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मुआवजा और रॉयल्टी न मिलने पर किसान सुप्रीम कोर्ट की शरण में
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर
Updated Sat, 10 Sep 2016 01:49 AM IST
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करीब दस साल पहले कुंडली-मानेसर-पलवल हाइवे के लिए अधिग्रहीत हुई जमीन का पिछले तीन सालों से न तो किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा मिला और न ही रॉयल्टी। इस मामले को लेकर किसानों ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली है। मुआवजा राशि न मिलने से बादली, मुंडाखेड़ा, बुपनियां, दरियापुर सहित आधा दर्जन गांवों के किसान प्रभावित हुए हैं। किसानों की मानें तो उन्हें करीब दस करोड़ रुपये बढ़ा हुआ मुआवजा मिलना चाहिए।
बता दें कि एचएसआईआईडीसी ने 2006 में कुंडली-मानेसर-पलवल हाइवे के लिए जमीन अधिग्रहीत की थी। उस समय किसानों को 12 लाख 50 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा राशि दी गई थी। इस पर किसानों को 33 वर्ष तक रॉयल्टी देने की शर्त भी थी। बाद में किसानों द्वारा कोर्ट में चले जाने के चलते धारा-18 के तहत 1 लाख 77 हजार 25 रुपये बढ़ाकर 14 लाख 27 हजार 25 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने के आदेश न्यायालय ने एचएसआईआईडीसी को दिए थे। आदेशों में कहा गया था कि बढ़ी राशि न देने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की गाड़ी को अटैच की जाएंगी। मगर यह मामला भी हाई कोर्ट में पहुंच गया और फरवरी तो एक बार फिर से फैसला किसानों के हक में आया। इस बार कोर्ट ने एचएसआईआईडीसी द्वारा बढ़ी राशि न देने पर 5 बैंक खाते भी अटैच कर दिए थे।
ये है मामला
किसान जगदीश नंबरदार, नरेंद्र, धर्मपाल, राजीत, नेतराम, नरेंद्र, विजय, सत्ते, सुखबीर, औमकार, धर्म, शेरसिंह, इन्द्र, श्रीओम, खुशिया, नफे, शेरा और चरण सिंह ने बताया कि फैसला किसानों के पक्ष में आने पर भी किसानों को 7 माह गुजरने के बाद भी अभी तक बढ़ी हुई राशि नहीं मिली है जिसको लेकर किसान सुप्रीम कोर्ट में गए हैं। हाइकोर्ट नए आदेशों के अनुसार किसानों को नए मार्केट रेट के हिसाब से करीब 20 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा और 2013 के बाद की रॉयल्टी दी जानी है।
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ये है रॉयल्टी नियम
जिन किसानों की जमीन केएमपी में गई है उन किसानों को 15 हजार रुपये प्रति वर्ष रॉयल्टी के तौर पर मिलने का प्रावधान है। यह रॉयल्टी किसानों को 33 वर्षों तक मिलनी है। इस राशि में 500 रुपये प्रतिवर्ष बढ़ोतरी की जाती है। 2006 के बाद 2013 तक तो किसानों को रॉयल्टी बढ़ाकर मिलती रही मगर 2013 के बाद से किसानों को रॉयल्टी दी ही नहीं गई। जिससे चलते किसानों को कोर्ट का सहारा लेना पड़ रहा है।
कोर्ट के आदेशों पर बढ़ा हुआ मुआवजा किसानों को एक माह में दे दिया जाएगा, जिसके लिए कार्रवाई की जा रही है। वहीं कोर्ट की ओर से एचएसआईआईडीसी के 5 बैंक खाते अटैच किए गए हैं जिनके खुलने के बाद ही रॉयल्टी दी जा सकती है। खाते अटैच होने के चलते बैंक में पैसे जमा नहीं हो रहे हैं और ऐसे में रॉयल्टी नहीं दी जा सकती।
सोनू, पटवारी एचएसआईआईडीसी
क्षेत्र की अधिग्रहित जमीन
बादली- 151 एकड़, 1 कनाल और 11 मरले
मुंडाखेड़ा- 61 एकड़, 2 कनाल और 5 मरले
बुपनियां- 115 एकड़, 7 कनाल और 13 मरेल
दरियापुर- 28 एकड़, 6 कनाल और 11 मरले।
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बता दें कि एचएसआईआईडीसी ने 2006 में कुंडली-मानेसर-पलवल हाइवे के लिए जमीन अधिग्रहीत की थी। उस समय किसानों को 12 लाख 50 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा राशि दी गई थी। इस पर किसानों को 33 वर्ष तक रॉयल्टी देने की शर्त भी थी। बाद में किसानों द्वारा कोर्ट में चले जाने के चलते धारा-18 के तहत 1 लाख 77 हजार 25 रुपये बढ़ाकर 14 लाख 27 हजार 25 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने के आदेश न्यायालय ने एचएसआईआईडीसी को दिए थे। आदेशों में कहा गया था कि बढ़ी राशि न देने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की गाड़ी को अटैच की जाएंगी। मगर यह मामला भी हाई कोर्ट में पहुंच गया और फरवरी तो एक बार फिर से फैसला किसानों के हक में आया। इस बार कोर्ट ने एचएसआईआईडीसी द्वारा बढ़ी राशि न देने पर 5 बैंक खाते भी अटैच कर दिए थे।
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ये है मामला
किसान जगदीश नंबरदार, नरेंद्र, धर्मपाल, राजीत, नेतराम, नरेंद्र, विजय, सत्ते, सुखबीर, औमकार, धर्म, शेरसिंह, इन्द्र, श्रीओम, खुशिया, नफे, शेरा और चरण सिंह ने बताया कि फैसला किसानों के पक्ष में आने पर भी किसानों को 7 माह गुजरने के बाद भी अभी तक बढ़ी हुई राशि नहीं मिली है जिसको लेकर किसान सुप्रीम कोर्ट में गए हैं। हाइकोर्ट नए आदेशों के अनुसार किसानों को नए मार्केट रेट के हिसाब से करीब 20 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा और 2013 के बाद की रॉयल्टी दी जानी है।
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ये है रॉयल्टी नियम
जिन किसानों की जमीन केएमपी में गई है उन किसानों को 15 हजार रुपये प्रति वर्ष रॉयल्टी के तौर पर मिलने का प्रावधान है। यह रॉयल्टी किसानों को 33 वर्षों तक मिलनी है। इस राशि में 500 रुपये प्रतिवर्ष बढ़ोतरी की जाती है। 2006 के बाद 2013 तक तो किसानों को रॉयल्टी बढ़ाकर मिलती रही मगर 2013 के बाद से किसानों को रॉयल्टी दी ही नहीं गई। जिससे चलते किसानों को कोर्ट का सहारा लेना पड़ रहा है।
कोर्ट के आदेशों पर बढ़ा हुआ मुआवजा किसानों को एक माह में दे दिया जाएगा, जिसके लिए कार्रवाई की जा रही है। वहीं कोर्ट की ओर से एचएसआईआईडीसी के 5 बैंक खाते अटैच किए गए हैं जिनके खुलने के बाद ही रॉयल्टी दी जा सकती है। खाते अटैच होने के चलते बैंक में पैसे जमा नहीं हो रहे हैं और ऐसे में रॉयल्टी नहीं दी जा सकती।
सोनू, पटवारी एचएसआईआईडीसी
क्षेत्र की अधिग्रहित जमीन
बादली- 151 एकड़, 1 कनाल और 11 मरले
मुंडाखेड़ा- 61 एकड़, 2 कनाल और 5 मरले
बुपनियां- 115 एकड़, 7 कनाल और 13 मरेल
दरियापुर- 28 एकड़, 6 कनाल और 11 मरले।