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Jhajjar-Bahadurgarh News: भत्ते, भर्ती और पदोन्नति को लेकर गर्माए चिकित्सक
Tue, 02 Jul 2024 06:48 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Tue, 02 Jul 2024 06:48 AM IST
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01jjrp03 झज्जर में स्थित सामान्य अस्पताल परिसर के बाहर अपनी मागों को लेकर रोष प्रदर्शन करते
झज्जर। हरियाणा सिविल मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर सोमवार को सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों ने मांगों को लेकर काले बिल्ले लगाकर विरोध जताया।
एसोसिएशन के जिला महासचिव डॉ. संदीप दलाल ने बताया कि सरकार और एसोसिएशन के बीच आपसी समझौते के बाद डॉक्टरों ने छह महीने पहले आंदोलन स्थगित कर दिया था। छह महीने बाद भी सरकार द्वारा किए गए वादे के अनुसार किसी भी मुद्दे का समाधान नहीं किया गया है। चार महत्वपूर्ण मुद्दों में से दो मुद्दे स्पेशलिस्ट कैडर और पीजी कोर्स बॉन्ड में कमी को लेकर सरकार कछुआ गति से आगे बढ़ रही हैं।
दो अन्य मुद्दों एसएमओ की सीधी भर्ती को रोकने के लिए सेवा नियमों में संशोधन और केंद्र सरकार के डॉक्टरों के बराबर एसीपी, भत्ते का प्रावधान के बारे में प्रस्ताव भी महानिदेशक कार्यालय द्वारा शुरू नहीं किया गया है। एमओ के 3900 पदों में से करीब 1100 पद, एसएमओ के 636 पदों में से 250 पद तथा निदेशक के 8 पदों में से 5 पद रिक्त हैं। राज्य के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञों की भारी कमी है, लेकिन विशेषज्ञ कैडर का प्रस्ताव सीएम की मंजूरी के बाद भी पिछले चार महीनों से वित्त विभाग में अटका हुआ है। पीजी बांड की राशि कम करने का प्रस्ताव भी छह महीनों से ऊपर-नीचे हो रहा है।
डॉक्टरों की नियमित पदोन्नति (एमओ से एसएमओ) की फाइल भी पिछले डेढ़ साल से लटकी हुई है और 2002 में एमओ के रूप में शामिल हुए डॉक्टर अभी भी पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। डॉक्टर (क्लास वन अधिकारी) नियमित पदोन्नति, एसीपी, प्रोबेशन क्लीयरेंस आदि जैसी बुनियादी समस्याओं के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं और उनका शोषण किया जा रहा है। इस अवसर पर डॉ. नरेश दहिया, डॉ. जसवंत, डॉ. विकास वर्मा, डॉ. आंचल, डॉ. प्रीति, डॉ. मोहित, डॉ. नवीन मौजूद रहे।
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एसोसिएशन के जिला महासचिव डॉ. संदीप दलाल ने बताया कि सरकार और एसोसिएशन के बीच आपसी समझौते के बाद डॉक्टरों ने छह महीने पहले आंदोलन स्थगित कर दिया था। छह महीने बाद भी सरकार द्वारा किए गए वादे के अनुसार किसी भी मुद्दे का समाधान नहीं किया गया है। चार महत्वपूर्ण मुद्दों में से दो मुद्दे स्पेशलिस्ट कैडर और पीजी कोर्स बॉन्ड में कमी को लेकर सरकार कछुआ गति से आगे बढ़ रही हैं।
दो अन्य मुद्दों एसएमओ की सीधी भर्ती को रोकने के लिए सेवा नियमों में संशोधन और केंद्र सरकार के डॉक्टरों के बराबर एसीपी, भत्ते का प्रावधान के बारे में प्रस्ताव भी महानिदेशक कार्यालय द्वारा शुरू नहीं किया गया है। एमओ के 3900 पदों में से करीब 1100 पद, एसएमओ के 636 पदों में से 250 पद तथा निदेशक के 8 पदों में से 5 पद रिक्त हैं। राज्य के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञों की भारी कमी है, लेकिन विशेषज्ञ कैडर का प्रस्ताव सीएम की मंजूरी के बाद भी पिछले चार महीनों से वित्त विभाग में अटका हुआ है। पीजी बांड की राशि कम करने का प्रस्ताव भी छह महीनों से ऊपर-नीचे हो रहा है।
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डॉक्टरों की नियमित पदोन्नति (एमओ से एसएमओ) की फाइल भी पिछले डेढ़ साल से लटकी हुई है और 2002 में एमओ के रूप में शामिल हुए डॉक्टर अभी भी पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। डॉक्टर (क्लास वन अधिकारी) नियमित पदोन्नति, एसीपी, प्रोबेशन क्लीयरेंस आदि जैसी बुनियादी समस्याओं के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं और उनका शोषण किया जा रहा है। इस अवसर पर डॉ. नरेश दहिया, डॉ. जसवंत, डॉ. विकास वर्मा, डॉ. आंचल, डॉ. प्रीति, डॉ. मोहित, डॉ. नवीन मौजूद रहे।
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