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आजादी से पहले टाउन हॉल पर पं. श्रीराम शर्मा ने लहरा दिया था तिरंगा

Thu, 26 Aug 2021 01:47 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 26 Aug 2021 01:47 AM IST
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azadi ka amrit mhotsav
देश के स्वतंत्रता आंदोलन में जहां असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों की विशेष भूमिका रही है, जबकि झज्जर के पं. श्रीराम शर्मा के योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता। देश को आजादी बेशक 15 अगस्त 1947 को मिली हो लेकिन झज्जर में तो आजादी से पच्चीस साल पहले ही तिरंगा फहरा दिया गया था। महात्मा गांधी ने जब देश में स्वराज की घोषणा की तो स्वतंत्रता सेनानी पं. श्रीराम शर्मा ने शहर के टाउन हाल पर 15 जनवरी 1922 को तिरंगा लहराया था। बताया जा रहा है कि उनके साथ राव मंगलीराम, हरि सिंह जैन शहर के घंटा घर पर तिरंगा लहराने के लिए गुंबद पर चढ़ रहे थे। राव मंगली राम की कमर पर तिरंगा बांधा गया था। उस समय शहर के सैकड़ों लोगों सहित स्वतंत्रता सेनानी बिशंभर दयाल, नागर मल, रामकला सुनार, मोहन स्वामी आदि नीचे नारे लगा रहे थे।
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अंग्रेज एसपी से बोले, मारो गोली
जब पंडित श्रीराम शर्मा तिरंगा झंडा लहराने के लिए जब टाउन हाल की गुंबद पर चढ़ रहे थे तो उस समय के रोहतक जिले के अंग्रेज एसपी ने उन्हें ऐसा नहीं करने के लिए कहा लेकिन वे तिरंगा लहराने के लिए आगे बढ़ते रहे। जब वे नहीं माने तो एसपी ने उन्हें गोली मारने की धमकी दी। जिसके बाद लाला हरिसिंह जैन ने एसपी को कहा कि वे जान हथेली पर रख कर आए हैं, मारो गोली। वे अपना काम करें, हम अपना काम करेंगे। एसपी की धमकी की परवाह नहीं करते हुए टाउन हाल पर तिरंगा फहराया था। इसके बाद अंग्रेज सैनिकों ने उन्हें नीचे उतारा और पं. श्रीराम को बोरी में डालकर जीप के पीछे बांध कर घसीटा और कोड़े भी मारे गए। इसके बाद पं. श्रीराम शर्मा को रोहतक जेल में ले जाया गया और अंग्रेजों ने उन्हें यातनाएं दी। उसके बाद उन्हें अंबाला जेल में डाल दिया गया। वे लाहौर, रावलपिंडी, दिल्ली सहित अनेक जेलों में रहे और अंग्रेजी सरकार की यातनाएं सही।
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हरियाणा स्वतंत्रता सेनानी सम्मान समिति के पूर्व उपाध्यक्ष एवं लाला हरिसिंह जैन के पुत्र मगनेश चंद्र जैन का कहाना है कि पं. श्रीराम शर्मा ने स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत भी देश और प्रदेश के निर्माण में महती भूमिका निभाई। उन्होंने इतिहास व नवरत्न आदि कई पुस्तकें भी लिखी।1 अक्टूबर, 1899 में झज्जर में जन्मे पं. श्रीराम शर्मा ने 1919 में अपनी शिक्षा के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से प्रभावित होकर कॉलेज छोड़कर उनके साथ आंदोलनों में भाग लिया। आजादी के समर्थन में पं. श्रीराम शर्मा ने साप्ताहिक पत्र हरियाणा तिलक उर्दू और हिंदी में रोहतक से 18 मार्च 1923 में निकाला। 7 अक्टूबर 1989 को पं. श्रीराम शर्मा का निधन हो गया था।
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