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आसौधा सिवान की मंजू को बिजली निगम देगा बीस लाख रुपये हर्जाना
Updated Wed, 28 Mar 2018 01:17 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
वर्ष 2009 में एक हादसे में पति के साथ-साथ अपना एक अंग गवाने वाली जिले के गांव आसौधा सिवान की मंजू को बिजली विभाग द्वारा बीस लाख रुपये की अदायगी करनी होगी। यह फैसला झज्जर जिला अतिरिक्त सत्र
न्यायाधीश ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए सुनाया है। अपने फैसले में एडीजे महेश कुमार ने हादसे की मुख्य वजह बिजली विभाग की लापरवाही को माना है।
कोर्ट में दायर याचिका के अनुसार गांव आसौधा सिवान की 22 वर्षीय विवाहिता मंजू पर 29 सितंबर 2009 में सुबह के समय उस समय दुखों का पहाड़ टूटा था। जब मंजू पशुओं के गोबर को एक तसले में भरकर गांव की ही बदरो के पास अपनी एक कुरड़ी में डालने जा रही थी। उस समय उसका 25 वर्षीय पति रामकिशोर पुत्र लक्ष्मण भी शौच आदि से निवृत्त होने के लिए उसके पीछे-पीछे पानी की बोतल हाथ में लेकर जा रहा था।
याचिका के अनुसार जब मंजू बीच रास्ते पहुंची तो खेत की पगडंडी पर जमीन से बिजली के तारों की ऊंचाई करीब साढ़े तीन फुटे होने व यह तारें हाईटेंशन की होने के चलते गोबर से भरा मंजू का तसला बिजली की नंगी तारों को छू गया। मंजू के चपेट में आने की वजह से जब उसके पीछे-पीछे जा रहे उसके पति रामकिशोर ने उसे बचाने का प्रयास किया तो वह भी करंट की चपेट में आ गया। हादसे में पीड़िता मंजू का पति रामकिशोर ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था, लेकिन बाद में जब गंभीर हालत में मंजू को अस्पताल ले जाया गया तो एक हाथ खराब होने व बुरी तरह से झुलसने की वजह से डाक्टरों को उसका एक हाथ काटना पड़ा था।
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पीड़िता की तरफ से यह मामला उसी समय निचली अदालत में डाला गया। लेकिन काफी दिनों तक चले मुकद्दमे के दौरान विभाग का तर्क यही था कि घटनास्थल पर पीड़िता मंजू गैरकानूनी ढंग से लकड़ियां काट रही थी और लकड़ियां गीली होने के चलते यह हादसा हो गया। निचली अदालत ने इस तर्क से सहमत होते हुए विभाग के हक में फैसला सुना दिया था। लेकिन बाद में पीड़िता ने मामले में जिला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में अपील दायर की तो जिला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने पीड़िता की बात को सही मानते हुए विभाग को दोषी माना। अब जिला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश महेश कुमार ने मामले में अपना फैसला सुनाते हुए बिजली विभाग को बीस लाख रुपये हर्जाने के रूप में देने के आदेश दिए हैं।
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झज्जर।
वर्ष 2009 में एक हादसे में पति के साथ-साथ अपना एक अंग गवाने वाली जिले के गांव आसौधा सिवान की मंजू को बिजली विभाग द्वारा बीस लाख रुपये की अदायगी करनी होगी। यह फैसला झज्जर जिला अतिरिक्त सत्र
न्यायाधीश ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए सुनाया है। अपने फैसले में एडीजे महेश कुमार ने हादसे की मुख्य वजह बिजली विभाग की लापरवाही को माना है।
कोर्ट में दायर याचिका के अनुसार गांव आसौधा सिवान की 22 वर्षीय विवाहिता मंजू पर 29 सितंबर 2009 में सुबह के समय उस समय दुखों का पहाड़ टूटा था। जब मंजू पशुओं के गोबर को एक तसले में भरकर गांव की ही बदरो के पास अपनी एक कुरड़ी में डालने जा रही थी। उस समय उसका 25 वर्षीय पति रामकिशोर पुत्र लक्ष्मण भी शौच आदि से निवृत्त होने के लिए उसके पीछे-पीछे पानी की बोतल हाथ में लेकर जा रहा था।
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याचिका के अनुसार जब मंजू बीच रास्ते पहुंची तो खेत की पगडंडी पर जमीन से बिजली के तारों की ऊंचाई करीब साढ़े तीन फुटे होने व यह तारें हाईटेंशन की होने के चलते गोबर से भरा मंजू का तसला बिजली की नंगी तारों को छू गया। मंजू के चपेट में आने की वजह से जब उसके पीछे-पीछे जा रहे उसके पति रामकिशोर ने उसे बचाने का प्रयास किया तो वह भी करंट की चपेट में आ गया। हादसे में पीड़िता मंजू का पति रामकिशोर ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था, लेकिन बाद में जब गंभीर हालत में मंजू को अस्पताल ले जाया गया तो एक हाथ खराब होने व बुरी तरह से झुलसने की वजह से डाक्टरों को उसका एक हाथ काटना पड़ा था।
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पीड़िता की तरफ से यह मामला उसी समय निचली अदालत में डाला गया। लेकिन काफी दिनों तक चले मुकद्दमे के दौरान विभाग का तर्क यही था कि घटनास्थल पर पीड़िता मंजू गैरकानूनी ढंग से लकड़ियां काट रही थी और लकड़ियां गीली होने के चलते यह हादसा हो गया। निचली अदालत ने इस तर्क से सहमत होते हुए विभाग के हक में फैसला सुना दिया था। लेकिन बाद में पीड़िता ने मामले में जिला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में अपील दायर की तो जिला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने पीड़िता की बात को सही मानते हुए विभाग को दोषी माना। अब जिला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश महेश कुमार ने मामले में अपना फैसला सुनाते हुए बिजली विभाग को बीस लाख रुपये हर्जाने के रूप में देने के आदेश दिए हैं।