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Jhajjar-Bahadurgarh News: एआईयूटीयूसी ने मृतक के परिजनों को 20 लाख मुआवजा देने की मांग की
Sun, 24 May 2026 05:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sun, 24 May 2026 05:15 PM IST
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बहादुरगढ़। ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी) के राज्य कमेटी सदस्य सतीश कुमार ने एमआईई स्थित विकास हाईटेक एडहेसिव प्राइवेट लिमिटेड में बॉयलर फटने से हुए हादसे को गंभीर लापरवाही का परिणाम बताया।
उन्होंने कहा कि हादसे में एक मजदूर शैलेश कुमार की मौत हो गई जबकि पांच अन्य मजदूर जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। मृतक के परिजनों को 20 लाख रुपये मुआवजा देने और भविष्य में ऐसे हादसे रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम करने की मांग की।
सतीश ने आरोप लगाया कि कंपनी प्रबंधन ने शैलेश को दो दिन पहले ही काम पर आने की बात कह रहा है। अक्सर कंपनियां पुराने मजदूरों को नया दिखाकर ईएसआई, पीएफ और अन्य श्रम सुविधाएं देने से बचती हैं।
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उन्होंने मांग की कि श्रम विभाग निष्पक्ष जांच कर आरोपी मालिकों पर कार्रवाई करे। घायलों का वेतन सहित मुफ्त इलाज कराया जाए। उन्होंने कहा कि डीसी और एसडीएम स्तर पर जांच कमेटियां बनती हैं लेकिन कुछ दिनों बाद प्रशासन और कंपनियां फिर पुराने ढर्रे पर लौट आती हैं।
बिना अनुमति बॉयलर चलाने पर भी सवाल उठाए गए। सतीश ने याद दिलाया कि करीब सात-आठ वर्ष पहले भी बॉयलर हादसे में छह-सात मजदूरों की जान चली गई थी।
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उन्होंने कहा कि हादसे में एक मजदूर शैलेश कुमार की मौत हो गई जबकि पांच अन्य मजदूर जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। मृतक के परिजनों को 20 लाख रुपये मुआवजा देने और भविष्य में ऐसे हादसे रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम करने की मांग की।
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सतीश ने आरोप लगाया कि कंपनी प्रबंधन ने शैलेश को दो दिन पहले ही काम पर आने की बात कह रहा है। अक्सर कंपनियां पुराने मजदूरों को नया दिखाकर ईएसआई, पीएफ और अन्य श्रम सुविधाएं देने से बचती हैं।
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उन्होंने मांग की कि श्रम विभाग निष्पक्ष जांच कर आरोपी मालिकों पर कार्रवाई करे। घायलों का वेतन सहित मुफ्त इलाज कराया जाए। उन्होंने कहा कि डीसी और एसडीएम स्तर पर जांच कमेटियां बनती हैं लेकिन कुछ दिनों बाद प्रशासन और कंपनियां फिर पुराने ढर्रे पर लौट आती हैं।
बिना अनुमति बॉयलर चलाने पर भी सवाल उठाए गए। सतीश ने याद दिलाया कि करीब सात-आठ वर्ष पहले भी बॉयलर हादसे में छह-सात मजदूरों की जान चली गई थी।