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दुबलधन में पुलिस टीम पर फायरिंग

Sun, 09 Nov 2014 12:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर बहादुरगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर बहादुरगढ़ Updated Sun, 09 Nov 2014 12:14 AM IST
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Dubldn firing at the police team

एसआईटी और बेरी थाना पुलिस ने शुक्रवार की रात संयुक्त अभियान में गांव दुबलधन से मोस्टवांटेड संजय खेड़ी बूरा और उसके एक साथी को गिरफ्तार कर लिया।

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गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों बदमाशों की ओर से पुलिस पर फायरिंग भी की गई, लेकिन बचकर निकलने में नाकामयाब रहे।

पुलिस ने उनके पास से दो अवैध देसी पिस्तौल और 32 कारतूस बरामद किए हैं। पूछताछ में पता चला है कि दोनोें भिवानी में एक व्यक्ति की हत्या करने की साजिश रच रहे थे।
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दोनों के खिलाफ हत्या और लूट समेत कई मामले दर्ज हैं। आरोपियों को शनिवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
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हरियाणा और दिल्ली में काफी समय से आपराधिक वारदातों में सक्रिय संजय का नाम मोस्टवांटेड की लिस्ट में शामिल है।

भिवानी पुलिस ने संजय पर एक लाख रुपये और महेंद्रगढ़ पुलिस ने 50 हजार रुपये इनाम घोषित कर रखा है। शुक्रवार की देर रात बेरी थाना पुलिस अपने क्षेत्र में गश्त कर रही थी।

इस दौरान पुलिस को सूचना मिली कि भिवानी जिले के बूरा खेड़ी गांव निवासी इनामी बदमाश संजय दुबलधन गांव में है। पुलिस ने इस बारे में तुरंत एसपी बलबीर सिंह को सूचना दी।

एसपी ने एसआईटी के इंचार्ज योगेश हुड्डा के नेतृत्व में संजय की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। आदेश मिलते ही योगेश हुड्डा अपनी टीम के साथ दुबलधन गांव पहुंचे और स्टेडियम के पास घेराबंदी कर ली।

संजय वहां पर अपने साथी राजस्थान के झूंझनू जिले के चारणवासी गांव निवासी योगेश उर्फ मुकेश पुत्र भागूराम के साथ मौजूद मिला।

पुलिस को वहां पहुंचा देख संजय और योगेश ने भागने का प्रयास किया। पुलिस ने उन्हें दबोचना चाहा, तो संजय ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी।

पांच मिनट के भीतर ही संजय ने पांच फायर किए। इसके बावजूद वह बचकर नहीं निकल सका। भारी पुलिस बल की मौजूदगी देखकर संजय और योगेश ने समर्पण कर दिया, जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

एसपी बलबीर सिंह ने बताया कि मोस्टवांटेड संजय ने बचने के लिए कुल पांच फायर किए। इसमें से तीन फायर हवा में किए गए, जबकि दो फायर पुलिस टीम पर किए।

इस दौरान दूसरी टीम ने भी दूसरी तरफ से घेरा डाल दिया, जिससे संजय और योगेश को बच निकलने का रास्ता नहीं मिला। अपने को घिरा देखकर दोनों ने हथियार फेंक दिए।

दोनों के पास से दो देसी पिस्तौल 32 बोर, आठ कारतूस 32 बोर, दस जिंदा कारतूस नौ एमएम और पांच कारतूस 315 बोर बरामद हुए हैं। दोनों के खिलाफ पुलिस टीम पर हमला करने समेत अन्य धाराओं के तहत भी मामला दर्ज कर लिया गया।

संजय और योगेश को पकड़ने में इंस्पेक्टर योगेश हुड्डा, इंस्पेक्टर जसबीर, इंस्पेक्टर धर्मेंद्र, एएसआई निरंजन, एएसआई चांद, एएसआई महेंद्र, एएसआई विवेक, हेडकांस्टेबल विनोद, देवेंद्र, राजेंद्र और सिपाही निरंजन की अहम भूमिका रही।

20 से ज्यादा मामले हैं दर्ज
एसपी ने बताया कि मोस्टवांटेड संजय पर संगीन अपराधों के 20 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। इनमें से 16 मामले तो भिवानी पुलिस में दर्ज हैं।

इसके अलावा रोहतक, महेंद्रगढ़ और प्रदेश के अन्य जिलों में भी संजय पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या प्रयास, लूट, डकैती, फिरौती जैसे संगीन अपराध शामिल हैं।

सभी मामलों में संजय वांछित चल रहा था। भिवानी पुलिस ने संजय पर एक लाख रुपये तथा महेंद्रगढ़ पुलिस ने 50 हजार रुपये इनाम घोषित किया हुआ था।

वहीं योगेश के खिलाफ झूंझनू में ही हत्या प्रयास, अपहरण और अवैध हथियार रखने के दो मामले दर्ज हैं। इसके अलावा गुड़गांव में भी एक मामला दर्ज है।

हत्या की रच रहा था साजिश
संजय भिवानी जिले के एक व्यक्ति की हत्या की साजिश रच रहा था। उसको संजय ने जान से मारने की धमकी भी दी हुई थी। इसके लिए वह हथियार जमा कर रहा था।

इसी के चलते उसने दो पिस्तौल और 30 बुलेट का इंतजाम किया था। मौका मिलते ही संजय को उसकी हत्या करनी थी। इससे पहले कि वह अपने इरादे में कामयाब होता, पुलिस के हत्थे चढ़ गया।  

हत्यारोपी को भगाने में भी की थी मदद

दुलीना जेल में बंद हत्यारोपी स्नेह की भी सिविल अस्पताल से भागने में संजय ने ही मदद की थी। स्नेह भिवानी जिले के बलकरा गांव का रहने वाला है और जून महीने में बीमारी के बहाने वह सिविल अस्पताल में भर्ती हुआ था।


स्नेह ने संजय से संपर्क किया और उसकी मदद से वह सिविल अस्पताल से पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था।

संजय का भाई भी है बदमाश
एसपी ने बताया कि संजय का भाई अजय खेड़ी बूरा भी शातिर अपराधी है। अजय फिलहाल जेल में बंद है। उस पर भी हत्या, हत्या प्रयास, अपहरण व संगीन अपराधों के कई मामले दर्ज हैं।

उसी के नाम का फायदा उठाकर संजय भी अपराध करने लगा था। अजय की अपराध जगत में धाक होने के कारण संजय को अपने पैर जमाने में ज्यादा दिक्कत नहीं आई और जल्द ही वह नामी-गिरामी बदमाशों की सूची में शामिल हो गया।

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