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सिंघल गुट को मिली बीसीसीआई की चौधर

अमर उजाला ब्यूरो/ बहादुरगढ़ Updated Wed, 01 Jul 2015 02:02 AM IST
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उद्यमियों के संगठन बहादुरगढ़ चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री की चौधर की लड़ाई में रामकिशन सिंघल गुट ने धमाकेदार जीत हासिल की है।
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अशोक रेढू ग्रुप ही नहीं, इस ग्रुप से प्रधान पद के उम्मीदवार अजय गुप्ता को भी हार का मुंह देखना पड़ा है। रेढ़ू ग्रुप के केवल तीन सदस्यों को जीत नसीब हुई, जबकि सिंघल पक्ष से 16 को जीत मिली।


इस जीत के बाद हुई कार्यकारिणी की बैठक में सभी सदस्यों ने एकमत से रामकिशन सिंघल को प्रधान चुन लिया और अन्य पदों का चुनाव एक सप्ताह बाद करने का निर्णय लिया है।

मंगलवार सुबह से ही बीसीसीआई भवन में वोट डालने के लिए कोलेजियम सदस्यों का आना शुरू हो गया था। दोनों ही गुटों में वोट डलवाने को लेकर जबरदस्त उत्साह नजर आया।

इसी जोश में कोलेजियम के कुल 104 सदस्यों में से 103 ने मतदान किया। जबकि एक सदस्य संदीप गुप्ता क्षेत्र से बाहर होने के कारण मतदान नहीं कर पाए। कड़ेे मुकाबले का भरोसा महज कयास ही साबित हुआ औैर अशोक रेढ़ू ग्रुप को करारी हार मिली।

कार्यकारिणी के चुनाव में रामकिशन सिंघल ग्रुप के 16 सदस्यों को जीत हासिल हुई, जबकि अशोक रेढू़ ग्रुप के तीन सदस्य ही जीतने में सफल रहे। सबसे अधिक मत सिंघल गुट के प्रवीण गर्ग को (59) मिले। अशोक रेढू ग्रप से कर्मबीर अग्रवाल, नितिन जैन व अखिल मित्तल जीतने में सफल रहे।

इस चुनाव में सबसे कम (45) वोट रोहित कपूर को मिले। वहीं अशोक रेढू के बाद उनके गुट से प्रधान पद के उम्मीदवार बनाए गए अजय गुप्ता को महज 47 वोट मिलने से हार का सामना करना पड़ा। जबकि रामकिशन सिंघल ग्रुप से हारने वालों में भूपेंद्र सिंह व विवेक खुल्लर के साथ 52 वोट लेकर भी किस्मत के कारण हारने वाले सुरेंद्र वशिष्ठ का नाम शमिल रहा।

बीसीसीआई के वार्ड 11 से कोलेजियम के बुजुर्ग सदस्य नंदलाल नारंग गंभीर बीमारी के बावजूद वोट डालने पहुंचे। हालांकि अशोक रेढ़ू ग्रुप की तरफ से कुछ आपत्ति भी जताई गई, जिसके बाद कुछ देर माहौल तनाव भरा हो गया।

लेकिन चुनाव अधिकारी ने बातचीत कर संतुष्ट होने के बाद उनके साथ वोट डालने के लिए उनके पुत्र संजय को जाने की इजाजत दे दी।

कार्यकारिणी चुनाव के लिए हुए मतदान में जेके अग्रवाल, सुभाष जग्गा, अखिल मित्तल और सुरेद्र वशिष्ठ को एक समान मत मिले। इसमें पर्ची के आधार पर सुरेंद्र वशिष्ठ को हार मिली।

यहां मजे की बात है कि अखिल मित्तल को कोलेजियम चुनाव में भी टॉस के आधार पर जीत मिली थी और एक बार फिर कार्यकारिणी चुनाव में वह किस्मत के धनी साबित हुए।

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