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सूचना न देने पर ईओ पर ठोका तीन हजार रुपये हर्जाना
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर बहादुरगढ़
Updated Tue, 09 Sep 2014 12:29 AM IST
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राज्य सूचना आयोग ने जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत सूचना न देने पर नगर परिषद के तत्कालीन जनसूचना अधिकारी एवं कार्यकारी अधिकारी को तीन हजार रुपये का हर्जाना आवेदक को देने के आदेश दिए हैं।
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हालांकि आवेदक ने आयोग के फैसले पर असंतोष जताते हुए आरोप लगाया है कि इस मामले में भारी आर्थिक गोलमाल की वजह से ही एसपीआईओ ने सूचनाओं को दबाया है।
सामाजिक कार्यकर्ता नरेशन जून ने बताया कि नगर परिषद बहादुरगढ़ ने 27 जुलाई 2013 को अखबारों में विज्ञापन देकर 72 विकास कार्यों के लिए टेंडर आमंत्रित किए थे। इनमें से कई कार्य ऐसे थे, जो पहले ही हो चुके हैं।
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जून ने बताया कि सोनी स्कूल से नजफगढ़ रोड तक वार्ड-12 व वार्ड-14 के बीच गली नंबर एक के निर्माण के लिए टेंडर मांगे गए थे। टेंडर मांगने से पहले ही इस गली को उखाड़ दिया गया था।
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उन्होंने बताया कि कुल 72 प्रस्तावित विकास कार्यों की सूची में कार्य क्रमांक-30 के तहत जिस गली के निर्माण के लिए टेंडर मांगे गए थे, वह 15 दिन पहले ही पक्की की जा चुकी थी।
इस तरह अन्य गलियों के टेंडरों में भी संदेह उपजा तो उन्होंने आरटीआई के तहत मामले में जानकारी मांगने का फैसला लिया।
नहीं मिली जानकारी
उन्होंने बताया कि 29 जुलाई 2013 को परिषद के एसपीआईओ एवं ईओ अतर सिंह को सूचना के लिए आवेदन किया। जानकारी न मिलने पर 6 जनवरी 2014 को पहली और 13 जनवरी 2014 को दूसरी अपील लगाई। इसके बावजूद सूचना नहीं दी गई, तो 9 मई और 31 जुलाई 2014 को राज्य सूचना आयोग ने मामले पर सुनवाई की।
सूचना आयुक्त मेजर जनरल (रिटायर्ड) जेएस कुंडू ने नगर परिषद के एसपीआईओ को आरटीआई एक्ट के तहत दोषी ठहराया। 08 अगस्त 2014 को हस्ताक्षरित अपने फैसले में उन्होंने तत्कालीन एसपीआईओ को आदेश दिए हैं कि वह आवेदक को 15 सितंबर 2014 तक तीन हजार रुपये हर्जाना दें।
फैसले पर जताया असंतोष
आवेदक नरेश जून ने आयोग के फैसले पर असंतोष जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि आरटीआई एक्ट के मुताबिक एसपीआईओ पर कम से कम 25 हजार रुपये जुर्माना बनता है, लेकिन आयोग ने सिर्फ तीन हजार रुपये हर्जाना लगाकर मामले को रफा-दफा कर दिया।
जुर्माना तो अधिकारी की जेब से जाता, जबकि हर्जाना सरकारी खाते से भी देने का प्रावधान है। इससे सरकारी धन ही खर्च होगा। उन्होंने एसपीआईओ पर अपना पक्ष मजबूत करने के लिए झूठी रिसिविंग दिखाने का भी आरोप लगाया।
जून का कहना है कि एसपीआईओ ने उनको और सूचना आयोग को गुमराह किया। ऐसे में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
कुछ नहीं बोले एसपीआईओ
बहादुरगढ़ में अमर उजाला कार्यालय के साथ एक ऑफिस में सोमवार को किसी व्यक्तिगत कार्य से आए एसपीआईओ अतर सिंह से जब इस बारे पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो वे यह कहकर वहां से चले गए कि उनकी गाड़ी रोहतक दिल्ली रोड पर जाम में फंसी है। बार-बार जवाब मांगने पर भी वह नहीं रुके।