{"_id":"69af0e7b97d808ad50085bd7","slug":"basoda-prasad-was-offered-to-doba-wali-mata-in-malda-bahadurgarh-news-c-203-1-sroh1011-124664-2026-03-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhajjar-Bahadurgarh News: मालड़ा में डोबा वाली माता को बासोड़ा का प्रसाद चढ़ाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhajjar-Bahadurgarh News: मालड़ा में डोबा वाली माता को बासोड़ा का प्रसाद चढ़ाया
विज्ञापन
फोटो संख्या:77- गांव मालड़ा में डोबा वाली माता की पूजा करती महिलाएं---स्रोत- आयोजक
महेंद्रगढ़। गांव मालड़ा में बासोड़ा पर्व धूमधाम से मनाया गया। डोबा वाली माता को रात्रि के बने भोजन का प्रसाद चढ़ाया व सुख शांति और समृद्धि की कामना के साथ साथ मन्नतें मांगी।
सामाजिक कार्यकर्ता सुजान मालड़ा ने बताया कि बासोड़ा का पर्व हमारी पुरानी संस्कृति से जुड़ा हुआ पर्व है। होली से एक सप्ताह बाद गांव के हर घर में रात्रि को बाजरा युक्त मांड मार मीठे चावल, गुलगुले व पकौड़े आदि पकवान बनाते हैं।
रात्रि के बने भोजन को दूसरे दिन की सुबह सबसे पहले माता डोबा वाली को चढ़ाया जाता है। दिन के पहले पहर सुबह चार बजे ही महिलाएं उठकर अपनी पारंपरिक वेशभूषा पहनकर बच्चों को साथ लेकर माता को प्रसाद चढ़ाती हैं। उसके बाद शेष भोजन को परिवार के लोग खाते हैं।
विज्ञापन
इस दिन ताजा भोजन दोपहर को बनाए जाने की परंपरा शुरू हो जाती है। इस दिन के बाद से दलिया, जौ से बनी राबड़ी, लस्सी, दही का सेवन किया जाता है। गांवों के लोग गर्मी के मौसम में प्याज का अधिक सेवन सुबह-सुबह बासी रोटी के साथ करते हैं।
बासोड़ा का यह पर्व एक सप्ताह तक चलता है। सैंकड़ों महिलाओं ने अपने परिवार के साथ बासोड़ा पर्व पर डोबा वाली माता को प्रसाद चढ़ाया।
विज्ञापन
सामाजिक कार्यकर्ता सुजान मालड़ा ने बताया कि बासोड़ा का पर्व हमारी पुरानी संस्कृति से जुड़ा हुआ पर्व है। होली से एक सप्ताह बाद गांव के हर घर में रात्रि को बाजरा युक्त मांड मार मीठे चावल, गुलगुले व पकौड़े आदि पकवान बनाते हैं।
विज्ञापन
रात्रि के बने भोजन को दूसरे दिन की सुबह सबसे पहले माता डोबा वाली को चढ़ाया जाता है। दिन के पहले पहर सुबह चार बजे ही महिलाएं उठकर अपनी पारंपरिक वेशभूषा पहनकर बच्चों को साथ लेकर माता को प्रसाद चढ़ाती हैं। उसके बाद शेष भोजन को परिवार के लोग खाते हैं।
विज्ञापन
इस दिन ताजा भोजन दोपहर को बनाए जाने की परंपरा शुरू हो जाती है। इस दिन के बाद से दलिया, जौ से बनी राबड़ी, लस्सी, दही का सेवन किया जाता है। गांवों के लोग गर्मी के मौसम में प्याज का अधिक सेवन सुबह-सुबह बासी रोटी के साथ करते हैं।
बासोड़ा का यह पर्व एक सप्ताह तक चलता है। सैंकड़ों महिलाओं ने अपने परिवार के साथ बासोड़ा पर्व पर डोबा वाली माता को प्रसाद चढ़ाया।