{"_id":"5a83392a4f1c1bd34b8b8848","slug":"201518549290-jhajjar-bahadurgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीन साल: सड़क हादसे में 239 ने तोड़ा दम, 434 घायल","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
तीन साल: सड़क हादसे में 239 ने तोड़ा दम, 434 घायल
Updated Wed, 14 Feb 2018 12:49 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तीन साल: सड़क हादसे में 239 ने तोड़ा दम, 434 घायल
हनी सोनी
चरखी दादरी।
तीन सालों में जिले की प्रमुख ही नहीं एप्रोच सड़कें सड़क हादसों में खून से लाल रहीं। ज्यादातर वाहन चालकों की जान सामने वाले चालक की लापरवाही से गई जबकि कुछ में हेलमेट न पहनना व तेज रफ्तार मौत का कारण बनी। इस समयावधि में 773 सड़क हादसों में 239 लोगों की मौतें हुई हैं जबकि 434 लोग घायल हो चुके हैं। इनमें 60 फीसदी युवा शामिल हैं। वहीं, करीब 20 महिलाओं ने 2015 से 2017 तक इन सड़क हादसों में दम तोड़ा है जबकि 70 महिलाएं इन हादसों में घायल हुई है। ये आंकड़ा पुलिस विभाग के पास मौजूदा रिकॉर्ड के अनुसार है। जबकि छोटे हादसे भी अगर जोड़े जाएं तो हादसों की संख्या डेढ़ हजार से पार जाने की उम्मीद है। इस लिहाज से जिले में हर दूसरे दिन किसी न किसी सड़क हादसे में तीन लोग घायल हो रहे हैं। पुलिस की मानें तो 90 फीसदी हादसों का कारण वाहनों की तेज रफ्तार रही है। दस प्रतिशत हादसे चालक के शराब के नशे में होने के कारण हुए हैं। अकेले 2017 में 98 बाइक सड़क हादसे सामने आए और इनमें 120 लोग घायल हुए। पुलिस सूत्रों की मानें तो 15 फीसदी हादसों का कारण ब्लैक स्पॉट भी रहे हैं। वहीं, पिछले करीब तीन सालों में 30 से 35 लोगों ने हेलमेट न लगाने के चलते जान गंवाई है। इन हादसों में कई परिवार ऐसे हैं जिन्होंने अपने इकलौते चिरोग खो दिए। जिलेवासियों को इन हादसों से सबक लेकर ट्रैफिक नियमों के प्रति संजीदगी दिखाने की जरूरत है ताकि जिले में उपर जा रहे सड़क हादसों के ग्राफ में गिरावट आ सके। अकेले 2017 में करीब आधा दर्जन स्कूली बसें भी दुर्घटनाग्रस्त हुई हैं और 60 स्कूली बच्चे घायल हुए हैं।
जिले में बीते अगर एक दशक की बात करें तो आधा दर्जन बड़े हादसे हो चुके हैं। जिले का सबसे खतरनाक दुर्घटना स्पॉट समसपुर मोड़ माना गया है। प्रशासन ने हादसों से सबक लेकर संकीर्ण मोड़ को चौड़ा करवा दिया है और इसके बाद से ही यहां कोई बड़ी घटना नहीं हुई है। इसके अलावा इस समय मुख्यमार्गों की कमी चौड़ाई भी हादसों का कारण बन रही है। इन मुख्यमार्गों के अलावा जिले से गुजरने वाले नेशनल हाईवे पर तो डिवाइडर तक नहीं बनाए गए हैं। राजस्थान-दिल्ली हाईवे पर सबसे अधिक बड़े सड़क हादसे हुए हैं। यही स्थिति दादरी-रोहतक एमडीआर (मेजर डिस्ट्रिक रोड) का है।
ये हो चुके हैं जिले में बीते कुछ सालों में बड़े हादसे
जनवरी 2014 में सांजरवास व बौंदकलां के बीच हुई ऑटो व ट्रक की भिड़ंत में एक ही परिवार के पांच लोगों ने जिंदगी गंवा दी थी। इस हादसे की यादें आज भी क्षेत्रवासियों के जहन में है। इस हादसे के बाद ही यहां सड़क पर सफेद पट्टी व रिफ्लेक्टर लगवाए गए थे। वहीं, 1995 में टाटा-407 में बिजली समस्या की शिकायत कर बाढड़ा से लौट रहे गांव हड़ौदी के करीब 20 ग्रामीणों की दुर्घटना में मौत हो गई थी। इसके अलावा करीब छह साल पहले दिल्ली रोड स्थित रामबाग के समीप भी तेज रफ्तार पिकअप डाला सड़क किनारे खड़े बिजली खंभे से टकरा गया था। इसमें छह लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। पिछले साल समसपुर के समीप रोडवेज बस व कंटेनर की भिड़ंत में तीन लोगों की मौत हुई थी जबकि करीब 23 यात्री इसमें घायल हुए थे। वहीं, अचीना ताल चौकी के समीप करीब एक साल पहले निजी स्कूल की बस को भी सामने से आ रहे तेज रफ्तार डंपर ने टक्कर मार दी थी। इसमें करीब 20 स्कूली बच्चे घायल हुए थे। बीते तीन सालों में आधा दर्जन स्कूली बसें दादरी-दिल्ली मुख्यमार्ग, झोझूकलां-आदमपुर मार्ग व दादरी-झज्जर मुख्यमार्ग पर हादसों का शिकार हुई हैं और इनमें करीब 60 से 70 बच्चे घायल हुए हैं।
विज्ञापन
2016 में सबसे अधिक मौतें तो 2015 में सबसे अधिक लोग हुए घायल
बीते तीन सालों में 773 लोग हादसों का शिकार हुए हैं और इनमें से 30 फीसदी की मौत हुई है। पुलिस से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 2015 में 185 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 76 लोगों की मौत हुई जिनमें 73 पुरुष व तीन महिलाएं शामिल हैं। इन हादसों में 177 लोग घायल हुए जिनमें 162 पुरुष व 15 महिलाएं शामिल हैं। इन हादसों में 90 बाइक हादसे थें। 2016 में दुर्घटनाओं की दर बढ़ गई और 185 से आंकड़ा बढ़कर 208 पर जा पहुंचा। 208 हादसों में 97 लोगों की मौतें हुई और इनमें 91 पुरुष व छह महिलाएं शामिल हैं। वहीं, 136 लोग घायल भी हुए जिनमें 119 पुरुष व 17 महिलाएं शामिल हैं। 2017 में दुर्घटनाओं का ग्राफ गिरा और हादसों की संख्या 186 तक ही सीमित रह गई। इन हादसों में 66 लोगों की मौत हुई तो वहीं 121 घायल हुए। घायलों में 98 पुरुष व 23 महिलाएं शामिल हैं। खास बात यह है कि 186 में से 98 हादसे बाइक सवारों के साथ हुए।
ब्लैक स्पॉट की पहचान करने के डीसी ने दिए हैं निर्देश
गत दिनों ही उपायुक्त विजय कुमार सिद्प्पा ने अधिकारियों को जिला स्तरीय बैठक ली थी। इस बैठक में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने व वाहन चालकों को जागरूक करने के लिए प्लानिंग की गई थी। इस दौरान जिला उपायुक्त ने पीडब्ल्यूडी विभाग को जिले के सभी ब्लैक स्पॉट की सूची तैयार करने के निर्देश दिए थे। वहीं, एसपी हिमांशु गर्ग के निर्देशों पर ट्रैफिक पुलिस ने जागरूकता अभियान भी चलाया था। खुद एसपी हिमांशु गर्ग ने वाहन चालकों को हेलमेट बांटकर अभियान की शुरुआत की थी। इस मुहिम का सकारात्मक परिणाम भी सामने आया है और अब ज्यादातर दुपहिया वाहन चालक हेलमेट लगाए नजर आने लगे हैं। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की मानें तो ब्लैक स्पॉट से निजात दिलाने का कुछ प्वाइंटों पर काम शुरू भी किया जा चुका है।
प्रशासन की अपील: ट्रैफिक नियमों की करें पालना, हेलमेट व सीट बेल्ट करें प्रयोग
वाहन चालकों को ट्रैफिक नियमों की पालना करनी चाहिए। दोपहिया वाहन चलाते समय हेल्मेट और चौपहिया वाहन चलाते समय हमेशा सीट बेल्ट का प्रयोग करें। निर्धारित सीमा में ही सड़कों पर अपने वाहन दौड़ाए। अभिभावकों से अपील है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों को वाहन की चाबी न थमाएं। इससे सड़क हादसों अपने आप कम हो जाएंगे। पुलिस स्कूलों में भी जागरूकता अभियान चला रही है। - हिमांशु गर्ग, पुलिस अधीक्षक
मैंने स्कूल बसों की जांच व जिले में ब्लैक स्पॉट का पता लगाकर उसका समाधान करने के आदेश पीडब्ल्यूडी विभाग को दे दिए हैं। जिले की प्रमुख सभी सड़कों पर सफेद पट्टी खींची जा चुकी है। जिला प्रशासन न केवल खामियों को दूर करेगा बल्कि वाहन चालकों को भी ज्यादा से ज्यादा जागरूक करेगा। इसके लिए अभियान चलाए जा रहे हैं। वाहन चालकों से अपील है कि सुरक्षा संबंधी नियमों की हर हाल में पालना करें और वाहन निर्धारित गति पर ही दौड़ाए। - विजय कुमार सिद्प्पा, जिला उपायुक्त
विज्ञापन
हनी सोनी
चरखी दादरी।
तीन सालों में जिले की प्रमुख ही नहीं एप्रोच सड़कें सड़क हादसों में खून से लाल रहीं। ज्यादातर वाहन चालकों की जान सामने वाले चालक की लापरवाही से गई जबकि कुछ में हेलमेट न पहनना व तेज रफ्तार मौत का कारण बनी। इस समयावधि में 773 सड़क हादसों में 239 लोगों की मौतें हुई हैं जबकि 434 लोग घायल हो चुके हैं। इनमें 60 फीसदी युवा शामिल हैं। वहीं, करीब 20 महिलाओं ने 2015 से 2017 तक इन सड़क हादसों में दम तोड़ा है जबकि 70 महिलाएं इन हादसों में घायल हुई है। ये आंकड़ा पुलिस विभाग के पास मौजूदा रिकॉर्ड के अनुसार है। जबकि छोटे हादसे भी अगर जोड़े जाएं तो हादसों की संख्या डेढ़ हजार से पार जाने की उम्मीद है। इस लिहाज से जिले में हर दूसरे दिन किसी न किसी सड़क हादसे में तीन लोग घायल हो रहे हैं। पुलिस की मानें तो 90 फीसदी हादसों का कारण वाहनों की तेज रफ्तार रही है। दस प्रतिशत हादसे चालक के शराब के नशे में होने के कारण हुए हैं। अकेले 2017 में 98 बाइक सड़क हादसे सामने आए और इनमें 120 लोग घायल हुए। पुलिस सूत्रों की मानें तो 15 फीसदी हादसों का कारण ब्लैक स्पॉट भी रहे हैं। वहीं, पिछले करीब तीन सालों में 30 से 35 लोगों ने हेलमेट न लगाने के चलते जान गंवाई है। इन हादसों में कई परिवार ऐसे हैं जिन्होंने अपने इकलौते चिरोग खो दिए। जिलेवासियों को इन हादसों से सबक लेकर ट्रैफिक नियमों के प्रति संजीदगी दिखाने की जरूरत है ताकि जिले में उपर जा रहे सड़क हादसों के ग्राफ में गिरावट आ सके। अकेले 2017 में करीब आधा दर्जन स्कूली बसें भी दुर्घटनाग्रस्त हुई हैं और 60 स्कूली बच्चे घायल हुए हैं।
जिले में बीते अगर एक दशक की बात करें तो आधा दर्जन बड़े हादसे हो चुके हैं। जिले का सबसे खतरनाक दुर्घटना स्पॉट समसपुर मोड़ माना गया है। प्रशासन ने हादसों से सबक लेकर संकीर्ण मोड़ को चौड़ा करवा दिया है और इसके बाद से ही यहां कोई बड़ी घटना नहीं हुई है। इसके अलावा इस समय मुख्यमार्गों की कमी चौड़ाई भी हादसों का कारण बन रही है। इन मुख्यमार्गों के अलावा जिले से गुजरने वाले नेशनल हाईवे पर तो डिवाइडर तक नहीं बनाए गए हैं। राजस्थान-दिल्ली हाईवे पर सबसे अधिक बड़े सड़क हादसे हुए हैं। यही स्थिति दादरी-रोहतक एमडीआर (मेजर डिस्ट्रिक रोड) का है।
विज्ञापन
ये हो चुके हैं जिले में बीते कुछ सालों में बड़े हादसे
जनवरी 2014 में सांजरवास व बौंदकलां के बीच हुई ऑटो व ट्रक की भिड़ंत में एक ही परिवार के पांच लोगों ने जिंदगी गंवा दी थी। इस हादसे की यादें आज भी क्षेत्रवासियों के जहन में है। इस हादसे के बाद ही यहां सड़क पर सफेद पट्टी व रिफ्लेक्टर लगवाए गए थे। वहीं, 1995 में टाटा-407 में बिजली समस्या की शिकायत कर बाढड़ा से लौट रहे गांव हड़ौदी के करीब 20 ग्रामीणों की दुर्घटना में मौत हो गई थी। इसके अलावा करीब छह साल पहले दिल्ली रोड स्थित रामबाग के समीप भी तेज रफ्तार पिकअप डाला सड़क किनारे खड़े बिजली खंभे से टकरा गया था। इसमें छह लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। पिछले साल समसपुर के समीप रोडवेज बस व कंटेनर की भिड़ंत में तीन लोगों की मौत हुई थी जबकि करीब 23 यात्री इसमें घायल हुए थे। वहीं, अचीना ताल चौकी के समीप करीब एक साल पहले निजी स्कूल की बस को भी सामने से आ रहे तेज रफ्तार डंपर ने टक्कर मार दी थी। इसमें करीब 20 स्कूली बच्चे घायल हुए थे। बीते तीन सालों में आधा दर्जन स्कूली बसें दादरी-दिल्ली मुख्यमार्ग, झोझूकलां-आदमपुर मार्ग व दादरी-झज्जर मुख्यमार्ग पर हादसों का शिकार हुई हैं और इनमें करीब 60 से 70 बच्चे घायल हुए हैं।
विज्ञापन
2016 में सबसे अधिक मौतें तो 2015 में सबसे अधिक लोग हुए घायल
बीते तीन सालों में 773 लोग हादसों का शिकार हुए हैं और इनमें से 30 फीसदी की मौत हुई है। पुलिस से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 2015 में 185 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 76 लोगों की मौत हुई जिनमें 73 पुरुष व तीन महिलाएं शामिल हैं। इन हादसों में 177 लोग घायल हुए जिनमें 162 पुरुष व 15 महिलाएं शामिल हैं। इन हादसों में 90 बाइक हादसे थें। 2016 में दुर्घटनाओं की दर बढ़ गई और 185 से आंकड़ा बढ़कर 208 पर जा पहुंचा। 208 हादसों में 97 लोगों की मौतें हुई और इनमें 91 पुरुष व छह महिलाएं शामिल हैं। वहीं, 136 लोग घायल भी हुए जिनमें 119 पुरुष व 17 महिलाएं शामिल हैं। 2017 में दुर्घटनाओं का ग्राफ गिरा और हादसों की संख्या 186 तक ही सीमित रह गई। इन हादसों में 66 लोगों की मौत हुई तो वहीं 121 घायल हुए। घायलों में 98 पुरुष व 23 महिलाएं शामिल हैं। खास बात यह है कि 186 में से 98 हादसे बाइक सवारों के साथ हुए।
ब्लैक स्पॉट की पहचान करने के डीसी ने दिए हैं निर्देश
गत दिनों ही उपायुक्त विजय कुमार सिद्प्पा ने अधिकारियों को जिला स्तरीय बैठक ली थी। इस बैठक में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने व वाहन चालकों को जागरूक करने के लिए प्लानिंग की गई थी। इस दौरान जिला उपायुक्त ने पीडब्ल्यूडी विभाग को जिले के सभी ब्लैक स्पॉट की सूची तैयार करने के निर्देश दिए थे। वहीं, एसपी हिमांशु गर्ग के निर्देशों पर ट्रैफिक पुलिस ने जागरूकता अभियान भी चलाया था। खुद एसपी हिमांशु गर्ग ने वाहन चालकों को हेलमेट बांटकर अभियान की शुरुआत की थी। इस मुहिम का सकारात्मक परिणाम भी सामने आया है और अब ज्यादातर दुपहिया वाहन चालक हेलमेट लगाए नजर आने लगे हैं। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की मानें तो ब्लैक स्पॉट से निजात दिलाने का कुछ प्वाइंटों पर काम शुरू भी किया जा चुका है।
प्रशासन की अपील: ट्रैफिक नियमों की करें पालना, हेलमेट व सीट बेल्ट करें प्रयोग
वाहन चालकों को ट्रैफिक नियमों की पालना करनी चाहिए। दोपहिया वाहन चलाते समय हेल्मेट और चौपहिया वाहन चलाते समय हमेशा सीट बेल्ट का प्रयोग करें। निर्धारित सीमा में ही सड़कों पर अपने वाहन दौड़ाए। अभिभावकों से अपील है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों को वाहन की चाबी न थमाएं। इससे सड़क हादसों अपने आप कम हो जाएंगे। पुलिस स्कूलों में भी जागरूकता अभियान चला रही है। - हिमांशु गर्ग, पुलिस अधीक्षक
मैंने स्कूल बसों की जांच व जिले में ब्लैक स्पॉट का पता लगाकर उसका समाधान करने के आदेश पीडब्ल्यूडी विभाग को दे दिए हैं। जिले की प्रमुख सभी सड़कों पर सफेद पट्टी खींची जा चुकी है। जिला प्रशासन न केवल खामियों को दूर करेगा बल्कि वाहन चालकों को भी ज्यादा से ज्यादा जागरूक करेगा। इसके लिए अभियान चलाए जा रहे हैं। वाहन चालकों से अपील है कि सुरक्षा संबंधी नियमों की हर हाल में पालना करें और वाहन निर्धारित गति पर ही दौड़ाए। - विजय कुमार सिद्प्पा, जिला उपायुक्त