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Jhajjar-Bahadurgarh News: दादा के निधन की खबर से भी हिम्मत नहीं हारी दीपांशी, दौड़ में जीता रजत पदक
Tue, 02 Jul 2024 05:41 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Tue, 02 Jul 2024 05:41 AM IST
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बहादुरगढ़। गांव दहकोरा की रहने वाली दीपांशी रुहिल ने बताया कि पेरिस ओलंपिक में देश के लिए खेलते हुए पदक लाना उनका सपना था। इसके लिए उन्होंने दिन रात मेहनत की थी। पंचकूला में 27 से 30 जून तक चली प्रतियोगिता के दौरान 400 मीटर दौड़ के फाइनल तक पहुंची। फाइनल मैच में ट्रैक पर पहुंचने से पहले ही दादा के निधन की खबर आ गई। दीपाली की आंखें भर लेकिन उसके सामने ओलंपिक में देश के लिए खेलने का सपना खड़ा था। उन्होंने खुद को संभाला और महिलाओं की 400 मीटर दौड़ में हिस्सा लेकर 63वीं राष्ट्रीय अंतराज्जीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक उनके नाम किया।
इस दौड़ में पहला स्थान प्राप्त करने वाली किरण पहल ने 50.92 सेकेंड मे यह दौड़ पूरी की। दीपांशी रुहिल ने 52.01 सेकेंड में दौड़ लगाई। महज एक सेकेंड से पेरिस ओलंपिक का टिकट हासिल करने से चूंकि दीपांशी रुहिल के लिए यह दौड़ आसान नहीं थी। 400 मीटर दौड़ के फाइनल मुकाबले में वह महज 1 सेकेंड के अंतर से पीछे रह गई।
दीपांशी रुहिल ने बताया कि वह अगले ओलंपिक के लिए जमकर मेहनत करेगी, ताकि अपना सपना पूरा कर सकें। उन्होंने बताया कि उनकी माता अनीता भी खिलाड़ी थी। वह एथलेटिक्स में लांग जंप और क्रिकेट खेलती थी। उनका सपना था कि उनकी बेटी देश के लिए पदक जीतकर लाए। इसी के चलते 10 साल पहले हुए परिवार समेत रोहतक में शिफ्ट हो गए। दीपांशी ने बताया कि उनके पापा एक फैक्ट्री में काम करते थे। लोग उनके पापा को बोलते थे कि गांव आओ लड़कियों पर कौन इतना खर्च करता है, लेकिन पापा की सोच अलग थी। उन्होंने हमें बेटों की तरह पाल पोसकर बड़ा किया। पापा बलजीत सिंह का सपना था कि मैं देश के लिए मेडल लेकर आऊं। उनकी बहन नैंसी रुहिल ने भी वर्ष 2019 मे नेपाल मे आयोजित अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता मे 400 मीटर दौड़ मे कांस्य पदक जीता था। दीपांशी ने बताया कि वह रोहतक एमडीयू में कोच डॉ. रमेश सिंधु के साथ पिछले 10 साल से अभ्यास करती है। उन्होंने उसका मनोबल बढ़ाया।
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-फोटो 64 : दीपांशी रुहिल, दहकोरा।
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इस दौड़ में पहला स्थान प्राप्त करने वाली किरण पहल ने 50.92 सेकेंड मे यह दौड़ पूरी की। दीपांशी रुहिल ने 52.01 सेकेंड में दौड़ लगाई। महज एक सेकेंड से पेरिस ओलंपिक का टिकट हासिल करने से चूंकि दीपांशी रुहिल के लिए यह दौड़ आसान नहीं थी। 400 मीटर दौड़ के फाइनल मुकाबले में वह महज 1 सेकेंड के अंतर से पीछे रह गई।
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दीपांशी रुहिल ने बताया कि वह अगले ओलंपिक के लिए जमकर मेहनत करेगी, ताकि अपना सपना पूरा कर सकें। उन्होंने बताया कि उनकी माता अनीता भी खिलाड़ी थी। वह एथलेटिक्स में लांग जंप और क्रिकेट खेलती थी। उनका सपना था कि उनकी बेटी देश के लिए पदक जीतकर लाए। इसी के चलते 10 साल पहले हुए परिवार समेत रोहतक में शिफ्ट हो गए। दीपांशी ने बताया कि उनके पापा एक फैक्ट्री में काम करते थे। लोग उनके पापा को बोलते थे कि गांव आओ लड़कियों पर कौन इतना खर्च करता है, लेकिन पापा की सोच अलग थी। उन्होंने हमें बेटों की तरह पाल पोसकर बड़ा किया। पापा बलजीत सिंह का सपना था कि मैं देश के लिए मेडल लेकर आऊं। उनकी बहन नैंसी रुहिल ने भी वर्ष 2019 मे नेपाल मे आयोजित अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता मे 400 मीटर दौड़ मे कांस्य पदक जीता था। दीपांशी ने बताया कि वह रोहतक एमडीयू में कोच डॉ. रमेश सिंधु के साथ पिछले 10 साल से अभ्यास करती है। उन्होंने उसका मनोबल बढ़ाया।
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-फोटो 64 : दीपांशी रुहिल, दहकोरा।