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जब निर्दलीय उम्मीदवार के सामने फीकी रह गई थी कांग्रेस लहर

Sat, 05 Oct 2019 02:42 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 05 Oct 2019 02:42 AM IST
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congress lost to independent candidate in the election
2005 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की लहर ही नहीं आंधी चली लेकिन बादली सीट से कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस उम्मीदवार चत्तर सिंह पहलवान को करारी हाल झेलनी पड़ी और आजाद उम्मीदवार के तौर पर नरेश शर्मा जीतकर विधानसभा पहुंचे। नरेश शर्मा के प्रति सहानुभूति ने 23 सालों से इनेलो के गढ़ में सेंध लगाई।
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1982 में हुए हरियाणा विधानसभा के चुनाव में बादली हलके की जनता ने चौधरी धीरपाल सिंह पर विश्वास जताया तो लगातार 23 सालों में तक कोई सेंध नहीं लगा सका। लोकसभा चुनाव में हलके की जनता भले ही कांग्रेस के भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर मेहरबान रही लेकिन विधानसभा चुनाव में धीरपाल सिंह के प्रति लोगों को विश्वास कम नहीं हुआ।
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इस तरह निर्दलीय उम्मीदवार ने जीता चुनावी मैदान : 2005 के कांग्रेस की लहर के साथ विधानसभा चुनाव की बारी आई तो बादली से कांग्रेस ने चत्तर सिंह पहलवान को मैदान में उतार दिया। लोगों में टिकट को लेकर नाराजगी रही और 2000 में कांग्रेस की टिकट पर हार का सामना करने वाले नरेश शर्मा ने चत्तर सिंह के सामने निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया। लोगों में नरेश शर्मा के प्रति सहानुभूति बन गई और 2622 वोटों से जीतकर विधानसभा में पहुंचाने का काम किया। नरेश को कुल 28838 वोट मिले जबकि कांग्रेस के चत्तर सिंह को 28216 वोट ही मिल सके। पांच बार लगातार विधायक एवं मंत्री रहे चौधरी धीरपाल सिंह ने चुनाव मैदान नहीं उतरे थे जिससे मुकाबला कांग्रेस और निर्दलीय के बीच में फंस गया।
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गुलिया की अनदेखी पड़ी थी भारी : 2005 के चुनाव में कांग्रेस का गुलिया की अनदेखी का परिणाम भुगतना पड़ा था। लोगों ने कांग्रेस की टिकट वितरण पर सवाल खड़े किए थे। हालांकि उस समय बादली हलके में गुलिया और दलाल खाप का महत्व होता था लेकिन नए परिसिमीन में हलके से दलाल खाप के गांव हट गए हैं।

बुरी तरह हुए थे घायल : जब 2000 के विधानसभा चुनाव की मतगणना बहादुरगढ़ में चल रही थी तो किसी बात को लेकर कांग्रेस उम्मीदवार नरेश शर्मा और पुलिस के बीच झड़प हो गई। उस समय विवाद के बढ़ने पर नरेश शर्मा को बुरी तरह से पीटा गया था। नरेश की पिटाई से क्षेत्र में सहानुभूति बन गई और 2005 में हलके की जनता ने नरेश को निर्दलीय जीताकर विधानसभा में भेजने का काम कर दिया।
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