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कल चमन था आज सहरा हुआ
अमर उजाला झज्जर/ब्यूरो
Updated Wed, 24 Feb 2016 12:55 AM IST
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शनिवार की सायं हुए गदर ने बस स्टेंड क्षेत्र में क्या कहर ढ़हाया, लोग मंगलवार को इसे देख सिहर उठे।
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शुक्रवार तक जहां यह पूरा क्षेत्र आबाद था और चहल पहल शबाब पर थी, वहीं कर्फ्यू में मिली ढ़ील के बाद लोग इस क्षेत्र में पहुंचे तो दुकानों से उठ रहे धूएं की लपटें, जलने के बाद भरभरा कर गिर रही दुकान की दीवारें और अपने नुकसान का आंकलन करते लोगों की रूआंसी तस्वीर ने उनका स्वागत किया।
सायं के वक्त तो बड़ी संख्या में महिला, पुरूष, बच्चे भी परिजनों के साथ इस क्षेत्र में उपद्रवियों द्वारा किए गए हाल को देखने पहुंचे।
उपद्रव के बाद से क्षेत्र के लोग सहमें हैं और आने जाने वालों को या तो घरों की खिड़कियों से निहार रहे हैं या फिर छतों से। बच्चों ने यहां के बर्बादी के मंजर को अपने फोन के कैमरों में कैद भी किया।
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शनिवार व रविवार को जातीय हिंसा के बाद से शहर में कर्फ्यू लगा था। सोमवार को शहर में शांति रही तो मंगलवार को प्रशासन ने सुबह से सायं तक कर्फ्यू में ढ़ील दी गई।
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फौज की कड़ी निगरानी के बीच लोग अपने दिनचर्या के कार्यो‘ को निपटाने के लिए पहुंचे। कई दिन से शहर में फंसे लोग अपने घरों को जाने के निए निकले, लेकिन बस स्टेंड पर न तो बसें थी, न कोई अन्य साधन।
पूरे क्षेत्र में दुकानें भी नहीं खुली। दुकानदार अपने परिजनों के साथ अपनी दुकानों में हुए नुकसान का आंकलन करने पहुंचे। इनमें वे लोग भी थे, जिनकी दुकानों में नुकसान नहीं था।
वो ऐसा पाकर शोक से तो उबरे, लेकिन मार्केट की अन्य दुकानों की हालात ने उनके माथे पर सिकन ला दी। पूरा क्षेत्र बर्बादी की कहानी बयां कर रहा है। बैक, एटीएम जल चुके हैं।
न तो कोई कर्मी आ रहा है ओर न ही अभी कोई अधिकारी नुकसान का जायजा लेने पहुंचा है। बस स्टेंड पर भी अभी बसों को नहीं लाया जा रहा है।
शहर में हर चौक चौराहे पर पुलिस या फिर फौज के जवान हैं। वाहनों की आवाजाही न होने और कर्फ्यू के चलते कम्रचारी भी कार्यालयों में नहीं आ पा रहे हैं।