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सिंचाई विभाग के एक्सईएन को भेजा लीगल नोटिस

Sun, 03 Mar 2019 01:34 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 03 Mar 2019 01:34 AM IST
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सिंचाई विभाग के एक्सईएन को भेजा लीगल नोटिस
सिंचाई परियोजना में देरी पर सिंचाई विभाग के एक्सईएन को भेजा लीगल नोटिस
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बहादुरगढ़ । सिंचाई परियोजना में देरी होने पर किसान संगठनों ने सिंचाई विभाग के एक्सईएन को लीगल नोटिस भिजवाया है। इस पर अधिकारियों को अब जवाब देना होगा। वहीं किसान संगठनों ने अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई है।
जानकारी के अनुसार किसानों ने कई दौर की द्विपक्षीय वार्ता में अधीनस्थ कर्मचारियों की लापरवाही को नजर अंदाज करने का कार्यकारी अभियंता महेंद्रपाल तंवर पर आरोप लगाया है। अब किसानों ने कानूनी कार्रवाई के लिए लीगल नोटिस भेजा है। न्यू सोहटी माइनर की ढोली ड्रेन पर पुल निर्माण और आबादी से लगते ड्रेन पटरी पर अतिक्रमण हटाने संबंधित मामले की प्रगति रिपोर्ट अब सिंचाई विभाग को सिविल कोर्ट खरखोदा को प्रेषित करनी होगी। संबंधित अधिकारी को 15 दिन में चेंबर सुनवाई के लिए व्यक्तिगत पेशी पर पहुंचना होगा। इससे पहले किसान सिंचाई विभाग द्वारा लापरवाही बरते जाने पर 22 फरवरी को दस्तावेज फाइल समेत लिखित शिकायत दे चुके हैं। इस संबंध में तत्कालीन एसडीएम ने शिकायत से एक दिन पहले ही रिपोर्ट तलब कर ली थी। किसानों ने एसडीएम कार्यालय में ज्ञापनों को आगे प्रेषित नहीं करने और शिकायतों के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करने पर संबंधित कर्मचारियों की एसडीएम से शिकायत करने का फैसला भी लिया है।
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हर क्षेत्र में टेल तक पानी पहुंचाने की राज्य सरकार की सिंचाई नीति को असफल करते हुए 10 दिनों के बाद भी सिंचाई विभाग ने लंबित परियोजनाओं पर संज्ञान नहीं लिया है। अधीनस्थ दोषी कर्मचारियों पर भी कोई विभागीय कार्रवाई नहीं करके प्रशासनिक विफलता जाहिर की है। पीड़ित किसान नेता हंसराज राणा, प्रदीप धनखड़, शमशेर सिंह आदि ने भूमि बचाओ संघर्ष समिति के जरिये संयुक्त रूप से मुख्यमंत्री को सीएम विंडो के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई है। किसानों ने नहरी परियोजनाओं पर आगामी 15 दिनों में अमल नहीं होने की सूरत में सिंचाई विभाग कार्यालय के घेराव की चेतावनी भी दी है। साथ ही भारतीय किसान यूनियन व अन्य सहयोगी संगठनों के साथ मीटिंग कर कार्य योजना को जन आंदोलन में तब्दील करने का फैसला लिया है। किसानों का कहना है कि पिछले दो दशकों से सिंचाई विभाग की लापरवाही के कारण किसानों की 1508 एकड़ से ज्यादा उपजाऊ भूमि बंजर होने के कगार पर है।
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