बाबा प्रसाद गिरि मंदिर के महंत परमानंद गिरि महाराज के गुरु ब्रह्मलीन श्री महंत धर्मराज गिरि महाराज निष्काम ने इस परंपरा को शुरू किया था। इस अवसर पर दूर-दूर से संत यहां पर आते हैं और श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वाद देते हैं।
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दुल्हेंडी पर पंखें चढ़ाने से कार्यक्रम शुरू होगा। इसके बाद सात मार्च तक संत सम्मेलन चलेगा। संत सम्मेलन के लिए दूसरे राज्यों से संत भी आए हुए हैं। अंतिम दिन भंडारे का आयोजन किया जाता है। पहले यहां हाथ से हवा करने वाले पंखें चढ़ाए जाते थे।
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समय बदलने के साथ ही इलेक्ट्रिक पंखों के अलावा कूलर, एसी तक चढ़ाए जाने लगे हैं। बताया जाता है कि करीब 300 वर्ष पहले सोमवार के दिन दुल्हेंडी पर बाबा प्रसाद गिरि महाराज ने यहां पर जीवित समाधि ली थी। वहीं इसके बाद सोमवार के दिन यहां पर श्रद्धालु अपनी मनोकामना मांगने के लिए आते हैं।
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श्री श्री 1008 सिद्ध बाबा प्रसाद गिरि मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। करीब 350 वर्ष पहले यहां के मंदिर के महंत बाबा प्रसाद गिरि महाराज के नाम पर इस मंदिर का नाम रखा गया है।
दान किया जाता है सामान
मृत्यृंजय गिरि महाराज ने बताया कि मंदिर में दुल्हेंड़ी के दिन काफी समय में पंखें व अन्य सामान श्रद्धालु चढ़ाने आते हैं। कार्यक्रम के समापन के बाद इन पंखों व अन्य सामान को जरूरत अनुसार सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं के अलावा स्कूल या किसी जरूरतमंद कन्याओं की शादी में दान कर दिया जाता है।
53 वर्षों से हो रहा संत सम्मेलन
इस दौरान संत सम्मेलन व भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। पिछले 53 वर्षों से यहां पर संत सम्मेलन व भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। बाबा प्रसाद गिरि मंदिर के महंत परमानंद गिरि महाराज के गुरु ब्रह्मलीन श्री महंत धर्मराज गिरि महाराज निष्काम ने इस परंपरा को शुरू किया था। इस अवसर पर दूर-दूर से संत यहां पर आते हैं और श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वाद देते हैं।

03jjrp16- बाबा प्रसाद गिरि मंदिर में तैयारियां करते श्रद्धालु। स्रोत-मंदिर समिति