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एनजीटी के आदेशों के बाद भी चल रहे पुराने ईंट भट्ठे, उड़ रही धज्जियां
Updated Sun, 28 Jan 2018 01:13 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बादली (झज्जर)।
क्षेत्र में बिना जिग-जैग प्रणाली के अवैध तरीके से चल रहे ईंट भट्ठों प्रशासनिक स्तर पर पूरी तरह से कार्रवाई न होने से कई जगहों पर भट्ठे चल रहे हैं। यह बोर्ड की ढीली कार्रवाई का परिणाम है या फिर कोई और। चार माह पहले एनजीटी ने ऐसे भट्ठों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया था। मगर अभी तक केवल आधा दर्जन ईंट भट्ठों पर बोर्ड की कार्रवाई अमल में लाई गई है। यह सच है कि कई जगह पर भट्ठों का चलना अभी भी जारी है। जबकि हॉट मिक्स प्लांटस धड़ल्ले से चल रहे हैं। जोकि एनसीआर में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है।
एनजीटी के आदेशों के बाद झज्जर जिले के 453 ईंट भट्ठों पर सूई लटक गई थी, इनमें से 126 ईंट भट्ठे तो जिग-जैग प्रणाली में तबदील हो गई। जबकि अन्य शेष भट्ठों पर बोर्ड की ओर से कार्रवाई होनी थी। इनमें से अधिकतर भट्ठों पर जिग-जैग प्रणाली का काम शुरू हुआ मगर इसके बाद भी क्षेत्र में ऐसे भट्ठों की कोई गिनती नहीं है जो आज भी बिना जिग-जैग प्रणाली के धड़ल्ले से चल रहे है। जिले में 453 ईंट भट्ठों को लाइसेंस मिले हुए हैं।
हरियाणा सरकार के नए आदेशों के बाद ईंट भट्ठों को जिग-जैग सिस्टम में बदलना जरूरी है। जबकि बिना जिग-जैग के भट्ठों को आगामी आदेशों तक पूरी तरह से बंद किए जाने के निर्देश है। अब तक 126 ईंट भट्ठों को जिग-जैग में बदला गया है। 76 भट्ठों पर बदलने का काम जारी है। अन्य भट्ठा संचालक सरकार और एनजीटी के आदेशों को ताक पर रखकर भट्ठे चला रहे हैं। जिस पर प्रशासनिक की ढीली कार्रवाई रुक-रुककर चल रही है। जहर उगलने वाला धुआं ग्रामीणों के स्वास्थ्य स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है।
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बोले अधिकारी
एसडीएम त्रिलोक चंद्र ने बताया कि दिसंबर 2017 में ही बादली में प्रदूषण बोर्ड, तहसीलदार और खाद् एवं आपूर्ति विभाग की टीम का गठन किया था। टीम ने कई ईंट भट्ठा संचालकों के खिलाफ कार्रवाई भी की थी। उन्होंने स्वयं भी भट्ठों का निरीक्षण किया था। इसके बाद भी क्षेत्र में अवैध तरीके से प्रदूषण हो रहा है तो प्रदूषण बोर्ड को सख्त किया जाएगा।
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बादली (झज्जर)।
क्षेत्र में बिना जिग-जैग प्रणाली के अवैध तरीके से चल रहे ईंट भट्ठों प्रशासनिक स्तर पर पूरी तरह से कार्रवाई न होने से कई जगहों पर भट्ठे चल रहे हैं। यह बोर्ड की ढीली कार्रवाई का परिणाम है या फिर कोई और। चार माह पहले एनजीटी ने ऐसे भट्ठों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया था। मगर अभी तक केवल आधा दर्जन ईंट भट्ठों पर बोर्ड की कार्रवाई अमल में लाई गई है। यह सच है कि कई जगह पर भट्ठों का चलना अभी भी जारी है। जबकि हॉट मिक्स प्लांटस धड़ल्ले से चल रहे हैं। जोकि एनसीआर में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है।
एनजीटी के आदेशों के बाद झज्जर जिले के 453 ईंट भट्ठों पर सूई लटक गई थी, इनमें से 126 ईंट भट्ठे तो जिग-जैग प्रणाली में तबदील हो गई। जबकि अन्य शेष भट्ठों पर बोर्ड की ओर से कार्रवाई होनी थी। इनमें से अधिकतर भट्ठों पर जिग-जैग प्रणाली का काम शुरू हुआ मगर इसके बाद भी क्षेत्र में ऐसे भट्ठों की कोई गिनती नहीं है जो आज भी बिना जिग-जैग प्रणाली के धड़ल्ले से चल रहे है। जिले में 453 ईंट भट्ठों को लाइसेंस मिले हुए हैं।
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हरियाणा सरकार के नए आदेशों के बाद ईंट भट्ठों को जिग-जैग सिस्टम में बदलना जरूरी है। जबकि बिना जिग-जैग के भट्ठों को आगामी आदेशों तक पूरी तरह से बंद किए जाने के निर्देश है। अब तक 126 ईंट भट्ठों को जिग-जैग में बदला गया है। 76 भट्ठों पर बदलने का काम जारी है। अन्य भट्ठा संचालक सरकार और एनजीटी के आदेशों को ताक पर रखकर भट्ठे चला रहे हैं। जिस पर प्रशासनिक की ढीली कार्रवाई रुक-रुककर चल रही है। जहर उगलने वाला धुआं ग्रामीणों के स्वास्थ्य स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है।
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बोले अधिकारी
एसडीएम त्रिलोक चंद्र ने बताया कि दिसंबर 2017 में ही बादली में प्रदूषण बोर्ड, तहसीलदार और खाद् एवं आपूर्ति विभाग की टीम का गठन किया था। टीम ने कई ईंट भट्ठा संचालकों के खिलाफ कार्रवाई भी की थी। उन्होंने स्वयं भी भट्ठों का निरीक्षण किया था। इसके बाद भी क्षेत्र में अवैध तरीके से प्रदूषण हो रहा है तो प्रदूषण बोर्ड को सख्त किया जाएगा।