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Jhajjar-Bahadurgarh News: मां भीमेश्वरी देवी मंदिर में गूंजे जयकारे
Tue, 27 Jun 2023 12:57 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Tue, 27 Jun 2023 12:57 AM IST
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बेरी। आषाढ़ माह के गुप्त नवरात्र के अष्टमी के दिन बेरी स्थित मां भीमेश्वरी मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ा। अलसुबह से ही लंबी कतारों में लगकर श्रद्धालुओं ने मां भीमेश्वरी के दर्शन किए और परिवार की खुशहाली की कामना की।
सुबह करीब पांच बजे मां भीमेश्वरी की प्रतिमा को भीतर वाले मंदिर से बाहर वाले भवन लाया गया जहां वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मां का स्नान हुआ और भक्तों ने मंगला आरती की। मां भीमेश्वरी के दर्शनों का यह सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। नवविवाहित जोड़ों ने गठजोड़े की जात लगाकर और नवजात बच्चों के बाल उतरवाकर पूजा की। पुजारी ने मंत्रोच्चारण के साथ स्नान करवाया उसके बाद मंगला आरती करके मां के दर्शन भक्तों के लिए खोल दिए गए। उसके बाद मां के दर्शनों का सिलसिला दोपहर तक जारी रहा। धागा बांधकर मांगी मन्नतें नवविवाहित जोड़ों ने गठजोड़े की जात, बच्चों के बाल उतरवाकर भक्तों ने पूजा अर्चना की। महिलाओं ने मां के मंदिर में पीपल के पेड़ पर धागा बांधकर मन्नत मागी। मां के दरबार में अष्टमी की भीड़ को देखते हुए पुलिस द्वारा कड़े इंतजाम किए गए थे। मां के दरबार में सुबह से ही पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगा दी गई। मंदिर के पुजारी कुलदीप वशिष्ठ का कहना है कि हर माह अष्टमी के दिन मां के दरबार में भक्त दर्शन करने के लिए आते है।
प्राीचन मंदिर का इतिहास
काफी प्राचीन है मां भीमेश्वरी देवी मंदिर का इतिहास मां भीमेवरी देवी मंदिर का इतिहास अति प्राचीन है। विद्वानों के अनुसार मां की मूर्ति को पांडु पुत्र भीम पाकिस्तान के हिंगजाल पर्वत से लेकर आए थे। भीम ने मां को अपने साथ चलने के लिए कहा तो मां ने पांडु पुत्र से कहा कि मैं तुम्हारे साथ तो चलूंगी, लेकिन तुम मुझे अपनी गोद में रखोगे। रास्ते में जहां भी उतारोगे मैं उस स्थान से आगे नहीं जाऊंगी। भीम ने मां का कहना माना और गोद में उठाकर युद्ध भूमि की तरफ चल पड़ा। जब भीम मां को लेकर बेरी कस्बे से गुजर रहा था तो भीम को लघुशंका के लिए उन्हें अपने कंधे से उतार दिया। बाद में माता को वापस चलने के लिए अपनी गोद में उठाने लगा तो वह नहीं उठ पाई। तभी मां भीमेश्वरी की यहां स्थापना हुई और महाभारत के युद्ध के बाद यहां मंदिर की स्थापना कर दी गई।
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वर्जन:
हर माह मां भीमेश्वरी देवी मंदिर में अष्टमी के भक्तों की भीड़ उमड़ती है और कई राज्यों से भक्त मां के दरबार में माथा टेकने लिए पहुंचते है। भक्तों को साफ सुधरा वातावरण मिल सके इसके लिए पुलिस के जवानों की ड्यूटी लगा दी जाती है।
जितेंद्र सिंह, थाना प्रभारी, बेरी।
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सुबह करीब पांच बजे मां भीमेश्वरी की प्रतिमा को भीतर वाले मंदिर से बाहर वाले भवन लाया गया जहां वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मां का स्नान हुआ और भक्तों ने मंगला आरती की। मां भीमेश्वरी के दर्शनों का यह सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। नवविवाहित जोड़ों ने गठजोड़े की जात लगाकर और नवजात बच्चों के बाल उतरवाकर पूजा की। पुजारी ने मंत्रोच्चारण के साथ स्नान करवाया उसके बाद मंगला आरती करके मां के दर्शन भक्तों के लिए खोल दिए गए। उसके बाद मां के दर्शनों का सिलसिला दोपहर तक जारी रहा। धागा बांधकर मांगी मन्नतें नवविवाहित जोड़ों ने गठजोड़े की जात, बच्चों के बाल उतरवाकर भक्तों ने पूजा अर्चना की। महिलाओं ने मां के मंदिर में पीपल के पेड़ पर धागा बांधकर मन्नत मागी। मां के दरबार में अष्टमी की भीड़ को देखते हुए पुलिस द्वारा कड़े इंतजाम किए गए थे। मां के दरबार में सुबह से ही पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगा दी गई। मंदिर के पुजारी कुलदीप वशिष्ठ का कहना है कि हर माह अष्टमी के दिन मां के दरबार में भक्त दर्शन करने के लिए आते है।
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प्राीचन मंदिर का इतिहास
काफी प्राचीन है मां भीमेश्वरी देवी मंदिर का इतिहास मां भीमेवरी देवी मंदिर का इतिहास अति प्राचीन है। विद्वानों के अनुसार मां की मूर्ति को पांडु पुत्र भीम पाकिस्तान के हिंगजाल पर्वत से लेकर आए थे। भीम ने मां को अपने साथ चलने के लिए कहा तो मां ने पांडु पुत्र से कहा कि मैं तुम्हारे साथ तो चलूंगी, लेकिन तुम मुझे अपनी गोद में रखोगे। रास्ते में जहां भी उतारोगे मैं उस स्थान से आगे नहीं जाऊंगी। भीम ने मां का कहना माना और गोद में उठाकर युद्ध भूमि की तरफ चल पड़ा। जब भीम मां को लेकर बेरी कस्बे से गुजर रहा था तो भीम को लघुशंका के लिए उन्हें अपने कंधे से उतार दिया। बाद में माता को वापस चलने के लिए अपनी गोद में उठाने लगा तो वह नहीं उठ पाई। तभी मां भीमेश्वरी की यहां स्थापना हुई और महाभारत के युद्ध के बाद यहां मंदिर की स्थापना कर दी गई।
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वर्जन:
हर माह मां भीमेश्वरी देवी मंदिर में अष्टमी के भक्तों की भीड़ उमड़ती है और कई राज्यों से भक्त मां के दरबार में माथा टेकने लिए पहुंचते है। भक्तों को साफ सुधरा वातावरण मिल सके इसके लिए पुलिस के जवानों की ड्यूटी लगा दी जाती है।
जितेंद्र सिंह, थाना प्रभारी, बेरी।