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Jhajjar-Bahadurgarh News: 10 साल में लगे करोड़ों के टेंडरों को लेकर उच्च स्तरीय जांच की मांग
Wed, 29 Jan 2025 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Wed, 29 Jan 2025 01:01 AM IST
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बहादुरगढ़। औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योगों के विकास के नाम पर पिछले 10 सालों में करोड़ोंं के टेंडर हुए, लेकिन धरातल पर विकास कार्य नहीं हुए। इस पर कान्फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्रीज के पदाधिकारियों ने सवाल उठाए हैं। साथ ही इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग को लेकर एंटी करप्शन ब्यूरो को पत्र लिखा है।
कोबी के प्रधान प्रवीण गर्ग ने कहा कि बहादुरगढ़ के उद्योगों में लाखों कर्मचारी काम करते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में हर रोज उद्यमी व श्रमिक परेशान रहते हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार के साथ-साथ एंटी करप्शन ब्यूरो को पत्र लिखा है और इस मामले में जांच की मांग की है। कोबी पदाधिकारियों का आरोप है कि प्रदेश सरकार ने बहादुरगढ़ के वैध औद्योगिक क्षेत्रों में सीवर, पानी व पेयजल के साथ बिजली आदि की व्यवस्था के लिए 10 सालों में करोड़ों रुपये दिए हैं। कार्यों के लिए टेंडर भी लगाए गए, लेकिन यहां काम 10 फीसदी भी नहीं हो पाया। वह करोड़ों रुपये किसकी जेब में गया, इसे लेकर कई तरह की चर्चा है।
पत्र में कहा गया है कि ठेकेदारों से लेकर एचएसआईआईडीसी की ओर से भेजे गए सभी पत्रों व भेजे गए रुपये की क्रमवाइज जांच की जाए तो बड़े स्तर पर इसका खुलासा हो सकता है। उद्यमियों ने कहा कि चाहे सूर्य नगर हो या बालाजी जैसे औद्योगिक क्षेत्र व अन्य क्षेत्र जो अवैध हैं। यहां से करोड़ों का टैक्स सरकार को जा रहा है। इसी तरह से गणपति धाम, रोहद, दहकोरा रोड, बरहाना, सेक्टर-16 ,17, 4बी के साथ बहादुरगढ़ में लगभग 17 औद्योगिक क्षेत्र हैं। जिनके द्वारा अरबों रुपये का उत्पादन करके करोड़ों में शुल्क अर्जित किया जाता है।
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कोबी प्रधान प्रवीण गर्ग ने कहा कि रुपये के हिसाब किताब को लेकर स्थिति साफ नहीं की जा रही। इसमें कुछ लोगों और प्रशासन की मिलीभगत है। इसका खुलासा करने के लिए ही प्रदेश सरकार के पास पत्र भेजा है। गर्ग ने आरोप लगाया कि टीकरी बॉर्डर से बहादुरगढ़ प्रवेश की सफाई नहीं हुई, अनाधिकृत कब्जे तक नहीं हटाए जा सके। मुख्यमंत्री से भी निवेदन किया है पिछले 10 वर्षों में बहादुरगढ़ के उद्योगों के लिए आया हुआ बजट जो टेंडर होकर काम खत्म होकर फाइल बंद हो गई। उनकी उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए। ताकि भविष्य में सरकार की ओर से दिया जाने वाला बजट लोगों की जेबों में न जाए बल्कि धरातल पर विकास कार्य होना चाहिए।
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कोबी के प्रधान प्रवीण गर्ग ने कहा कि बहादुरगढ़ के उद्योगों में लाखों कर्मचारी काम करते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में हर रोज उद्यमी व श्रमिक परेशान रहते हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार के साथ-साथ एंटी करप्शन ब्यूरो को पत्र लिखा है और इस मामले में जांच की मांग की है। कोबी पदाधिकारियों का आरोप है कि प्रदेश सरकार ने बहादुरगढ़ के वैध औद्योगिक क्षेत्रों में सीवर, पानी व पेयजल के साथ बिजली आदि की व्यवस्था के लिए 10 सालों में करोड़ों रुपये दिए हैं। कार्यों के लिए टेंडर भी लगाए गए, लेकिन यहां काम 10 फीसदी भी नहीं हो पाया। वह करोड़ों रुपये किसकी जेब में गया, इसे लेकर कई तरह की चर्चा है।
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पत्र में कहा गया है कि ठेकेदारों से लेकर एचएसआईआईडीसी की ओर से भेजे गए सभी पत्रों व भेजे गए रुपये की क्रमवाइज जांच की जाए तो बड़े स्तर पर इसका खुलासा हो सकता है। उद्यमियों ने कहा कि चाहे सूर्य नगर हो या बालाजी जैसे औद्योगिक क्षेत्र व अन्य क्षेत्र जो अवैध हैं। यहां से करोड़ों का टैक्स सरकार को जा रहा है। इसी तरह से गणपति धाम, रोहद, दहकोरा रोड, बरहाना, सेक्टर-16 ,17, 4बी के साथ बहादुरगढ़ में लगभग 17 औद्योगिक क्षेत्र हैं। जिनके द्वारा अरबों रुपये का उत्पादन करके करोड़ों में शुल्क अर्जित किया जाता है।
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कोबी प्रधान प्रवीण गर्ग ने कहा कि रुपये के हिसाब किताब को लेकर स्थिति साफ नहीं की जा रही। इसमें कुछ लोगों और प्रशासन की मिलीभगत है। इसका खुलासा करने के लिए ही प्रदेश सरकार के पास पत्र भेजा है। गर्ग ने आरोप लगाया कि टीकरी बॉर्डर से बहादुरगढ़ प्रवेश की सफाई नहीं हुई, अनाधिकृत कब्जे तक नहीं हटाए जा सके। मुख्यमंत्री से भी निवेदन किया है पिछले 10 वर्षों में बहादुरगढ़ के उद्योगों के लिए आया हुआ बजट जो टेंडर होकर काम खत्म होकर फाइल बंद हो गई। उनकी उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए। ताकि भविष्य में सरकार की ओर से दिया जाने वाला बजट लोगों की जेबों में न जाए बल्कि धरातल पर विकास कार्य होना चाहिए।