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Jhajjar-Bahadurgarh News: सावधानी ही साइबर अपराध से बचाव का हथियार
Sat, 27 May 2023 01:50 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sat, 27 May 2023 01:50 AM IST
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एचडी स्कूल में पुलिस की पाठशाला में मौजूद अधिकारी व छात्र । संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
साल्हावास। झज्जर के पुलिस उपाधीक्षक अनिल कुमार ने कहा है कि साइबर अपराध की कोई सीमा नहीं होती है। आपराधिक प्रवृत्ति के लोग जहां चाहे वहां बैठकर अपराध को अंजाम दे देते हैं। विद्यार्थियों को गैर भरोसे वाले ऐप डाउनलोड करने से बचना चाहिए और इंटरनेट का प्रयोग जरूरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए। सावधानी ही साइबर अपराध से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।
वह गांव साल्हावास स्थित एचडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में शुक्रवार को अमर उजाला की तरफ से आयोजित पुलिस की पाठशाला में बतौर मुख्य अतिथि विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। डीएसपी ने विद्यार्थियों से कहा कि इंटरनेट के दौर में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते समय सावधानी बहुत जरूरी है। उन्होंने बच्चों को नशे के दुष्प्रभाव के बारे में बताया तो छात्राओं को जरूरी सुरक्षा उपाय भी बताएं।
इस मौके पर पुलिस की साइबर सेल के प्रभारी ने कुछ ब्राउजर का नाम लेकर असुरक्षित बताया। उन्होंने उन ब्राउजर का नाम भी बताया जिनका उपयोग बच्चों को कुछ भी सर्च करने के लिए करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपनी निजी जानकारी कहीं भी किसी भी सोशल साइट पर शेयर नहीं करनी चाहिए।
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सोशल मीडिया पर पोस्ट या लिंक को फॉलो न करें
साल्हावास थाना प्रभारी जय भगवान ने बताया कि आजकल छात्र बिना अभिभावक की जानकारी के अपराध प्रवृति वाले लोगों को सोशल मीडिया पर फॉलो करते हैं। उनकी पोस्ट पर कमेंट और शेयर करते हैं, जो गलत है। आपराधिक प्रवृत्ति वाले लोगों को सोशल मीडिया पर फॉलो करने वाले लोगों के खिलाफ भी पुलिस ने अभियान चलाया हुआ है।
साइबर ठगी होने पर 1930 पर दर्ज कराएं शिकायत
साइबर ठगी होने पर राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर हमें अपनी शिकायत दर्ज करवानी चाहिए। विद्यार्थियों को जागरूक करते हुए साइबर विशेषज्ञ मुकेश कुमार ने बताया कि अनजान नंबर से आ रही वीडियो कॉल को कभी भी स्वीकार न करें। साथ ही उन्होंने कहा कि वीडियो गेम आदि के माध्यम से आज साइबर अपराध हो रहे हैं। आजकल लोग बैंक अधिकारी बनकर प्रोसेसिंग काॅल बताकर लोगों की जानकारी एकत्रित कर लेते हैं और फिर लोगों के साथ ठगी करते हैं।
बिना लाइसेंस वाहन चलाया तो नपेंगे पापाजी
यातायात जागरूकता कार्यक्रम प्रभारी सतीश कुमार ने कहा कि वाहन चलाने से पहले वाहन के सभी कागजात पूरे रखने चाहिए। बिना लाइसेंस वाहन चलाने पर दुर्घटना होने पर 6 महीने की सजा और 25 हजार रुपये का जुर्माना लगता है। नाबालिग के हाथ में वाहन देने पर अभिभावक को भी जेल हो सकती है। उन्होंने कहा कि दोपहिया चालक को हमेशा अच्छी क्वालिटी के हेलमेट पहनना चाहिए।
जीवन लेना नहीं, जीवन देना सीखो
एचडी समूह के निदेशक रमेश गुलिया ने बच्चों से कहा कि जीवन लेना नहीं, जीवन देना सीखो। वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग भूलकर भी न करें। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि पाठशाला में दी गई जानकारी पर अमल करें। उन्होंने बच्चों को उन पूर्व विद्यार्थियों का नाम लेकर प्रेरित किया जो आज बड़े पदों पर काम कर रहे हैं।
फार्म में जो नंबर डालते हैं, उसी पर आने लगते हैं कॉल
पुलिस की पाठशाला में छात्राओं ने अपराध, सड़क सुरक्षा से लेकर महिला सुरक्षा तक पर पुलिस अधिकारियों से सवाल किए। एक छात्रा ने पूछा कि जब किसी परीक्षा का फार्म भरते हैं तो उसमें मोबाइल नंबर डालना पड़ता है। उसी नंबर पर तमाम अनचाही कॉल आने लगती हैं। इससे कैसे बचें। साइबर एक्सपर्ट ने कहा कि लड़कियों को अपने अभिभावकों का नंबर डालना चाहिए। साथ ही अनचाही कॉल रोकने के विकल्प का प्रयोग करना चाहिए। एक छात्रा ने सवाल किया कि प्रदूषण प्रमाणपत्र बनाने के नाम पर जो फर्जीवाड़ा हो रहा है, उससे कैसे बच सकते हैं। यातायात प्रभारी ने कहा कि बिना गाड़ी नंबर का फोटो लिए ऑनलाइन सर्टिफिकेट नहीं बन सकता। स्कूल प्रबंधन से जुड़े हेमंत ने भी सवाल किया कि परीक्षा कराने वाली एजेंसियाें से परीक्षार्थी का डाटा लीक होने की समस्या से कैसे बचा जा सकता है। कार्यक्रम विद्यालय के प्राचार्य, कोऑर्डिनेटर के साथ बड़ी संख्या में बच्चे मौजूद रहे।
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साल्हावास। झज्जर के पुलिस उपाधीक्षक अनिल कुमार ने कहा है कि साइबर अपराध की कोई सीमा नहीं होती है। आपराधिक प्रवृत्ति के लोग जहां चाहे वहां बैठकर अपराध को अंजाम दे देते हैं। विद्यार्थियों को गैर भरोसे वाले ऐप डाउनलोड करने से बचना चाहिए और इंटरनेट का प्रयोग जरूरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए। सावधानी ही साइबर अपराध से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।
वह गांव साल्हावास स्थित एचडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में शुक्रवार को अमर उजाला की तरफ से आयोजित पुलिस की पाठशाला में बतौर मुख्य अतिथि विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। डीएसपी ने विद्यार्थियों से कहा कि इंटरनेट के दौर में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते समय सावधानी बहुत जरूरी है। उन्होंने बच्चों को नशे के दुष्प्रभाव के बारे में बताया तो छात्राओं को जरूरी सुरक्षा उपाय भी बताएं।
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इस मौके पर पुलिस की साइबर सेल के प्रभारी ने कुछ ब्राउजर का नाम लेकर असुरक्षित बताया। उन्होंने उन ब्राउजर का नाम भी बताया जिनका उपयोग बच्चों को कुछ भी सर्च करने के लिए करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपनी निजी जानकारी कहीं भी किसी भी सोशल साइट पर शेयर नहीं करनी चाहिए।
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सोशल मीडिया पर पोस्ट या लिंक को फॉलो न करें
साल्हावास थाना प्रभारी जय भगवान ने बताया कि आजकल छात्र बिना अभिभावक की जानकारी के अपराध प्रवृति वाले लोगों को सोशल मीडिया पर फॉलो करते हैं। उनकी पोस्ट पर कमेंट और शेयर करते हैं, जो गलत है। आपराधिक प्रवृत्ति वाले लोगों को सोशल मीडिया पर फॉलो करने वाले लोगों के खिलाफ भी पुलिस ने अभियान चलाया हुआ है।
साइबर ठगी होने पर 1930 पर दर्ज कराएं शिकायत
साइबर ठगी होने पर राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर हमें अपनी शिकायत दर्ज करवानी चाहिए। विद्यार्थियों को जागरूक करते हुए साइबर विशेषज्ञ मुकेश कुमार ने बताया कि अनजान नंबर से आ रही वीडियो कॉल को कभी भी स्वीकार न करें। साथ ही उन्होंने कहा कि वीडियो गेम आदि के माध्यम से आज साइबर अपराध हो रहे हैं। आजकल लोग बैंक अधिकारी बनकर प्रोसेसिंग काॅल बताकर लोगों की जानकारी एकत्रित कर लेते हैं और फिर लोगों के साथ ठगी करते हैं।
बिना लाइसेंस वाहन चलाया तो नपेंगे पापाजी
यातायात जागरूकता कार्यक्रम प्रभारी सतीश कुमार ने कहा कि वाहन चलाने से पहले वाहन के सभी कागजात पूरे रखने चाहिए। बिना लाइसेंस वाहन चलाने पर दुर्घटना होने पर 6 महीने की सजा और 25 हजार रुपये का जुर्माना लगता है। नाबालिग के हाथ में वाहन देने पर अभिभावक को भी जेल हो सकती है। उन्होंने कहा कि दोपहिया चालक को हमेशा अच्छी क्वालिटी के हेलमेट पहनना चाहिए।
जीवन लेना नहीं, जीवन देना सीखो
एचडी समूह के निदेशक रमेश गुलिया ने बच्चों से कहा कि जीवन लेना नहीं, जीवन देना सीखो। वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग भूलकर भी न करें। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि पाठशाला में दी गई जानकारी पर अमल करें। उन्होंने बच्चों को उन पूर्व विद्यार्थियों का नाम लेकर प्रेरित किया जो आज बड़े पदों पर काम कर रहे हैं।
फार्म में जो नंबर डालते हैं, उसी पर आने लगते हैं कॉल
पुलिस की पाठशाला में छात्राओं ने अपराध, सड़क सुरक्षा से लेकर महिला सुरक्षा तक पर पुलिस अधिकारियों से सवाल किए। एक छात्रा ने पूछा कि जब किसी परीक्षा का फार्म भरते हैं तो उसमें मोबाइल नंबर डालना पड़ता है। उसी नंबर पर तमाम अनचाही कॉल आने लगती हैं। इससे कैसे बचें। साइबर एक्सपर्ट ने कहा कि लड़कियों को अपने अभिभावकों का नंबर डालना चाहिए। साथ ही अनचाही कॉल रोकने के विकल्प का प्रयोग करना चाहिए। एक छात्रा ने सवाल किया कि प्रदूषण प्रमाणपत्र बनाने के नाम पर जो फर्जीवाड़ा हो रहा है, उससे कैसे बच सकते हैं। यातायात प्रभारी ने कहा कि बिना गाड़ी नंबर का फोटो लिए ऑनलाइन सर्टिफिकेट नहीं बन सकता। स्कूल प्रबंधन से जुड़े हेमंत ने भी सवाल किया कि परीक्षा कराने वाली एजेंसियाें से परीक्षार्थी का डाटा लीक होने की समस्या से कैसे बचा जा सकता है। कार्यक्रम विद्यालय के प्राचार्य, कोऑर्डिनेटर के साथ बड़ी संख्या में बच्चे मौजूद रहे।