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Jhajjar-Bahadurgarh News: चार दिन पहले बने ट्रेजरी ऑफिसर...अब यूपीएससी में 191वीं रैंक
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साल्हावास। साल्हावास गांव के किसान के बेटे जतिन कुमार जाखड़ (27) को यूपीएससी में 191वीं रैंक मिली है। जतिन ने यह कामयाबी पांचवें प्रयास में हासिल की है। तीसरे प्रयास में वे फाइनल में रह गए थे और चौथे प्रयास में प्री में सफलता अर्जित नहीं कर पाएं। चार दिन पहले ही ट्रेजरी ऑफिसर के पद पर भी चयन हुआ है।
वह फिलहाल दिल्ली व रोहतक लाइब्रेरी में अपनी आईएएस की तैयारी कर रहे थे। लगातार चार बार असफल रहने के बाद जतिन के लिए खुशी का पल है। जतिन की सफलता में उनके दादा रणसिंह की प्रेरणा और पिता दीपक जाखड़ का साथ अहम रहा। पूरे गांव को बेटे की कामयाबी पर नाज है।
जतिन ने धौला कुआं स्थित आर्मी स्कूल से दसवीं और 12वीं की परीक्षा पास की थी। एमडीयू यूनिवर्सिटी रोहतक से बीएससी, एमएससी की पढ़ाई की। जतिन ने बताया कि पढ़ते हुए उन्होंने कभी भी अपना ध्यान नहीं भटकने दिया। उसने सोशल मीडिया का प्रयोग सिर्फ जानकारी लेने और शेयर करने तक किया।
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उनका कहना है कि यदि मन में कुछ करने की ठान लो और घर पर ही उसकी पूरी मेहनत से तैयारी कर लो तो किसी कोचिंग भी जरूरत भी नहीं होती। जतिन जाखड़ के घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
जतिन के पिता साधारण किसान
जतिन के पिता दीपक साधारण किसान हैं और दो एकड़ जमीन के मालिक हैं। माता पूनम व दादी कृष्णा गृहिणी हैं। दादा रणसिंह सेना में हवलदार के पद से सेवानिवृत्त रहे हैं। भाई विनित एमए की पढ़ाई कर रहे हैं। माता-पिता ने अपने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए अपनी सारी कमाई उनकी शिक्षा पर लगा दी। उनका कहना है कि बेटे में कुछ कर गुजरने का जज्बा रहा है इसलिए वे उसके सपने पूरे करने में लग गए।
दादा की प्रेरणा से मिली जतिन जाखड़ को सफलता
जतिन जाखड़ के दादा रणसिंह जतिन को हमेशा ही प्रेरित करते रहे हैं। उन्होंने कभी अपने पोते को हतोत्साहित नहीं होने दिया। अबकी बार होली जतिन जाखड़ के परिवार के लिए खुशियां लेकर आई है। जतिन ने बताया कि जब भी उन्हें समय मिलता है तो वे क्रिकेट अवश्य खेलते हैं।
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वह फिलहाल दिल्ली व रोहतक लाइब्रेरी में अपनी आईएएस की तैयारी कर रहे थे। लगातार चार बार असफल रहने के बाद जतिन के लिए खुशी का पल है। जतिन की सफलता में उनके दादा रणसिंह की प्रेरणा और पिता दीपक जाखड़ का साथ अहम रहा। पूरे गांव को बेटे की कामयाबी पर नाज है।
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जतिन ने धौला कुआं स्थित आर्मी स्कूल से दसवीं और 12वीं की परीक्षा पास की थी। एमडीयू यूनिवर्सिटी रोहतक से बीएससी, एमएससी की पढ़ाई की। जतिन ने बताया कि पढ़ते हुए उन्होंने कभी भी अपना ध्यान नहीं भटकने दिया। उसने सोशल मीडिया का प्रयोग सिर्फ जानकारी लेने और शेयर करने तक किया।
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उनका कहना है कि यदि मन में कुछ करने की ठान लो और घर पर ही उसकी पूरी मेहनत से तैयारी कर लो तो किसी कोचिंग भी जरूरत भी नहीं होती। जतिन जाखड़ के घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
जतिन के पिता साधारण किसान
जतिन के पिता दीपक साधारण किसान हैं और दो एकड़ जमीन के मालिक हैं। माता पूनम व दादी कृष्णा गृहिणी हैं। दादा रणसिंह सेना में हवलदार के पद से सेवानिवृत्त रहे हैं। भाई विनित एमए की पढ़ाई कर रहे हैं। माता-पिता ने अपने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए अपनी सारी कमाई उनकी शिक्षा पर लगा दी। उनका कहना है कि बेटे में कुछ कर गुजरने का जज्बा रहा है इसलिए वे उसके सपने पूरे करने में लग गए।
दादा की प्रेरणा से मिली जतिन जाखड़ को सफलता
जतिन जाखड़ के दादा रणसिंह जतिन को हमेशा ही प्रेरित करते रहे हैं। उन्होंने कभी अपने पोते को हतोत्साहित नहीं होने दिया। अबकी बार होली जतिन जाखड़ के परिवार के लिए खुशियां लेकर आई है। जतिन ने बताया कि जब भी उन्हें समय मिलता है तो वे क्रिकेट अवश्य खेलते हैं।