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थर्मोकोल की प्लेट बनाने की आड़ में बनाए जा रहे थे नकली सिक्के
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बहादुरगढ़। गांव सांखोल के नजदीक गणपति धाम औद्योगिक क्षेत्र में नकली सिक्के बनाने की एक फैक्टरी का भंडाफोड़ हुआ है। यहां थर्मोकोल की प्लेट (पत्तल) बनाने की आड़ में पांच रुपये के सिक्के बनाए जा रहे थे। करीब दो साल से चल रहे इस गोरखधंधे की प्रशासन को भनक तक नहीं लगी और यह गिरोह राजधानी समेत पूरे देश में 30 करोड़ के सिक्के सप्लाई कर गया।
दरअसल, बहादुरगढ़ के सेक्टर छह निवासी नरेश की गणपति धाम क्षेत्र में एक फैक्टरी है। इस फैक्टरी को दिल्ली कराला क्षेत्र निवासी सुभाष ने किराये पर ली। शुरू में तो भंडारे एवं कार्यक्रमों में काम आने वाली थर्मोकोल की प्लेट (पत्तल) बनाने का किया गया। दिखावे के तौर पर तीन-चार मशीनें, काफी कच्चा व तैयार माल रखा गया लेकिन इसकी आड़ में अंदर कुछ और ही चल रहा था। असल में, एक मंजिला इस फैक्टरी के भीतर एक करीब 14 बाई 10 का केबिन बना गया था। इसी केबिन में देश की करंसी को चूना लगाने का खेल खेला जा रहा था।
ऐसे हुआ भंडाफोड़
गिरोह के सदस्य सिक्कों को टोल, होटल अन्य प्रतिष्ठानों पर सप्लाई करता था। खास बात ये कि आरोपी इंडियन गवर्नमेंट मिंट नोएडा का पर्ची लगाकर इन सिक्कों को सप्लाई करते थे ताकि किसी को शक न हो। हरियाणा, दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिक्के सप्लाई किए जाते थे। इसी सिलसिले में यह गिरोह जब फरीदाबाद की तरफ सिक्के सप्लाई करने गया तो फरीदाबाद क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ गया। इनोवा गाड़ी से पांच रुपये के पचास हजार सिक्के यानी ढाई लाख नकली रुपये के सिक्के बरामद हुए। मौके से एक युवती समेत चार आरोपी पकड़े गए। इनकी निशानदेही पर ही बहादुरगढ़ में चल रही फैक्टरी का भंडाफोड़ हुआ।
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युवती थी कमीशन एजेंट
पकड़ी गई एक आरोपी दिल्ली निवासी दीपाली कमीशन एजेंट के तौर पर गिरोह से जुड़ी थी। दीपाली ही होटलों एवं अन्य प्रतिष्ठानों में डील करती थी। सुभाष इस गिरोह का मुखिया है। राजस्थान निवासी राकेश भाटी व यूपी के सीतापुर निवासी नासिर अली सहयोगी के तौर पर जुड़ा थे। इनके अलावा गिरोह से कितने और लोग जुड़े हैं, इस संबंध में पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है।
हमेशा बंद रहता फैक्टरी का गेट
बहादुरगढ़ क्षेत्र में नकली सिक्के बनाने का यह गैर कानूनी काम करीब दो साल से चलता रहा, लेकिन पुलिस एवं प्रशासन को इसकी भनक भी नहीं लगी। इस फैक्टरी के बाहर कोई नेम प्लेट या नंबर आदि नहीं था। आसपास स्थित अन्य फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोगों ने बताया कि अक्सर इस फैक्टरी का गेट बंद रहता था। एकाध बार कोई दिखाई भी देता था तो वह किसी से बोलता नहीं था।
इस तरह से सिक्के होते थे तैयार
केबिन के भीतर चार मशीनों के सहारे ये सिक्के तैयार किए जाते रहे। पहले लोहे की प्लेट काटकर उसे सिक्के का आकार दिया जाता। फिर उसे डाई के जरिये पांच रुपये के सिक्के का आकार देते और उस पर निक्कल पॉलिश कर दिया जाता था। फिलहाल पुलिस ने यहां सिक्के बनाने वाली चार डाई व सात कट्टे सिक्के बरामद किए हैं। जानकारी के अनुसार इन सात में से एक कट्टा तैयार सिक्कों का था, बाकी छह कच्चा माल है। प्रत्येक कट्टे का वजन 25 से 28 किलोग्राम के बीच है। डाई के आसपास भी काफी मात्रा में सिक्के बिखरे पड़े थे। फिलहाल फरीदाबाद पुलिस ने इस फैक्टरी को सील कर दिया है।
बैंक मैनेजर भी खा गए धोखा
फैक्टरी में जो पांच रुपये के सिक्के बनाए जा रहे थे, वे असली सिक्कों के बिलकुल हूबहू नजर आते हैं। साइज, आकार, डिजाइन बिल्कुल वही है। जब यह सिक्का एक बैंक के मैनेजर को दिखाया गया तो वह भी सिक्के की पहचान नहीं कर सका। सच्चाई जानने के बाद उक्त मैनेजर ने भी यही कहा कि सिक्का बिल्कुल असली दिखाई देता है। आम आदमी इसे कैसे पहचान सकता है। इधर, व्हाट्सएप जैसी सोशल साइट्स पर भी दिनभर इस मामले की चर्चा रही।
कहां से आई डाई ?
आरोपी बहादुरगढ़ से पहले यह काम सोनीपत के राई क्षेत्र में करते थे। आरोपियों के अनुसार जब वहां राई में नकली सिक्के बनाने का काम किया करते थे जो वहां पर आसपास के लोगों को इसकी भनक लग गई थी, जिसकी वजह से वहां काम बंद करके बहादुरगढ़ शिफ्ट किया गया था। राई में लगभग 4-5 महीने ही काम किया गया है। वहीं दूसरी तरफ नकली सिक्के बनाने की डाई कहां से आई, ये भी जांच का विषय है। आशंका ये भी जताई जा रही है कि किसी राजनीतिक या बड़े आदमी के सहयोग के बिना यह काम लगातार चलना संभव नहीं है।
फरीदाबाद से क्राइम ब्रांच की टीम आई थी। टीम ने सेक्टर छह थाना के अंतर्गत गणपति धाम औद्योगिक क्षेत्र की एक फैक्टरी में छापेमारी की है। छापेमारी के दौरान नकली सिक्के व सिक्के बनाने वाली डाई बरामद हुई है। मामले में फरीदाबाद क्राइम ब्रांच कार्रवाई कर रही है। बहादुरगढ़ पुलिस उन्हें सहयोग कर रही है।
अजायब सिंह, डीएसपी, बहादुरगढ़।
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दरअसल, बहादुरगढ़ के सेक्टर छह निवासी नरेश की गणपति धाम क्षेत्र में एक फैक्टरी है। इस फैक्टरी को दिल्ली कराला क्षेत्र निवासी सुभाष ने किराये पर ली। शुरू में तो भंडारे एवं कार्यक्रमों में काम आने वाली थर्मोकोल की प्लेट (पत्तल) बनाने का किया गया। दिखावे के तौर पर तीन-चार मशीनें, काफी कच्चा व तैयार माल रखा गया लेकिन इसकी आड़ में अंदर कुछ और ही चल रहा था। असल में, एक मंजिला इस फैक्टरी के भीतर एक करीब 14 बाई 10 का केबिन बना गया था। इसी केबिन में देश की करंसी को चूना लगाने का खेल खेला जा रहा था।
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ऐसे हुआ भंडाफोड़
गिरोह के सदस्य सिक्कों को टोल, होटल अन्य प्रतिष्ठानों पर सप्लाई करता था। खास बात ये कि आरोपी इंडियन गवर्नमेंट मिंट नोएडा का पर्ची लगाकर इन सिक्कों को सप्लाई करते थे ताकि किसी को शक न हो। हरियाणा, दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिक्के सप्लाई किए जाते थे। इसी सिलसिले में यह गिरोह जब फरीदाबाद की तरफ सिक्के सप्लाई करने गया तो फरीदाबाद क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ गया। इनोवा गाड़ी से पांच रुपये के पचास हजार सिक्के यानी ढाई लाख नकली रुपये के सिक्के बरामद हुए। मौके से एक युवती समेत चार आरोपी पकड़े गए। इनकी निशानदेही पर ही बहादुरगढ़ में चल रही फैक्टरी का भंडाफोड़ हुआ।
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युवती थी कमीशन एजेंट
पकड़ी गई एक आरोपी दिल्ली निवासी दीपाली कमीशन एजेंट के तौर पर गिरोह से जुड़ी थी। दीपाली ही होटलों एवं अन्य प्रतिष्ठानों में डील करती थी। सुभाष इस गिरोह का मुखिया है। राजस्थान निवासी राकेश भाटी व यूपी के सीतापुर निवासी नासिर अली सहयोगी के तौर पर जुड़ा थे। इनके अलावा गिरोह से कितने और लोग जुड़े हैं, इस संबंध में पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है।
हमेशा बंद रहता फैक्टरी का गेट
बहादुरगढ़ क्षेत्र में नकली सिक्के बनाने का यह गैर कानूनी काम करीब दो साल से चलता रहा, लेकिन पुलिस एवं प्रशासन को इसकी भनक भी नहीं लगी। इस फैक्टरी के बाहर कोई नेम प्लेट या नंबर आदि नहीं था। आसपास स्थित अन्य फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोगों ने बताया कि अक्सर इस फैक्टरी का गेट बंद रहता था। एकाध बार कोई दिखाई भी देता था तो वह किसी से बोलता नहीं था।
इस तरह से सिक्के होते थे तैयार
केबिन के भीतर चार मशीनों के सहारे ये सिक्के तैयार किए जाते रहे। पहले लोहे की प्लेट काटकर उसे सिक्के का आकार दिया जाता। फिर उसे डाई के जरिये पांच रुपये के सिक्के का आकार देते और उस पर निक्कल पॉलिश कर दिया जाता था। फिलहाल पुलिस ने यहां सिक्के बनाने वाली चार डाई व सात कट्टे सिक्के बरामद किए हैं। जानकारी के अनुसार इन सात में से एक कट्टा तैयार सिक्कों का था, बाकी छह कच्चा माल है। प्रत्येक कट्टे का वजन 25 से 28 किलोग्राम के बीच है। डाई के आसपास भी काफी मात्रा में सिक्के बिखरे पड़े थे। फिलहाल फरीदाबाद पुलिस ने इस फैक्टरी को सील कर दिया है।
बैंक मैनेजर भी खा गए धोखा
फैक्टरी में जो पांच रुपये के सिक्के बनाए जा रहे थे, वे असली सिक्कों के बिलकुल हूबहू नजर आते हैं। साइज, आकार, डिजाइन बिल्कुल वही है। जब यह सिक्का एक बैंक के मैनेजर को दिखाया गया तो वह भी सिक्के की पहचान नहीं कर सका। सच्चाई जानने के बाद उक्त मैनेजर ने भी यही कहा कि सिक्का बिल्कुल असली दिखाई देता है। आम आदमी इसे कैसे पहचान सकता है। इधर, व्हाट्सएप जैसी सोशल साइट्स पर भी दिनभर इस मामले की चर्चा रही।
कहां से आई डाई ?
आरोपी बहादुरगढ़ से पहले यह काम सोनीपत के राई क्षेत्र में करते थे। आरोपियों के अनुसार जब वहां राई में नकली सिक्के बनाने का काम किया करते थे जो वहां पर आसपास के लोगों को इसकी भनक लग गई थी, जिसकी वजह से वहां काम बंद करके बहादुरगढ़ शिफ्ट किया गया था। राई में लगभग 4-5 महीने ही काम किया गया है। वहीं दूसरी तरफ नकली सिक्के बनाने की डाई कहां से आई, ये भी जांच का विषय है। आशंका ये भी जताई जा रही है कि किसी राजनीतिक या बड़े आदमी के सहयोग के बिना यह काम लगातार चलना संभव नहीं है।
फरीदाबाद से क्राइम ब्रांच की टीम आई थी। टीम ने सेक्टर छह थाना के अंतर्गत गणपति धाम औद्योगिक क्षेत्र की एक फैक्टरी में छापेमारी की है। छापेमारी के दौरान नकली सिक्के व सिक्के बनाने वाली डाई बरामद हुई है। मामले में फरीदाबाद क्राइम ब्रांच कार्रवाई कर रही है। बहादुरगढ़ पुलिस उन्हें सहयोग कर रही है।
अजायब सिंह, डीएसपी, बहादुरगढ़।