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Jhajjar-Bahadurgarh News: शिशु संरक्षण दिवस...खानपान, एनीमिया के कारण प्री मैच्योर हो रहे बच्चे, अब तक 62 की मौत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 07 Nov 2025 02:14 AM IST
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Child Protection Day... Children becoming premature due to diet and anemia, 62 deaths so far
06jjrp30- सिविल अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे मरीज लैब के बाहर इंतजार करते हुए। संवाद - फोटो : agra
झज्जर। अच्छे खानपान की कमी व महिलाओं में एनीमिया की समस्या के कारण बच्चे प्री-मैच्योर पैदा हो रहे हैं। इस कारण कई बार पैदा होने से 28 दिन के भीतर ही बच्चे की मौत हो जाती है। मौतों को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग कदम उठा रहा है। इसके बावजूद ऐसे केस लगातार आते हैं।
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पिछले साल जिले में शिशु मृत्यु दर में कमी आई है। आंकड़ों के अनुसार पिछले साल जिले में नवजात बच्चों यानी 28 दिन के बच्चों की मृत्यु दर 16 प्रतिशत थी जो इस साल अब तक 10.53 प्रतिशत है और 5.47 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
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वहीं, शिशु यानी 29 से 365 दिन के बच्चों की मृत्यु दर पिछले साल 21.6 प्रतिशत थी जो इस साल घटकर 15.8 प्रतिशत रह गई है। इसमें भी 5.8 प्रतिशत की कमी आई है। इसके अलावा एक साल से पांच बच्चों की मृत्यु दर में इस साल 3.4 प्रतिशत की कमी आई है। पिछले साल यह 22 प्रतिशत था जबकि इस साल 18.60 प्रतिशत रह गया है।
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28 दिन के बच्चों की मौत की संख्या रहती है सबसे ज्यादा
इस साल अब तक जिले में 5883 की लाइव बर्थ हुई है। इसमें 28 दिन के भीतर 62 नवजात की मौत हुई है। इसके अलावा 2 से एक साल तक के बच्चों की संख्या 31 है। इसी प्रकार से एक से पांच साल के 17 बच्चों की मौत अब तक हो चुकी है।

चिकित्सक बोलें- आठवें महीने में ध्यान रखें गर्भवती
उप सिविल सर्जन डॉ. बसंत दूबे ने बताया कि अच्छे खानपान की कमी, वर्कलोड, वजन का काम करने के कारण प्री मैच्योर डिलीवरी ज्यादा हो रही हैं। इसलिए गर्भवती महिलाओं को अपने खानपान का ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। इसके अलावा खून की कमी भी नहीं होने देनी चाहिए जिससे बच्चे के विकास पर भी असर पड़ता है।
50 से 70 प्रतिशत महिलाओं में खून की कमी मिलती है। आठवें माह में गर्भवती महिलाओं को वजन वाले काम नहीं करने चाहिए। इसके अलावा उनको बाइक, गाड़ी में ज्यादा नहीं घूमना चाहिए। टीकाकरण का पूरा ध्यान रखना चाहिए।


दूध पिलाने के बाद डकार न दिलाना भी मौत का कारण
चिकित्सक डॉ. बसंत दूबे ने बताया कि जन्म के तुरंत बाद केवल मां का दूध ही पिलाना चाहिए। 6 माह तक केवल मां का दूध ही बच्चे को पिलाया जाए। साथ ही दूध पिलाने के बाद बच्चे को डकार अवश्य दिलानी चाहिए। कई बार यह लापरवाही हो जाती है कि बिना डकार दिलाए ही बच्चों को सुला दिया जाता है। इस कारण दूध फेफड़ों में रह जाता है और कई बार बच्चे की मौत तक हो जाती है। यदि माताएं कामकाजी है तो अपना दूध किसी स्टील के बर्तन में निकालकर रखकर जा सकती है। वह बाद में बच्चे को पिलाया जा सकता है।
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