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ड्रेन ओवरफ्लो से नष्ट हुई फसलों का मिला मुआवजा
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ड्रेन व नहर ओवरफ्लो होने से हर साल किसानों की फसल खराब हो जाती है। ऐसे में किसानों की फसल तो बर्बाद हो जाती है लेकिन उन्हें अब तक मुआवजा भी नहीं मिलता था। लेकिन अब प्रदेश सरकार ने ऐसे किसानों के लिए भी पॉलिसी बना दी है। नई नीति के तहत ऐसे किसानों को मुआवजा दिया जाएगा, जिनकी फसल का 25 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है। झज्जर जिले में पहली बार ड्रेन ओवरफ्लो होने से खराब हुई फसल का मुआवजा शुक्रवार को सुरेहती गांव में मंत्री ओपी धनखड़ द्वारा सुरहेती, मातनहेल व मूंदसा गांवों के किसानों को दिया गया। नई नीति के तहत अब इस मामले में भी जोखिम फ्री रहेंगे।
जलभराव का नहीं था प्रावधान
सामान्य तौर पर प्राकृतिक आपदा के लिए राजस्व विभाग ही फसल खराबे की गिरदावरी रिपोर्ट तैयार कर किसानों को राहत देने के लिए मुआवजा वितरित करता है। जलभराव जैसी आपदा से खराब हुई फसलों के मुआवजे का प्रावधान नहीं था। हमने किसान हित में नई नीति बनाई और आज सुरहेती में किसानों को नई नीति के तहत मुआवजे के चेक सौंपकर अमलीजामा भी पहना दिया। प्रदेश के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने शुक्रवार को बादली विधानसभा क्षेत्र के गांव सुरेहती में प्रभावित किसानों को चेक सौंपते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि इससे पहले कहीं पर भी ऐसा नहीं हुआ कि सिंचाई विभाग किसानों को जलभराव से खराब हुई फसलों को मुआवजा देता हो।
तीनों गांवों को इतनी मिली मुआवजा राशि
कृषि मंत्री धनखड़ ने सुरहेती में मातनहेल गांव के प्रभावित किसानों के लिए 40 लाख 88 हजार 638 रुपये, मूंदसा गांव के किसानों के लिए एक लाख 65 हजार 600 रुपये और सुरहेती के प्रभावित किसानों के लिए 23 लाख 36 हजार 040 रुपये के चेक सौंपे। प्रभावित किसानों ने कहा कि कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने उनके नुकसान की भरपाई करवाने के लिए सरकार से नई नीति तक बनवा दी।
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मंत्री ने स्वयं तैयार किया नई नीति का ड्राफ्ट : चीफ इंजीनियर
सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर सतबीर कादियान ने बताया कि उन्हें कृषि मंत्री धनखड़ ने कहा कि किसानों का नुकसान हुआ है मुआवजा मिलना चाहिए देखो कोई नीति जरूर होगी। हमने चेक कर फिर बताया सर ऐसी नीति नहीं है। कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ फील्ड में थे। उन्होंने थोड़ी ही देर में कहा कि अपना मोबाइल चेक करो, मैंने आपदा पर नई नीति बनाकर भेज दी है, सरकार से मंजूरी के लिए अब इसकी फाइल चलाओ। उसके बाद मुआवजा जारी हो गया है।
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जलभराव का नहीं था प्रावधान
सामान्य तौर पर प्राकृतिक आपदा के लिए राजस्व विभाग ही फसल खराबे की गिरदावरी रिपोर्ट तैयार कर किसानों को राहत देने के लिए मुआवजा वितरित करता है। जलभराव जैसी आपदा से खराब हुई फसलों के मुआवजे का प्रावधान नहीं था। हमने किसान हित में नई नीति बनाई और आज सुरहेती में किसानों को नई नीति के तहत मुआवजे के चेक सौंपकर अमलीजामा भी पहना दिया। प्रदेश के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने शुक्रवार को बादली विधानसभा क्षेत्र के गांव सुरेहती में प्रभावित किसानों को चेक सौंपते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि इससे पहले कहीं पर भी ऐसा नहीं हुआ कि सिंचाई विभाग किसानों को जलभराव से खराब हुई फसलों को मुआवजा देता हो।
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तीनों गांवों को इतनी मिली मुआवजा राशि
कृषि मंत्री धनखड़ ने सुरहेती में मातनहेल गांव के प्रभावित किसानों के लिए 40 लाख 88 हजार 638 रुपये, मूंदसा गांव के किसानों के लिए एक लाख 65 हजार 600 रुपये और सुरहेती के प्रभावित किसानों के लिए 23 लाख 36 हजार 040 रुपये के चेक सौंपे। प्रभावित किसानों ने कहा कि कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने उनके नुकसान की भरपाई करवाने के लिए सरकार से नई नीति तक बनवा दी।
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मंत्री ने स्वयं तैयार किया नई नीति का ड्राफ्ट : चीफ इंजीनियर
सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर सतबीर कादियान ने बताया कि उन्हें कृषि मंत्री धनखड़ ने कहा कि किसानों का नुकसान हुआ है मुआवजा मिलना चाहिए देखो कोई नीति जरूर होगी। हमने चेक कर फिर बताया सर ऐसी नीति नहीं है। कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ फील्ड में थे। उन्होंने थोड़ी ही देर में कहा कि अपना मोबाइल चेक करो, मैंने आपदा पर नई नीति बनाकर भेज दी है, सरकार से मंजूरी के लिए अब इसकी फाइल चलाओ। उसके बाद मुआवजा जारी हो गया है।