लोहड़ी के अवसर पर झज्जर के महर्षि दयानंद शिक्षण केंद्र में वैदिक यज्ञ, भजन, प्रवचन व अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। यज्ञ के ब्रह्मा रिटायर्ड फ्लाइंग ऑफिसर महावीर सिंह आर्य रहे। जबकि मुख्य वक्ता के रूप में सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. एसएस यादव शामिल हुए। मुख्य यजमान माम कौर एवं रतिराम आर्य रहे। यज्ञ समिति झज्जर द्वारा 40 विद्यार्थियों को वस्त्रों से सम्मानित किया गया। महावीर सिंह आर्य ने घर में सुख शांति के लिए पांच महायज्ञ का पालन करने की बात कही और कहा कि निराकार ईश्वर की उपासना करना ब्रह्म यज्ञ है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की शुद्धि के लिए हवन करना देव यज्ञ और जीवित माता-पिता, बुजुर्गों का सम्मान व सेवा करना पितृ यज्ञ है। पशु-पक्षी, विकलांग, अनाथ, विधवा आदि की मदद करना देव यज्ञ कहलाता है। महाबीर ने कहा कि सदाचारी विद्वान द्वारा दिए गए उपदेश को ग्रहण करना अतिथि यज्ञ है। डॉ. एचएस यादव ने कहा कि माता-पिता की असली संपदा संतान होती है। इसलिए हम बच्चों को अच्छे संस्कार देखकर ही उनके भविष्य को उज्ज्वल बना सकते हैं। डॉ. यादव ने कहा कि माता-पिता अपने आचरण से संतानों के अंदर अच्छे संस्कार आसानी से डाल सकते हैं। सेवानिवृत्त प्राध्यापक द्वारका दास ने आर्यों के अंदर कथनी व करनी में एकता की बात कही और आर्य समाज के सिद्धांतों व शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। लाला प्रकाशवीर आर्य ने आर्य समाज के सत्संग में बढ़-चढ़कर भाग लेने के प्रति जागरूक किया। पंडित भगवान आर्य, भगवान सिंह, दलीप सिंह आर्य, मास्टर पन सिंह ने महर्षि दयानंद संबंधी भजन पेश किए तो अध्यापिका सुमित्रा ने ईश्वर भक्ति का भजन सुनाया। बालक अनमोल ने विद्यार्थी की सफलता में मन की एकता को रेखांकित किया। मंच संचालन मुकेश आर्य ने किया और अतिथियों का आभार सुभाष आर्य ने व्यक्त किया। जय प्रकाश राठी, ओम प्रकाश यादव, कृष्ण शास्त्री, उधम सिंह, कांता, सुरेश, सेवा, सोनिया, पुष्पा आदि कार्यक्रम में उपस्थित रहे।