फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jhajjar/Bahadurgarh News ›   power line will not pass Farms

खेतों से नहीं गुजरने देंगे बिजली की लाइन

Mon, 09 Nov 2015 01:03 AM IST
अमर उजाला झज्जर/ब्यूरो
अमर उजाला झज्जर/ब्यूरो Updated Mon, 09 Nov 2015 01:03 AM IST
विज्ञापन
power line will not pass Farms

एनटीपीसी पावर प्लांट, झाड़ली से एक सीमेंट फैक्टरी तक जाने वाली बिजली लाइन के विरोध में रविवार को बिरोहड़ 12 खाप के 17 गांवों के लोगों ने पंचायत कर पावर प्लांट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

विज्ञापन


गांव झामरी में हुई पंचायत में फैसला सुनाया गया कि पहले डीसी खुद मौके का मुआयना करें कि ग्रामीणों का विरोध सही है या नहीं। साथ ही यह भी कहा कि ग्रामीण मांगें न पूरी होने तक अपने खेतों से बिजली की लाइन नहीं गुजरने देंगे।
विज्ञापन


पंचायत में एक 11 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया जो कि 16 नवंबर को डीसी से मिलकर मौके का मुआयना करने को कहेगी।

बता दें कि गांव झाड़ली स्थित एनटीपीसी पावर प्लांट से गांव झामरी के रास्ते एक सीमेंट फैक्टरी तक जाने वाली बिजली लाइन को लेकर पिछले करीब एक साल से विवाद चल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ग्रामीणों पर इस मामले में सरकारी काम में बाधा डालने तक के मुकदमे भी दर्ज हैं, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीण अपने खेतों से बिजली की लाइन नहीं लगने दे रहे।

इसी विवाद को लेकर रविवार को गांव झामरी में फिर बिरोहड़ 12 खाप की पंचायत हुई। अध्यक्षता भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने की।

पंचायत में खाप से संबंधित विभिन्न 17 गांवों जिनमें बिरोहड़, कालियावास, खासरौली, सेहरंगा, ढ़माणावास, खोरड़ा, बहु, खेड़ा थरू, खानपुर कलां, सुंदरहेटी, मालियावास, सातरौली, झामरी के ग्रामीणों ने भाग लिया।

ग्रामीण बोले, सड़क किनारे से ले जाएं लाइन, करेंगे सहयोग
ग्रामीणों ने पंचायत में कहा कि किसी भी सूरत में खेतों से बिजली की लाइन नहीं गुजरने देंगे। प्रशासन की ओर से पहले जो आश्वासन ग्रामीणों को दिया गया था, उस पर प्रशासन खरा उतरे।

बिजली की लाइन खेतों से बीचों बीच निकालने की बजाय सड़क के किनारे के साथ से निकाली जाए। इसमें ग्रामीण पूरा सहयोग देंगे। पंचायत में ग्रामीणों के खिलाफ पहले से दर्ज सरकारी काम में बाधा डालने के मुकदमे को झूठा बताते हुए इसे रद करने की मांग की गई।

डीसी को बुलाने पर अड़े ग्रामीण
एनटीपीसी पावर प्लांट से गांव झामरी के रास्ते एक सीमेंट फैक्टरी तक जाने वाली बिजली लाइन को लेकर ग्रामीणों के विरोध को पंचायत में सही करार दिया गया।

अब ग्रामीण अपनी बात को पुख्ता तरीके से प्रशासन के सामने रखने के लिए डीसी अनीता यादव को मौके पर बुलाने पर अड़ गए हैं। डीसी व पावर प्लांट के एसई को गांव झामरी में बुलाने के लिए बाकायदा एक 11 सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया गया है।

पूरे मामले में पेंच है कि ग्रामीण खेतों से लाइन गुजरने नहीं देना चाहते, वहीं बिजली अधिकारी लाइन का रास्ता बदलने को राजी नहीं है।

खेत खराब करने पर तुले हैं अधिकारी : चढ़ूनी

भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि पावर प्लांट के अधिकारी जिद कर किसानों के खेत खराब करने पर तुले हैं, इसे किसी भी सूरत में सहन नहीं किया जाएगा।

खेतों के बीचों बीच भारी भरकम बिजली के पोल लगाने की तैयारी है, किसान इससे भयभीत हैं। किसानों को न ही पर्याप्त मुआवजा देने का ऐलान हो रहा है।

बिजली की लाइन सड़क के साथ से निकाली जा सकती है। उन्होंने रोष जताया कि किसानों पर डराने धमकाने, बिजली तार चोरी आदि के झूठे मुकदमे पहले से दर्ज हैं।

प्रशासन कोई हल निकालने की बजाय पूर्व में लिए जा चुके फैसलों से पलट रहा है। इसे किसान अब सहन नहीं करने वाले।

16 को ये मिलेंगे डीसी से
पंचायत में फै सला लिया गया कि 11 सदस्यीय कमेटी 16 नवंबर को जिले की नवनियुक्त डीसी अनीता यादव से मुलाकात कर उनसे मौके का निरीक्षण करने का अनुरोध करेगी।

इसके लिए बनाई गई कमेटी में बिरोहड़ 12 के प्रधान जगदेव सिंह, बनी सिंह नंबरदार, पूर्व सरपंच मांगेराम, भगवाना, रामनारायण, केहर सिंह मिस्त्री, सतबीर मेंबर, हजारी लाल, रमेश पंच, जागेराम, रामकिशन आदि को शामिल किया गया है।

इनके अलावा रविवार को हुई पंचायत में भाकियू महिला विंग प्रधान स्लोचना, राजेंद्र धनखड़, पटवारी वेदपाल, भीम सिंह, किसान जनहित संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुनील कुमार, झामरी के पूर्व सरपंच बलजीत सिंह, राजेश प्रधान आदि अनके गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

ढाई घंटे के दौरान कई बार तनातनी
बिरोहड़ बारहा की पंचायत दोपहर को 12 बजे से शुरू होकर ढाई बजे तक चली। पंचायत में कई बार ग्रामीणों ने कठोर फैसला सुनाने का दबाव डाला। इसको लेकर कई बार पंचायत के मौजिज व्यक्तियों के बीच तनातनी भी हुई।

अंत में मामला एक कमेटी के गठन और डीसी को मौके पर बुला कर अपनी बात समझाने पर निपटा। साथ ही कहा गया कि प्रशासन जिद पर अड़ा रहा तो बिरोहड़ खाप अगली बैठक में कठोर फैसला लेने पर विचार करेगी।


बता दें कि पावर प्लांट व किसानों के बीच विवाद पिछले करीब एक साल से चल रहा है। 15 बार पंचायतें हो चुकी हैं। प्रशासन भी पंचायत में शामिल हो चुका है, लेकिन हल कोई नहीं निकल रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed