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Jhajjar-Bahadurgarh News: श्रीमद् वाल्मीकि रामायण प्रतियोगिता का समापन
Sun, 23 Aug 2026 04:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sun, 23 Aug 2026 04:56 PM IST
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फोटो-51: बहादुरगढ़ में परीक्षा देते बच्चे। स्रोत फाउंडेशन
बहादुरगढ़। श्री हरि सेवा दल फाउंडेशन की ओर से आयोजित श्रीमद् वाल्मीकि रामायण प्रतियोगिता का रविवार को सब्जी मंडी के पास स्थित भगवान श्री परशुराम भवन में समापन हुआ। प्रतियोगिता के लिए प्रतिभागियों का पंजीकरण ऑनलाइन माध्यम से किया गया था। सुबह 10 बजे शुरू हुई प्रतियोगिता में क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से आए बच्चों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सनातन रक्षा दल के प्रमुख अश्विनी कुमार रहे। उन्होंने श्रीमद् वाल्मीकि रामायण के महत्व और भारतीय संस्कृति के निर्माण एवं संरक्षण में इसके योगदान पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि के रूप में जनजागरण समिति के अध्यक्ष राजकुमार अरोड़ा भी उपस्थित रहे। प्रतियोगिता में कुल 30 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों को दो आयु वर्गों में विभाजित किया गया, जिसमें 9 से 13 वर्ष तथा 13 से 17 वर्ष के बच्चे शामिल रहे। प्रतियोगिता के परीक्षक मंडल में प्रिंस गंभीर और नीरू कक्कड़ ने अपनी भूमिका निभाई।
फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रतियोगिता का उद्देश्य नई पीढ़ी में श्रीमद् वाल्मीकि रामायण के प्रति रुचि पैदा करना तथा भारतीय सांस्कृतिक एवं नैतिक मूल्यों से बच्चों को जोड़ना है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों में धार्मिक ग्रंथों के प्रति जिज्ञासा और संस्कारों के प्रति जागरूकता बढ़ती है।
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कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, परीक्षकों, प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया। आयोजन को सफल बनाने में प्रिंस गंभीर, प्रवीण, नीरू कक्कड़ और कबीर रामावत का विशेष योगदान रहा।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सनातन रक्षा दल के प्रमुख अश्विनी कुमार रहे। उन्होंने श्रीमद् वाल्मीकि रामायण के महत्व और भारतीय संस्कृति के निर्माण एवं संरक्षण में इसके योगदान पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि के रूप में जनजागरण समिति के अध्यक्ष राजकुमार अरोड़ा भी उपस्थित रहे। प्रतियोगिता में कुल 30 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों को दो आयु वर्गों में विभाजित किया गया, जिसमें 9 से 13 वर्ष तथा 13 से 17 वर्ष के बच्चे शामिल रहे। प्रतियोगिता के परीक्षक मंडल में प्रिंस गंभीर और नीरू कक्कड़ ने अपनी भूमिका निभाई।
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फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रतियोगिता का उद्देश्य नई पीढ़ी में श्रीमद् वाल्मीकि रामायण के प्रति रुचि पैदा करना तथा भारतीय सांस्कृतिक एवं नैतिक मूल्यों से बच्चों को जोड़ना है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों में धार्मिक ग्रंथों के प्रति जिज्ञासा और संस्कारों के प्रति जागरूकता बढ़ती है।
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कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, परीक्षकों, प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया। आयोजन को सफल बनाने में प्रिंस गंभीर, प्रवीण, नीरू कक्कड़ और कबीर रामावत का विशेष योगदान रहा।