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भैया दूज आज, 11:45 बजे से दोपहर 1 बजकर 30 मिनट तक शुभ मुहूर्त
Sun, 03 Nov 2024 04:21 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sun, 03 Nov 2024 04:21 AM IST
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बहादुरगढ़। भैया दूज का त्योहार हर साल कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की दूसरी तारीख को मनाया जाता है। इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाती हैं और उनकी लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं। भैया दूज का पर्व इस बार 3 नवंबर को मनाया जाएगा। भाईयों को तिलक करने का शुभ मुहूर्त 11 बजकर 45 मिनट से 1 बजकर 30 मिनट तक है।
लालचंद कॉलोनी निवासी ज्योतिषी रमेश भगत ने बताया कि पंचांग के अनुसार द्वितीय तिथि का आरंभ 2 नवंबर रात 8 बजकर 22 मिनट से हुआ और द्वितीया तिथि समाप्त 3 नवंबर रात 11 बजकर 6 मिनट पर होगी। ऐसे में भाई दूज का पर्व 3 नवंबर को मनाया जाएगा। वहीं, भाई दूज पूजन का उत्तम समय दिन में 11:45 मिनट से 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। शुभ मुहूर्त में तिलक करने पर भाईयों की लंबी उम्र होती है। यह त्योहार भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक है।
भाई दूज का महत्व
उन्होंने बताया कि कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाया जाने वाला भैया दूज का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन यमुना ने अपने भाई यम को आदर सत्कार के साथ भोजन कराया था। यमराज के वरदान अनुसार जो व्यक्ति इस दिन यमुना में स्नान करके, यम का पूजन करेगा, मृत्यु के पश्चात उसे यमलोक में नहीं जाना पड़ेगा। यमुना को सूर्य की पुत्री माना जाता है और ऐसा माना जाता है कि वे सभी तरह के कष्टों को दूर करती हैं।
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भैया दूज पूजन तिलक विधि
ज्योतिषी प्रवीण शास्त्री ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार भैया दूज पर बहनों को अपने भाई को उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुंह करके तिलक करना चाहिए। तिलक के बाद, बहनों को अपने भाई का मुंह मीठा कराना चाहिए और फिर इसके बाद भाई को नारियल और चावल दें। फिर भाई की आरती उतारें और उनके भाग्योदय और लंबी उम्र की कामना करें। भाइयों को भी अपनी बहनों को उपहार देना चाहिए। पौराणिक मान्यता है कि इससे भाई-बहन का स्नेह हमेशा बना रहता है।
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लालचंद कॉलोनी निवासी ज्योतिषी रमेश भगत ने बताया कि पंचांग के अनुसार द्वितीय तिथि का आरंभ 2 नवंबर रात 8 बजकर 22 मिनट से हुआ और द्वितीया तिथि समाप्त 3 नवंबर रात 11 बजकर 6 मिनट पर होगी। ऐसे में भाई दूज का पर्व 3 नवंबर को मनाया जाएगा। वहीं, भाई दूज पूजन का उत्तम समय दिन में 11:45 मिनट से 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। शुभ मुहूर्त में तिलक करने पर भाईयों की लंबी उम्र होती है। यह त्योहार भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक है।
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भाई दूज का महत्व
उन्होंने बताया कि कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाया जाने वाला भैया दूज का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन यमुना ने अपने भाई यम को आदर सत्कार के साथ भोजन कराया था। यमराज के वरदान अनुसार जो व्यक्ति इस दिन यमुना में स्नान करके, यम का पूजन करेगा, मृत्यु के पश्चात उसे यमलोक में नहीं जाना पड़ेगा। यमुना को सूर्य की पुत्री माना जाता है और ऐसा माना जाता है कि वे सभी तरह के कष्टों को दूर करती हैं।
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भैया दूज पूजन तिलक विधि
ज्योतिषी प्रवीण शास्त्री ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार भैया दूज पर बहनों को अपने भाई को उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुंह करके तिलक करना चाहिए। तिलक के बाद, बहनों को अपने भाई का मुंह मीठा कराना चाहिए और फिर इसके बाद भाई को नारियल और चावल दें। फिर भाई की आरती उतारें और उनके भाग्योदय और लंबी उम्र की कामना करें। भाइयों को भी अपनी बहनों को उपहार देना चाहिए। पौराणिक मान्यता है कि इससे भाई-बहन का स्नेह हमेशा बना रहता है।