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बच्चियों से यौन शोषण: स्कूल मुखिया कक्ष, प्रयोगशाला और कक्षा में नहीं लग सकेंगे पर्दे और काले शीशे; बड़ा फैसला

Thu, 21 Dec 2023 08:59 AM IST
शाहरुख खान रवि हसिजा, अमर उजाला, झज्जर
रवि हसिजा, अमर उजाला, झज्जर Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 21 Dec 2023 08:59 AM IST
सार

बच्चियों से यौन शोषण मामले में बड़ा फैसला लिया गया है। स्कूल मुखिया कक्ष, प्रयोगशाला और कक्षा में अब पर्दे और काले शीशे नहीं लग सकेंगे। शिक्षा विभाग अलर्ट हो गया है। शिकायत पेटियां फिर खुलेंगी। बेटियों के मन की बात जानेंगे। बालिका मंच भी शुरू होंगे।

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Big decision in sexual exploitation of girls in haryana Curtains and black mirror will not allowed in school
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : फाइल फोटो।

विस्तार

प्रदेश के कुछ जिलों में सरकारी स्कूलों की छात्राओं के साथ यौन शोषण के मामले सामने आने के बाद शिक्षा विभाग अलर्ट हो गया है। स्कूल पर्यवेक्षण के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी और जिला परियोजना संयोजक स्कूल मुखियाओं के कक्ष, प्रयोगशाला, कक्षा कक्ष, आईटीसी लैब की जांच भी करेंगे। 
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इन जगहों पर अब पर्दे लगाने और काले शीशे नहीं लगाए जा सकेंगे। जिन स्कूलों में लगे हैं, उनको हटाने के आदेश दिए गए हैं। स्कूलों में बंद पड़ी शिकायत पेटिकाओं को अब दोबारा खोला जाएगा। बालिका मंच और मन की बात कार्यक्रमों को फिर से शुरू कर बालिकाओं से उनके मन की बात जानी जाएंगी। 
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पर्यवेक्षण के दौरान अधिकारी बच्चों के साथ बात करेंगे। उन्हें अपने मन की बात कहने, उन तक पहुंचाने का अवसर देंगे। सभी पर्यवेक्षक अधिकारी ऐसी सूचनाओं को जिलास्तर पर भी एकत्रित करेंगे और उनकी मॉनीटरिंग रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसका प्रपत्र भी मुख्यालय ने जारी किया है। बाल सुरक्षा के सभी मापदंडों की अनुपालना सुनिश्चित करने के आदेश भी दिए गए हैं। 
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दोबारा सक्रिय की जाएंगी कमेटियां
विभाग ने निर्देश दिए हैं कि जिला व खंडस्तर पर बनाई गईं कमेटियों को सक्रिय किया जाए। बैठकों की रिपोर्ट को संबंधित विभाग के साथ साझा किया जाए। महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ समुचित समन्वय किया जाए। बाल सुरक्षा के लिए सभी स्कूल मुखियाओं के लिए कराए गए प्रशिक्षण की जांच की जाएगी।

 

विद्यालय प्रबंधन समिति को दायित्व सौंपा जाएगा
एसएमसी की महिला सदस्यों द्वारा कम से कम पांच प्रतिशत बालिकाओं से उनके मन की बात जानी जाएगी। कोई मामला आने पर एसएमसी की बैठक के एजेंडा का भाग बनाकर उसकी समुचित कार्रवाई का अनुमोदन किया जाएगा। एसएमसी सदस्यों, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महिला सदस्यों के नाम व मोबाइल नंबर ऐसे स्थान पर लगाए जाए, जहां बच्चों की पहुंच हो सके।

एसएमसी की मासिक बैठक से पहले एसएमसी महिला सदस्य कम से कम 50 बच्चों से चर्चा करके मन की बात जानेंगी और इसके लिए ऐसा माहौल तैयार करेगी ताकि बच्चे बेझिझक अपना पक्ष रख सके। संदिग्ध मामलों का निष्पादन भी पूरी सतर्कता से किया जाएगा, जिससे विद्यार्थी की पहचान उजागर न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। विद्यालय प्रबंधन समितियों को भी इसके लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

पर्यवेक्षण के दौरान सरकारी स्कूलों को अब और ज्यादा गंभीरता से चेक किया जाएगा। यदि छात्राओं को किसी प्रकार की शिकायत है तो वह स्कूल मुखिया, शिक्षक, अपने अभिभावक या एसएमसी और अधिकारियों को बता सकती हैं। नए निर्देश सभी स्कूलों को भेज दिए गए हैं। - सुभाष भारद्वाज, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, झज्जर।
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