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Jhajjar-Bahadurgarh News: धरोहर पर दाग...अतिक्रमण की चपेट में शहर के ऐतिहासिक गेट
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फोटो : 2भाड़ावास गेट पर अतिक्रमण की वजह से लगा जाम। संवाद
रेवाड़ी। शहर के ऐतिहासिक धरोहरों की पहचान माने जाने वाले गेट अब अतिक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। भाड़ावास गेट इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यहां दोनों ओर बने गेट से वाहनों का निकलना मुश्किल हो गया है।
गेट के पास दुकानदारों, रेहड़ी-फड़ी वालों और अवैध पार्किंग ने पूरी सड़क घेर रखी है। ऊपर से सड़क निर्माण कार्य के चलते रोजाना यहां जाम की स्थिति बनी रहती है।
स्थानीय ब्रिजेश और सुरेश का कहना है कि नगर परिषद की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही कई बार की गई लेकिन वह केवल कुछ दिनों तक ही असरदार साबित होती है। जैसे ही अभियान खत्म होता है, कब्जेदार दोबारा वहीं जम जाते हैं। इसके कारण लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है और गेट की ऐतिहासिक सुंदरता भी बिगड़ गई है।
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यातायात व्यवस्था चरमराने से सबसे अधिक परेशानी स्कूल आने-जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को होती है। आसपास के दुकानदार अपनी दुकान का सामान गेट के पास तक फैला लेते हैं जिससे जगह और भी कम हो जाती है। राहगीरों का कहना है कि यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले समय में गेटों से निकलना लगभग असंभव हो जाएगा।
यह गेट न केवल शहर की धरोहर हैं बल्कि अहीरवाल की ऐतिहासिक पहचान भी। अगर इनका संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों तक यह विरासत सुरक्षित नहीं पहुंच पाएगी।
वर्जन
नगर परिषद अतिक्रमण पर लगातार कार्रवाई कर रही है। अतिक्रमण बिल्कुल भी बदार्शत नहीं है। जहां भी अतिक्रमण मिलेगा, कार्रवाई की जाएगी। -पूनम यादव, चेयरपर्सन, नगर परिषद रेवाड़ी।
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गेट के पास दुकानदारों, रेहड़ी-फड़ी वालों और अवैध पार्किंग ने पूरी सड़क घेर रखी है। ऊपर से सड़क निर्माण कार्य के चलते रोजाना यहां जाम की स्थिति बनी रहती है।
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स्थानीय ब्रिजेश और सुरेश का कहना है कि नगर परिषद की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही कई बार की गई लेकिन वह केवल कुछ दिनों तक ही असरदार साबित होती है। जैसे ही अभियान खत्म होता है, कब्जेदार दोबारा वहीं जम जाते हैं। इसके कारण लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है और गेट की ऐतिहासिक सुंदरता भी बिगड़ गई है।
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यातायात व्यवस्था चरमराने से सबसे अधिक परेशानी स्कूल आने-जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को होती है। आसपास के दुकानदार अपनी दुकान का सामान गेट के पास तक फैला लेते हैं जिससे जगह और भी कम हो जाती है। राहगीरों का कहना है कि यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले समय में गेटों से निकलना लगभग असंभव हो जाएगा।
यह गेट न केवल शहर की धरोहर हैं बल्कि अहीरवाल की ऐतिहासिक पहचान भी। अगर इनका संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों तक यह विरासत सुरक्षित नहीं पहुंच पाएगी।
वर्जन
नगर परिषद अतिक्रमण पर लगातार कार्रवाई कर रही है। अतिक्रमण बिल्कुल भी बदार्शत नहीं है। जहां भी अतिक्रमण मिलेगा, कार्रवाई की जाएगी। -पूनम यादव, चेयरपर्सन, नगर परिषद रेवाड़ी।