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Jhajjar-Bahadurgarh News: महंगे एल्युमिनियम-पीतल ने बढ़ाई रसोई के बर्तनों की लागत

Wed, 01 Jul 2026 07:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Wed, 01 Jul 2026 07:24 PM IST
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Expensive aluminum and brass have driven up the cost of kitchenware.
-फोटो 54 : रेलवे रोड पर स्थित बर्तन की दुकान व मौजूद ग्राहक। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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बहादुरगढ़। एल्युमिनियम, पीतल और तांबे जैसी धातुओं के दाम में एक बार फिर बढ़ोतरी होने से बर्तनों की कीमतों में करीब पांच फीसदी तक उछाल आ गया है। लगातार बढ़ती लागत का सीधा असर बाजार पर दिखाई देने लगा है। एक ओर कच्चा माल महंगा होने से कारोबारियों की लागत बढ़ गई है। वहीं दूसरी ओर महंगाई के कारण ग्राहक भी खरीदारी सीमित कर रहे हैं। ऐसे में बर्तन कारोबारियों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है।

रेलवे रोड पर बर्तन कारोबारी सुधीर जैन का कहना है कि सप्ताह में धातुओं के भाव लगातार बढ़े हैं। इसके चलते स्टील के साथ-साथ एल्युमिनियम, पीतल और तांबे से बने घरेलू बर्तनों के दाम भी बढ़ाने पड़े हैं। कारोबारियों के अनुसार नई खेप पहले की तुलना में अधिक कीमत पर मिल रही है, जिसका असर खुदरा बाजार में भी साफ दिखाई दे रहा है।
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उनका कहना है कि आयात लागत में बढ़ोतरी और सप्लाई चेन प्रभावित होने से धातुओं के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं। इसका असर स्थानीय बाजार पर भी पड़ रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में कीमतों में और इजाफा हो सकता है। मेन बाजार के दुकानदार सुभाष कुमार ने बताया कि बाजार में पहले जहां शादी-विवाह और घरेलू जरूरतों के लिए लोग खुलकर खरीदारी करते थे, वहीं अब ग्राहक जरूरत भर का ही सामान खरीद रहे हैं। कई ग्राहक कीमत सुनकर खरीदारी टाल रहे हैं या सस्ते विकल्प तलाश रहे हैं।
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इससे कारोबार की रफ्तार भी धीमी हुई है। कारोबारियों का कहना है कि बढ़ती लागत के बावजूद मुनाफा नहीं बढ़ा है। ग्राहकों को बनाए रखने के लिए कई बार सीमित लाभ पर भी सामान बेचना पड़ रहा है। उनका कहना है कि बाजार में मांग पहले जैसी नहीं रही, जबकि खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। इससे छोटे कारोबारियों पर सबसे अधिक दबाव है। कारोबारियों को उम्मीद है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में धातुओं के दाम स्थिर होते हैं और सप्लाई सामान्य होती है तो स्थानीय बाजार को भी राहत मिलेगी। फिलहाल महंगे कच्चे माल और कमजोर मांग के कारण बर्तन बाजार दबाव के दौर से गुजर रहा है।
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