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दिल्ली में प्रवेश पर पाबंदी का असर बहादुरगढ़ के ट्रांसपोर्ट पर
ब्यूरो/अमर उजाला बहादुरगढ़
Updated Thu, 07 Jan 2016 01:51 AM IST
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दूसरे राज्यों में जाने वाले वाहनों की दिल्ली में प्रवेश पर पांबदी का खासा असर बहादुरगढ़ के ट्रांस्पोर्ट पर भी पड़ा है। यहां की करीब 200 गाड़ियां इस फैसले की जद में आ गई हैं। यूपी-बिहार की ओर जाने वाली इन गाड़ियों को अब लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा। एक गाड़ी को लगभग 3 हजार रुपये का डीजल अधिक फूंकना पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल हाइवे-1 और 8 के बाद अब एनएच 2, दस और एनएच 58 व एसएच 57 से आने वाले उन भारी वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट के इस फैसले का असर बहादुरगढ़ पर भी पड़ा है। औद्योगिक नगरी होने के कारण बहादुरगढ़ में ट्रांस्पोर्ट का काम अच्छा है। यहां 5 ट्रांस्पोर्ट यूनियनें हैं। लगभग साढ़े 12 हजार माल ढुलाई करने वाले वाहन हैं। रोजाना सैंकड़ों माल ढोने वाले वाहन यहां से दिल्ली व दूसरे राज्यों के लिए निकलते हैं। इन वाहनों के प्रवेश पर रोक से मंजिल तक पहुंचने के लिए इन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। इससे समय और पैसा दोनों अधिक लगेगा।
छह लाख का हेरफेर
बहादुरगढ़ पब्लिक कैरियर ट्रक यूनियन के प्रधान मनोज मान ने बताया कि बहादुरगढ़ की 200 गाड़ियां हर रोज दिल्ली से होकर यूपी, बिहार व दूसरे राज्यों में जाती हैं। प्रवेश पर रोक लगने से अब इन्हें सोनीपत-गौरीपुल-गाजियाबाद होकर जाना पड़ेगा। यानी पहले जहां 50 किलोमीटर तक का सफर तय करना पड़ता था अब 140 किलोमीटर तय करना पड़ेगा। इससे ज्यादा समय बर्बाद होगा। खर्चा भी बढ़ गया है। 1 गाड़ी पर 3000 रुपये का डीजल अधिक लगेगा।
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ट्रांसपोर्टर बोले,
प्रधान रामकुवार ने कहा कि दिनों दिन ट्रांस्पोर्टरों को तोड़ने का काम किया जा रहा है। ट्रांस्पोर्ट का काम लगभग ठप सा हो गया है। पहले एनजीटी एक्ट के तहत दस साल पुरानी गाड़ियों पर रोक लगाकर ट्रांस्पोर्टरों पर मार की गई। अब नया फरमान जारी कर दिया गया। राजेंद्र अरोड़ा ने कहा कि जमीन चली गई तो ट्रांस्पोर्ट का काम शुरू किया। अब धीरे धीरे इस धंधे को भी छीना जा रहा है। ट्रकों से न केवल ट्रांस्पोर्टर बल्कि चलाने वाले चालक, श्रमिक और हेल्परों के पेट जुड़े हैं। ऐसे में सभी को भूखे मरने की नौबत आ जाएगी। महेश कौशिक ने कहा कि यहां के आधे से अधिक ट्रक पहले ही एनजीटी के फरमान की जद में आ गए थे। जो बचे हैं उनको लंबी दूरी तय करके जाना पड़ेगा। इससे तो बेहद नुकसान हो जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल हाइवे-1 और 8 के बाद अब एनएच 2, दस और एनएच 58 व एसएच 57 से आने वाले उन भारी वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट के इस फैसले का असर बहादुरगढ़ पर भी पड़ा है। औद्योगिक नगरी होने के कारण बहादुरगढ़ में ट्रांस्पोर्ट का काम अच्छा है। यहां 5 ट्रांस्पोर्ट यूनियनें हैं। लगभग साढ़े 12 हजार माल ढुलाई करने वाले वाहन हैं। रोजाना सैंकड़ों माल ढोने वाले वाहन यहां से दिल्ली व दूसरे राज्यों के लिए निकलते हैं। इन वाहनों के प्रवेश पर रोक से मंजिल तक पहुंचने के लिए इन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। इससे समय और पैसा दोनों अधिक लगेगा।
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छह लाख का हेरफेर
बहादुरगढ़ पब्लिक कैरियर ट्रक यूनियन के प्रधान मनोज मान ने बताया कि बहादुरगढ़ की 200 गाड़ियां हर रोज दिल्ली से होकर यूपी, बिहार व दूसरे राज्यों में जाती हैं। प्रवेश पर रोक लगने से अब इन्हें सोनीपत-गौरीपुल-गाजियाबाद होकर जाना पड़ेगा। यानी पहले जहां 50 किलोमीटर तक का सफर तय करना पड़ता था अब 140 किलोमीटर तय करना पड़ेगा। इससे ज्यादा समय बर्बाद होगा। खर्चा भी बढ़ गया है। 1 गाड़ी पर 3000 रुपये का डीजल अधिक लगेगा।
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ट्रांसपोर्टर बोले,
प्रधान रामकुवार ने कहा कि दिनों दिन ट्रांस्पोर्टरों को तोड़ने का काम किया जा रहा है। ट्रांस्पोर्ट का काम लगभग ठप सा हो गया है। पहले एनजीटी एक्ट के तहत दस साल पुरानी गाड़ियों पर रोक लगाकर ट्रांस्पोर्टरों पर मार की गई। अब नया फरमान जारी कर दिया गया। राजेंद्र अरोड़ा ने कहा कि जमीन चली गई तो ट्रांस्पोर्ट का काम शुरू किया। अब धीरे धीरे इस धंधे को भी छीना जा रहा है। ट्रकों से न केवल ट्रांस्पोर्टर बल्कि चलाने वाले चालक, श्रमिक और हेल्परों के पेट जुड़े हैं। ऐसे में सभी को भूखे मरने की नौबत आ जाएगी। महेश कौशिक ने कहा कि यहां के आधे से अधिक ट्रक पहले ही एनजीटी के फरमान की जद में आ गए थे। जो बचे हैं उनको लंबी दूरी तय करके जाना पड़ेगा। इससे तो बेहद नुकसान हो जाएगा।