{"_id":"57e565724f1c1b3276a82189","slug":"civil-hospital-s-ambulance-ambulance-is-on-repair-patients-faced-problems-bahadurgarh","type":"story","status":"publish","title_hn":"नागरिक अस्पताल की दोनों एंबुलेंस मरम्मत पर, गर्भवती महिलाओं को परेशानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नागरिक अस्पताल की दोनों एंबुलेंस मरम्मत पर, गर्भवती महिलाओं को परेशानी
ब्यूरो_अमर उजाला_झज्जर
Updated Fri, 23 Sep 2016 10:55 PM IST
विज्ञापन
एंबुलेंस
- फोटो : Demo Pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नागरिक अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में पिछले कई दिनों से एंबुलेंस सेवा की कमी खल रही है। मरीजों को आपातकालीन सेवा के लिए जहां निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा, वहीं सरकारी एंबुलेंस के लिए घंटों तक इंतजार करना होता है। बिना एंबुलेंस के कई बार ट्रॉमा सेंटर को बादली और छारा सीएचसी से सहायता ली जा रही है, जिससे मरीजों की जिंदगी दांव पर लगी रहती है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से भले ही सुविधाओं का दम भरा जा रहा हो, लेकिन यहां पर जीवनरक्षक सेवाओं में कारगर साबित होने वाली एंबुलेंस सेवाएं भी लचर हैं। अस्पताल में दो एंबुलेंस सेवाएं देती थीं, लेकिन पिछले कई दिनों से दोनों गाड़ियों को काम करने के लिए झज्जर ले जाया गया था, जोकि कई दिन बीत जाने के बाद भी मेंटेनेंस कराकर वापस नहीं भेजी गई हैं। दोनों गाड़ियों में एक टाटा सूमो और दूसरी ईको गाड़ी है। दोनों ही दयनीय हालत में होने के चलते मरम्मत के लिए झज्जर भेजी गई थीं। एंबुलेंस के न होने का सीधा असर रोगियों को भुगतना पड़ रहा है।
बहादुरगढ़ के नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन रोगियों को रेफर किया जाता है तो स्वास्थ्य विभाग की योजना के अनुसार गर्भवती महिलाओं को घर से लाने और प्रसूति के बाद घर तक छोड़ने की योजना भी बाधित हो रही है। ट्रॉमा सेंटर में प्रतिदिन से दुर्घटनाग्रस्त हुए गंभीर रोगियों को रोहतक पीजीआई रेफर किया जाता है। गर्भवती महिलाएं प्रसव पीड़ा के दौरान एंबुलेंस सुविधा के लिए 102 नंबर डायल किया जाता है, लेकिन उन्हें एंबुलेंस के अभाव में सरकारी सुविधा नहीं मिल पाती। न तो प्रसव से पहले और ही न ही प्रसव के बाद उन्हें सरकारी लाभ मिल रहा है।
विज्ञापन
ग्रामीण सेवाएं बाधित
कई बार बादली और छारा से एंबुलेंस को बहादुरगढ़ मंगवा लिया जाता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र की सुविधाएं प्रभावित हो जाती हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में सुविधाओं की ज्यादा आवश्यकता होती है। अधिकतर गरीब और मजदूर तबका एंबुलेंस की सेवाओं पर निर्भर होता है, लेकिन उन्हें किसी दुर्घटना और प्रसव के दौरान घंटों एंबुलेंस का इंतजार करना होता है, क्योंकि गाड़ी को बहादुरगढ़ भेज दिया जाता है।
एएलएस भी बाधित
नागरिक अस्पताल में आधुनिक मशीनों से लैस गाड़ी गाड़ी की सुविधा भी बंद हो गई है। फरवरी में हुए आरक्षण मामले के दौरान गाड़ी को झज्जर मंगवाया गया था। इसके बाद एएलएस गाड़ी को दोबारा बहादुरगढ़ नहीं भेजा गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग से सटा होने के कारण यहां दुर्घटनाएं होती रहती हैं। ऐसे में पीड़ित को एएलएस में रोहतक पीजीआई रेफर करने की जरूरत महसूस होती है, मगर यह गाड़ी उपलब्ध न होने के कारण दिक्कतें हो रही हैं।
प्रसूता बोली
नागरिक अस्पताल में प्रसव के बाद एक प्रसूता आशा ने बताया कि प्रसव से पहले उन्होंने जब एंबुलेंस के लिए मदद मांगी तो कई घंटे के इंतजार के बाद भी गाड़ी नहीं भेजी गई। बार-बार फोन करने पर गाड़ी नहीं होने की बात कही गई। ऐसे ही जब वह प्रसव के बाद अस्पताल से छुट्टी मिली तो उन्हें एंबुलेंस मुहैया नहीं करवाई गई, जिसके चलते वह नवजात बच्चे के साथ थ्री व्हीलर का सहारा लेकर घर पहुंची।
अधिकारी बोले
उधर, सीएमओ रमेश धनखड़ ने कहा कि दो एंबुलेंस के लिए रजिस्ट्रेशन कराया गया है। जल्द ही अस्पताल में व्यवस्था कर दी जाएगी। जिसके बाद लोगों को परेशानी बिलकुल नहीं होगी।
विज्ञापन
स्वास्थ्य विभाग की ओर से भले ही सुविधाओं का दम भरा जा रहा हो, लेकिन यहां पर जीवनरक्षक सेवाओं में कारगर साबित होने वाली एंबुलेंस सेवाएं भी लचर हैं। अस्पताल में दो एंबुलेंस सेवाएं देती थीं, लेकिन पिछले कई दिनों से दोनों गाड़ियों को काम करने के लिए झज्जर ले जाया गया था, जोकि कई दिन बीत जाने के बाद भी मेंटेनेंस कराकर वापस नहीं भेजी गई हैं। दोनों गाड़ियों में एक टाटा सूमो और दूसरी ईको गाड़ी है। दोनों ही दयनीय हालत में होने के चलते मरम्मत के लिए झज्जर भेजी गई थीं। एंबुलेंस के न होने का सीधा असर रोगियों को भुगतना पड़ रहा है।
विज्ञापन
बहादुरगढ़ के नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन रोगियों को रेफर किया जाता है तो स्वास्थ्य विभाग की योजना के अनुसार गर्भवती महिलाओं को घर से लाने और प्रसूति के बाद घर तक छोड़ने की योजना भी बाधित हो रही है। ट्रॉमा सेंटर में प्रतिदिन से दुर्घटनाग्रस्त हुए गंभीर रोगियों को रोहतक पीजीआई रेफर किया जाता है। गर्भवती महिलाएं प्रसव पीड़ा के दौरान एंबुलेंस सुविधा के लिए 102 नंबर डायल किया जाता है, लेकिन उन्हें एंबुलेंस के अभाव में सरकारी सुविधा नहीं मिल पाती। न तो प्रसव से पहले और ही न ही प्रसव के बाद उन्हें सरकारी लाभ मिल रहा है।
विज्ञापन
ग्रामीण सेवाएं बाधित
कई बार बादली और छारा से एंबुलेंस को बहादुरगढ़ मंगवा लिया जाता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र की सुविधाएं प्रभावित हो जाती हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में सुविधाओं की ज्यादा आवश्यकता होती है। अधिकतर गरीब और मजदूर तबका एंबुलेंस की सेवाओं पर निर्भर होता है, लेकिन उन्हें किसी दुर्घटना और प्रसव के दौरान घंटों एंबुलेंस का इंतजार करना होता है, क्योंकि गाड़ी को बहादुरगढ़ भेज दिया जाता है।
एएलएस भी बाधित
नागरिक अस्पताल में आधुनिक मशीनों से लैस गाड़ी गाड़ी की सुविधा भी बंद हो गई है। फरवरी में हुए आरक्षण मामले के दौरान गाड़ी को झज्जर मंगवाया गया था। इसके बाद एएलएस गाड़ी को दोबारा बहादुरगढ़ नहीं भेजा गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग से सटा होने के कारण यहां दुर्घटनाएं होती रहती हैं। ऐसे में पीड़ित को एएलएस में रोहतक पीजीआई रेफर करने की जरूरत महसूस होती है, मगर यह गाड़ी उपलब्ध न होने के कारण दिक्कतें हो रही हैं।
प्रसूता बोली
नागरिक अस्पताल में प्रसव के बाद एक प्रसूता आशा ने बताया कि प्रसव से पहले उन्होंने जब एंबुलेंस के लिए मदद मांगी तो कई घंटे के इंतजार के बाद भी गाड़ी नहीं भेजी गई। बार-बार फोन करने पर गाड़ी नहीं होने की बात कही गई। ऐसे ही जब वह प्रसव के बाद अस्पताल से छुट्टी मिली तो उन्हें एंबुलेंस मुहैया नहीं करवाई गई, जिसके चलते वह नवजात बच्चे के साथ थ्री व्हीलर का सहारा लेकर घर पहुंची।
अधिकारी बोले
उधर, सीएमओ रमेश धनखड़ ने कहा कि दो एंबुलेंस के लिए रजिस्ट्रेशन कराया गया है। जल्द ही अस्पताल में व्यवस्था कर दी जाएगी। जिसके बाद लोगों को परेशानी बिलकुल नहीं होगी।