फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jhajjar/Bahadurgarh News ›   exclusive

टीकरी बार्डर पर अब पंजाब चुनाव बना चर्चा का मुद्दा

Tue, 07 Dec 2021 12:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 07 Dec 2021 12:27 AM IST
विज्ञापन
exclusive
शील भारद्वाज
विज्ञापन

बहादुरगढ़। आंदोलनकारी किसान तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के रद्द होने को बड़ी जीत मान रहे हैं और किसानों में किसान आंदोलन की चर्चा पीछे छूटती जा रही है। टीकरी बार्डर पर किसानों में चर्चा की प्रमुख मुद्दा अब पंजाब विधानसभा का चुनाव हो गया है। पंजाब के किसान न केवल राजनीतिक दलों द्वारा मतदाताओं को लुभाने के लिए किए जा रहे चुनावी वादों की जानकारी रखते हैं। बल्कि, पंजाब के वर्तमान सियासी हालात का विश्लेषण भी कर रहे हैं। जागरूक किसान यह दावा भी करते हैं कि पंजाब में सत्ता की कुंजी अब किसानों के पास है। प्रदेश का सियासी भविष्य किसान ही तय करेंगे।
टीकरी बार्डर पड़ाव में जगह-जगह किसानों की टोलियां 15 दिन पहले तक आंदोलन को लेकर ही चर्चा करती थीं। लेकिन अब किसान यह तय मानकर चल रहे हैं कि एसकेएम कभी भी आंदोलन को खत्म करने की घोषणा कर सकता है और वे पंजाब लौट जाएंगे। ऐसे में वे पंजाब चुनाव की चर्चा में मशगूल रहते हैं। सोमवार को पंडित श्रीराम शर्मा मेट्रो स्टेशन के पास अपने टेंट में गपशप कर रहे किसानों में से एक श्री मुक्तसर साहब जिले के निवासी बूटा सिंह ने कहा कि सियासत किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अगर हम सही को चुनें तो आंदोलन की जरूरत भी नहीं पड़े। इसलिए इस बार सही को चुनना है। फाजिल्का के निवासी 22 एकड़ के किसान गुरतेज सिंह ने कहा कि वह चुनाव में सक्रिय रहेंगे लेकिन निर्देश एसकेएम के मानेंगे। संगरूर के जसविंदर सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार के पास उनकी लंबित मांगों को स्वीकार करने के अलावा अब कोई अन्य विकल्प नहीं है, इसलिए आंदोलन के जल्द खत्म होने की प्रबल संभावना है। ऐसे में अब चर्चा का विषय भी बदल गया है। पहले आंदोलन के बारे में चर्चा होती थी मगर किसान अब पंजाब में उभरते राजनीतिक समीकरणों के बारे में बात कर रहे हैं। वहां के विधानसभा चुनावों के संबंध में किसान यूनियनों के अगले कदम पर भी नजर गड़ाए हुए हैं।
विज्ञापन

मोगा के जगशेर ने कहा कि केंद्र सरकार से एक साल की लड़ाई जीतने के बाद, अब किसान पंजाब चुनाव में भी अपनी ताकत दिखाने के लिए निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। लिहाजा वे न केवल राजनीतिक परिदृश्य के बारे में अपने साथियों के साथ विचार-विमर्श करते हैं बल्कि पंजाब में रह रहे परिवार के सदस्यों और दोस्तों से बात करके ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट भी प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में हो रही राजनीतिक गतिविधियों के बारे में अपडेट प्राप्त करने में सोशल मीडिया भी काफी हद तक मददगार साबित हो रहा है। प्रताप सिंह ने कहा कि किसान विरोधी दलों को तो वे जरूर मजा चखाएंगे। मानसा के बलविंदर ने कहा कि वे चुनाव में किसान विरोधी नेताओं को सबक सिखाएंगे। बठिंडा के गुरजंट सिंह ने सवाल किया कि अगली लड़ाई उनके गृह राज्य में कॉरपोरेट घरानों का समर्थन करने वालों के खिलाफ लड़ी जानी है तो वे पंजाब चुनाव पर चर्चा किए बिना कैसे रह सकते हैं। उन्होंने कहा, कई किसान चाहते हैं कि किसान समर्थक सरकार चुनने के लिए पंजाब के लोगों को उपयुक्त विकल्प देने के लिए किसान नेता चुनावी दंगल में कूदें, लेकिन इस संबंध में अंतिम फैसला एसकेएम को करना है। एक वरिष्ठ किसान नेता ने कहा कि हम पर चुनाव लड़ने का बहुत दबाव है लेकिन हमारी प्राथमिकता लंबित मांगों को पूरा करवाने की है। तभी हम अपनी असली जीत मानेंगे। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed