झज्जर। लघु सचिवालय में सोमवार को 14वें दिन आशा वर्कर्स का धरना जारी रहा। धरने की अध्यक्षता सविता झज्जर ने की और संचालन अनीता बहादुरगढ़ ने किया। इस अवसर पर राज्य उपप्रधान प्रवेश मातनहेल, जिला प्रधान कविता दुल्हेड़ा, जिला सचिव अनीता, प्रधान मूर्ति माजरा ने धरने को संबोधित करते हुए बताया कि सरकार आशा वर्कर्स के आंदोलन को लंबा खींचना चाहती है और तोड़ना चाहती है। सोमवार को आशाओं के हड़ताल के 14 दिन पूरे हो गए है सरकार तानाशाही रुख अपनाए हुए हैं। इसलिए आशा वर्कर्स की हड़ताल को 29 अगस्त तक के लिए बढ़ा दिया गया है। आशा वर्कर्स यूनियन सरकार से मांग करती है कि तानाशाही का रास्ता छोड़कर आशा वर्कर्स की मांग और समस्याओं को वार्ता के माध्यम से समाधान करें। इस दौरान शर्मिला, रेखा, सुमन, अनीता, सुनीता आदि ने भी संबोधित किया। उन्होंने आशा वर्कर को केवल 4 हजार रुपये फिक्स और कुछ इंसेंटिव्स दिए जाते हैं जो एवरेज में प्रति वर्कर 75 सौ रुपये के आसपास बनते हैं सरकारी कामों को अंजाम तक पहुंचाने में ही आशा के लगभग 25 सौ रुपये किराए में खर्च हो जाते हैं । जबकि सरकार आशा वर्करों से ऑनलाइन ऑफलाइन फील्ड वर्क तीन तरह से काम करने का दबाव बनाए हुए हैं । सीटू सचिव किरण बहराना,रमेश जाखड़, मुकेश खरब, बलबीर कोट ने संबोधित करते हुए बताया वर्तमान में आशा वर्कर्स स्वास्थ्य विभाग और सरकार की धमकियों से परेशान है, 2018 के बाद आशाओं के काम लगातार कई गुना बढ़ा दिए गए हैं परंतु आशाओं के मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई वर्ष 2018 के बाद महंगाई भी दोगुनी हो गई है आशा वर्कर की इंसेंटिव में एक रुपए की भी बढ़ोतरी नहीं की गई ।