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मातन माइनर खुली छोड़ने से 500 एकड़ धान की फसल डूबी
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उपमंडल के गांव छुड़ानी के बीच से गुजर रही मातन माइनर को खुला छोड़ने से यहां की सैकड़ों एकड़ फसल पानी में डूब गई है। ऐसा इस बार नहीं बल्कि हर वर्ष यहां के किसानों को इस तरह की समस्या से जूझना पड़ता है। हर बार किसान इस समस्या से छुटकारे के लिए नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाते हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं होती। किसानों का कहना है कि मातन माइनर से आए पानी से लगभग 500 एकड़ में खड़ी धान की फसल बर्बाद हो गई है। गांव के डहरी क्षेत्र में बाढ़ के हालात है। छुड़ानी के किसान ओमप्रकाश, सुनील, अनिल, श्रीओम, अजीत सिंह का कहना है कि सिंचाई विभाग ने गांव की सीमा पर मातन माइनर को खुला छोड़ रखा है। मातन माइनर से आया पानी किसानों के खेतों में जमा हो गया है। पिछले 37 सालों से किसान बाढ़ के इस दंश को झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ना तो सिंचाई विभाग कोई समाधान कर रहा है और ना ही नेता किसानों की समस्या सुनने को तैयार हैं। हर बार किसानों को इस तरह की समस्या झेलनी पड़ती है। खेतों के खड़े बाढ़ के पानी को निकालना बेहद मुश्किल से इससे किसानों के अरमान भी डूब गए हैं। वहीं, सिंचाई विभाग ने खेतों से पानी निकालने के लिए दो मोटर और पंप सेट भी लगाए हैं लेकिन न तो मोटर चलती है और न ही पानी निकलता है क्योंकि बिजली का कनेक्शन नहीं हो पाया है।
37 वर्ष पूर्व हुआ था मातन माइनर का निर्माण
करीब 37 वर्ष पूर्व रोहद, भापड़ौदा, खरहर, मातन सहित कई गांव से बारिश के पानी निकालने के लिए मातन माइनर का निर्माण किया गया था। उस वक्त मातन माइनर को छुड़ानी गांव के खेतों से होते हुए केसीबी ड्रेन में जोड़ना था, लेकिन सिंचाई विभाग ने उस काम को पूरा नहीं किया और छुड़ानी की सीमा पर मातन लिंक माइनर को खुला छोड़ दिया। किसानों ने इस बार सिंचाई विभाग को शपथ पत्र देकर कहा था कि जमीन ले लो मगर अधूरी माइनर का निर्माण पूरा करा दो, फिर भी सिंचाई विभाग की ओर से माइनर का निर्माण पूरा नहीं कराया गया।
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37 वर्ष पूर्व हुआ था मातन माइनर का निर्माण
करीब 37 वर्ष पूर्व रोहद, भापड़ौदा, खरहर, मातन सहित कई गांव से बारिश के पानी निकालने के लिए मातन माइनर का निर्माण किया गया था। उस वक्त मातन माइनर को छुड़ानी गांव के खेतों से होते हुए केसीबी ड्रेन में जोड़ना था, लेकिन सिंचाई विभाग ने उस काम को पूरा नहीं किया और छुड़ानी की सीमा पर मातन लिंक माइनर को खुला छोड़ दिया। किसानों ने इस बार सिंचाई विभाग को शपथ पत्र देकर कहा था कि जमीन ले लो मगर अधूरी माइनर का निर्माण पूरा करा दो, फिर भी सिंचाई विभाग की ओर से माइनर का निर्माण पूरा नहीं कराया गया।
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