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Jhajjar-Bahadurgarh News: 6 साल से सैनिक भवन के इंतजार में पूर्व सैनिक, जगह न मिलने से निर्माण अटका

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 03 Feb 2026 02:27 AM IST
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Ex-servicemen have been waiting for the Sainik Bhawan for 6 years; construction is stalled due to lack of available land.
02jjrp32- सुरेंद्र सिंह
झज्जर। मेडिकल रोड स्थित जिला सैनिक भवन की इमारत कई सालों से जर्जर है। पीडब्लूडी ने भी इसे जर्जर घोषित कर रखा है। मौजूदा समय में झज्जर को नए सैनिक भवन के निर्माण के लिए इंतजार है लेकिन जमीन नहीं मिलने से इसके निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी।
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सरकार ने वर्ष 2019-20 में झज्जर सहित अन्य 4 जिलों में सैनिक सदन तैयार किए जाने के लिए 75 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया था। नागरिक अस्पताल के साथ ही सैनिक रेस्ट हाउस का निर्माण कार्य वर्ष 1975 में हुआ था। बाद में इसी परिसर के अंदर जिला सैनिक कल्याण बोर्ड का कार्यालय चलता रहा।
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यह भवन जर्जर हो गया जिसके चलते इसे कंडम घोषित किया हुआ है। जगह की कमी के चलते यहां पर नया भवन निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है। यहां वॉर मेमोरियल के अलावा वॉर म्यूजियम बनाए जाने से जगह बहुत कम बची है लेकिन सैनिक सदन के लिए लगभग 2 से 3 एकड़ जमीन चाहिए।
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विभाग की तरफ से इस मामले में उपयुक्त जगह उपलब्ध कराने की मांग कई बार की हुई है और नए बस अड्डे के पास जमीन भी है लेकिन अब तक जमीन को लेकर मामला सिरे नहीं चढ़ सका है।
सैनिक सदन बनने से ये मिलेंगी सुविधाएं
जिले में यदि नया सैनिक सदन बनता है तब यहां सैनिकों व अर्द्ध सैनिक बलों के परिवारों की अलग-अलग कैंटीन के अलावा सैनिक रेस्ट हाउस, वेलफेयर ऑफिस के अलावा इलाज की सुविधा एक छत के नीचे मिल सकेगी। जिले में लगभग 34 हजार से अधिक पूर्व सैनिक और 12 हजार से अधिक वीरांगनाएं हैं। इसके अलाव वर्तमान में भी काफी संख्या में सैनिक काम कर रहे हैं।


तीन अलग-अलग जगहों पर घूमना पड़ रहा
पूर्व सैनिकों व उनके परिवारों को तीन अलग-अलग जगहों पर घूमना पड़ता है। सैनिक बोर्ड से संबंधित काम के लिए उनको मेडिकल रोड स्थित सैनिक बोर्ड में आना पड़ता है। इसके बाद इलाज के लिए पूर्व सैनिकों को पुरानी तहसील रोड स्थित अस्पताल में जाना पड़ता है। इसी प्रकार से सामान के लिए कैंटीन ग्वालीसन रोड पर है। ऐसे में बुजुर्ग पूर्व सैनिकों को घूमना पड़ता है। मौजूदा समय में भवन क्षतिग्रस्त होने से अब यहां जिला सैनिक रेस्ट हाउस के रूप में कोई सुविधा नहीं है।
बॉक्स

एक छत के नीचे कार्यालय, कैंटीन, रेस्ट हाउस और इलाज की सुविधा पूर्व सैनिकों को मिलनी चाहिए। फिलहाल अलग-अलग जगह होने से किराया भी लगता है और समय भी खराब होता है। वह लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं मिलें लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो पाया है।

सेवानिवृत्त रिसालदार, मेजर सुरेंद्र सिंह

आज पूर्व सैनिकों को अपने काम के लिए तीन अलग-अलग जगह घूमना पड़ता है। इलाज के लिए पुरानी तहसील, बोर्ड कार्यालय मेडिकल रोड और कैंटीन के लिए रेलवे स्टेशन रोड जाना पड़ता है। जेब से इतना पैसा किराये में ही लग जाता है। इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है।
सेवानिवृत्त नायक, बिजेंद्र सिंह

वर्जन
इस बारे में वह कार्यालय में देखकर जानकारी दे पाएंगे कि इस मामले में क्या प्रगति चल रही है।
कर्नल राजेंद्र कुंडू, वेलफेयर ऑफिसर, सैनिक एवं अर्ध सैनिक वेलफेयर विभाग, झज्जर।

02jjrp32- सुरेंद्र सिंह

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