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Jhajjar-Bahadurgarh News: दीक्षा डागर अर्जुन अवाॅर्ड के लिए नामित
Thu, 14 Dec 2023 11:51 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Thu, 14 Dec 2023 11:51 PM IST
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दीक्षा डागर
झज्जर। झज्जर के गांव छप्पार निवासी कर्नल नरेंद्र डागर की बेटी दीक्षा डागर (23) को अब अर्जुन अवॉर्ड के लिए नामित किया गया है। दीक्षा सुनने में अक्षम है लेकिन अपनी प्रतिभा की गूंज से उन्होंने देश का मान बढ़ाया है। उनकी इस उपलब्धि पर परिवार में खुशी का माहौल है। फिलहाल फाइनल सूची आनी बाकी है।
दीक्षा डागर भारत की प्रतिष्ठित महिला गोल्फरों की विशिष्ट श्रेणी में हैं। वह गोल्फ में तीसरे नंबर की रैंक हासिल की हैं जबकि अगले साल होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए भी उन्होंने क्वालीफाई किया है। दीक्षा की जीत के पीछे उनकी मेहनत और संघर्ष बहुत कम लोगों को पता है। उनकी मेहन और लक्ष्य के प्रति समर्पण का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2019 में उन्होंने केप टाउन में दक्षिण अफ़्रीकी महिला ओपन में पहला खिताब जीता था। जब वह महज 18 साल की थीं, तभी एलईटी पर जीत हासिल कर लिया था। ऐसा करने वाली दीक्षा सबसे कम उम्र की भारतीय महिला बन गई थीं। दीक्षा और उनके भाई योगेश डागर दोनों ही सुनने में अक्षम हैं। इसके बाद भी दीक्षा ने बाधाओं को पार किया और महिला गोल्फ की प्रतिस्पर्धी दुनिया में सफलता के लिए खुद को आगे बढ़ाया।
इस यात्रा में उनका मार्गदर्शन करने वाले उनके पिता कर्नल नरेंद्र डागर हैं, जो खुद पूर्व स्क्रैच गोल्फर हैं। उन्होंने अपनी बेटी की प्रतिभा को पहचाना और शुरू से ही उसका पूरा साथ दिया। दीक्षा के माता-पिता ने उसकी सुनने की अक्षमता को कभी भी उसके सपनों में बाधा नहीं बनने दिया और एक ऐसा माहौल तैयार किया जिससे गोल्फ और अन्य खेलों के प्रति उसके जुनून को बढ़ावा मिला। आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए खेल के क्षेत्र में अपने पिता के विश्वास से प्रेरित होकर दीक्षा ने गोल्फ को केंद्र में रखते हुए अपनी एथलेटिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित किया। उनके परिवार ने उनकी अपार प्रतिभा को पहचाना, क्योंकि उन्होंने न केवल गोल्फ में बल्कि टेनिस, तैराकी और एथलेटिक्स में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था।
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दीक्षा डागर भारत की प्रतिष्ठित महिला गोल्फरों की विशिष्ट श्रेणी में हैं। वह गोल्फ में तीसरे नंबर की रैंक हासिल की हैं जबकि अगले साल होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए भी उन्होंने क्वालीफाई किया है। दीक्षा की जीत के पीछे उनकी मेहनत और संघर्ष बहुत कम लोगों को पता है। उनकी मेहन और लक्ष्य के प्रति समर्पण का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2019 में उन्होंने केप टाउन में दक्षिण अफ़्रीकी महिला ओपन में पहला खिताब जीता था। जब वह महज 18 साल की थीं, तभी एलईटी पर जीत हासिल कर लिया था। ऐसा करने वाली दीक्षा सबसे कम उम्र की भारतीय महिला बन गई थीं। दीक्षा और उनके भाई योगेश डागर दोनों ही सुनने में अक्षम हैं। इसके बाद भी दीक्षा ने बाधाओं को पार किया और महिला गोल्फ की प्रतिस्पर्धी दुनिया में सफलता के लिए खुद को आगे बढ़ाया।
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इस यात्रा में उनका मार्गदर्शन करने वाले उनके पिता कर्नल नरेंद्र डागर हैं, जो खुद पूर्व स्क्रैच गोल्फर हैं। उन्होंने अपनी बेटी की प्रतिभा को पहचाना और शुरू से ही उसका पूरा साथ दिया। दीक्षा के माता-पिता ने उसकी सुनने की अक्षमता को कभी भी उसके सपनों में बाधा नहीं बनने दिया और एक ऐसा माहौल तैयार किया जिससे गोल्फ और अन्य खेलों के प्रति उसके जुनून को बढ़ावा मिला। आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए खेल के क्षेत्र में अपने पिता के विश्वास से प्रेरित होकर दीक्षा ने गोल्फ को केंद्र में रखते हुए अपनी एथलेटिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित किया। उनके परिवार ने उनकी अपार प्रतिभा को पहचाना, क्योंकि उन्होंने न केवल गोल्फ में बल्कि टेनिस, तैराकी और एथलेटिक्स में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था।
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